‘परममहाद्वीप’ निर्धारित करेगा भविष्य में पृथ्वी की जलवायु, जानिए क्या होगा तब

भविष्य में पृथ्वी (Earth) के सारे महाद्वीप (Continents)एक हो जाएंगे जिसका जलवायु पर गहरा असर होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

भविष्य में पृथ्वी (Earth) के सारे महाद्वीप (Continents)एक हो जाएंगे जिसका जलवायु पर गहरा असर होगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पृथ्वी (Earth) के सभी महाद्वीप (Continets) भविष्य में एक होकर विशाल परममहाद्वीप (Supercontinent) बना लेंगे जो आज से उस समय की जलावायु (Climate) पर हावी हो जाएगा.

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  • Last Updated: December 19, 2020, 3:40 PM IST
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इस समय पृथ्वी (Earth) का वातावरण (Environment) जलवायु परिवर्तन (Climate change) और ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के प्रभावों से जूझ रहा है.  मानवीय गतिविधियों (Human Activities) के कारण हमारे वायुमंडल (Atmosphere) में ग्रीन हाउस गैसों (Geen House Gases) में तेजी से हो रहे इजाफे के कारण पृथ्वी गर्म हो रही है जिसका नुकसान इंसानों को बहुत ही महंगा पड़ रहा है. लेकिन ताजा शोध के मुताबिक भविष्य में सभी महाद्वीप (Continets) मिलकर के एक विशाल परममहाद्वीप (Supercontinent) बना लेंगे जो उस समय की पृथ्वी की जलावायु को निर्धारित करेगा.

सुपरकॉन्टिनेट का मॉडल

परममहाद्वीप महाद्वीपों से मिलकर बने एक विशाल भूभाग को कहते हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक यह परममहाद्वीप अभी से 20 करोड़ साल बाद तक पूरी तरह से बन सकता हैं जिसके बाद वह ग्रह की जलवायु पर बहुत गहरा असर डाल सकता है. लाइव साइंस में प्रकाशित खबर के मुताबिक वैज्ञानिकों ने हाल ही में पृथ्वी के दूर के भविष्य के दृश्य का मॉडल बनाया है जिसे उन्होंने इस हाल ही में अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के वार्षिक मीटिंग में प्रस्तुत किया है.

दो तरह से बन सकता है परममहाद्वीप
शोधकर्ताओं ने दो स्थितियों का अन्वेषण किया. पहले में उनके अनुसार भविष्य में 20 करोड़ साल बाद करीब करीब सभी महाद्वीप उत्तरी गोलार्द्ध तक खिसक जाएंगे जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में केवल अटार्कटिका ही बचेगा. दूसरी स्थिति में करीब 25 करोड़ साल बाद एक परममहाद्वीप पृथ्वी के भूमध्य रेका के पास बनेगा और दक्षिणी और उत्तर ध्रुव तक फैला होगा.

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पृथ्वी (Earth) पर महाद्वीप (Continents) कभी स्थायी नहीं रहे बल्कि उनका आकार हमेशा ही बदलता रहा है. (तस्वीर: Pixabay)


यह प्रभाव होना भी तय



दोनों स्थितियों के लिए शोधकर्ताओं ने परममहाद्वीपों की स्थलाकृतियों के आधार पर उनका वैश्विक जलवायु पर होने वाले प्रभाव का अनुमान भी लगाया. वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्हें यह जानकर हैरानी हुई कि जब महाद्वीप उत्तर की ओर खिसकेंगे और भूभाग पहाड़ों से भरा होगा तब वैश्विक तापमान दूसरे मॉडल की तुलना में बहुत कम होगा.  सकी वजह से पृथ्वी इतनी ज्यादा ठंडी हो जाएगी जितना की वह पिछले 10 करोड़ सालों में कभी नहीं रही थी.

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पहली बार नहीं बनेगा परममहाद्वीप

नासा के गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज में फिजिकल साइंटिस्ट और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक माइकल वे ने बताया किपृथ्वी के महाद्वीप पहले कभी वैसे नहीं दिखे जैसे आज दिखते हैं. पिछले 3 अरब सालों में हमारा ग्रह कई चक्रों (Cycles) से गुजरा है जहां महाद्वीपों ने साथ आकर विशाल परममहाद्वीप बनाए हैं और उसके बाद वे टूटे हैं.

पहले कब कब बने थे परममहाद्वीप

सबसे हालिया परममहाद्वीप जो बना था उसे पंजीया (Pangaea) कहा जाता है. यह करीब 30 से 20 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर मौजूद था जिसमें आज के अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका शामिल थे. पंजीया के पहले रोडिनिया नाम का परममहाद्वीप था जो करीब 90 से 70 करोड़ साल पहले मौजूद रहा था. इससे पहले नूना 1.6 अरब साल पहले बना था और 1.4 अरब साल पहले टूटा था.

एक दूसरे मॉडल ने सुझाए थे ये परममहाद्वीप

वैज्ञानिकों की एक दूसरी टीम ने इससे पहले भविष्य में परममहाद्वीप के बनने का मॉडल बनाया था. उन्होंने उस परममहाद्वीप का नाम ऑरिका (Aurica) बताया था. जो आज से 25 करोड़ साल बाद बनेगा. उनके अनुमान के मुताबिक यह परममहाद्वीप भी भूमध्यरेखा के पास महाद्वीपों के इकठ्ठे होने से बनेगा जबकि एक अन्य परममहाद्वीप अमेशिया (Amaisa) उत्तरी ध्रुव पर बनेगा.

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आज से 10 करोड़ साल पृथ्वी (Earth) पर हिमयुग (Ice Age) जैसे हालात हो सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


इन कारकों को किया अध्ययन में शामिल

इस नए अध्ययन में वे और उनकी टीम ने ऑरिका और अमेशिया भूभाग और विभिन्न स्थलाकृतियों रॉकी 3डी नाम के एक सर्किलेशन मॉडल में डाला. इसके अलावा शोधकर्ताओं ने पृथ्वी की घूमने की गति को भी शामिल किया जो पहले से धीमी घूमने लगी है और आगे और धीमी होगी. इसे अलावा उन्होंने 25 करोड़ साल बाद सूर्य की चमक में होने वाले बदलाव को भी शामिल किया.

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शोधकर्ताओं की गणना के मुताबिक यह बात सामने आई कि उस समय वैश्विक तापमान 4 डिग्री सेल्सियस कम हो जाएगा. अमेशिया में पहाड़ हमेशा बर्फ से ढके रहेंगे. लेकिन सभी मॉडलों ने ऐसा नहीं कहा. लेकिन 10 करोड़ साल बाद अमेशिया में आने वाला हिमयुग बहुत लंबा हो सकता है.
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