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यहां है भगवान राम का ननिहाल, भांजे के रूप में पूजता है पूरा इलाका

News18Hindi
Updated: February 6, 2020, 5:06 PM IST
यहां है भगवान राम का ननिहाल, भांजे के रूप में पूजता है पूरा इलाका
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के चंदखुरी (Chandkhuri) इलाके को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है. (प्रतीकात्मक)

प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक, महाकौशल के राजा भानुमंत की बेटी कौशल्या का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ था. विवाह में भेंट स्वरूप राजा भानुमंत ने कौशल्या को दस हजार गांव भेंट स्वरूप दिया गए थे, जिसमें कौशल्या का जन्म स्थान चंद्रपुरी भी शामिल था.

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  • Last Updated: February 6, 2020, 5:06 PM IST
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उत्तर प्रदेश का अयोध्या जिला (Ayodhya District) पूरी दुनिया में भगवान राम के घर के रूप में मशहूर है. लंबे समय तक चले रामजन्म भूमि केस के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) का निर्माण कर दिया गया है. माना जा रहा है कि इस ट्रस्ट की वजह से राम मंदिर के निर्माण में तेजी आएगी. भगवान राम के घर के रूप में अयोध्या तो मशहूर हो गई लेकिन पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक जो जगह उनकी ननिहाल मानी जाती है, वो चर्चाओं से बाहर ही रही.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के चंदखुरी (Chandkhuri) इलाके को भगवान राम का ननिहाल माना जाता है. राजधानी रायपुर (Raipur) से तकरीबन 17 किलोमीटर दूर स्थित चंदखुरी गांव को भगवान राम की मां कौशल्या का जन्म स्थल माना जाता है.

प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक, महाकौशल के राजा भानुमंत की बेटी कौशल्या का विवाह अयोध्या के राजा दशरथ से हुआ था. विवाह में भेंट स्वरूप राजा भानुमंत ने कौशल्या को दस हजार गांव दिये थे, जिसमें कौशल्या का जन्म स्थान चंद्रपुरी भी शामिल था.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)


यहां है माता कौशल्या की खास मूर्ति
चंदखुरी का ही प्राचीन नाम चंद्रपुरी था. जिस तरह अपनी जन्मभूमि से सभी को लगाव होता है, ठीक उसी तरह माता कौशल्या को भी चंद्रपुर विशेष प्रिय था. सोमवंशी राजाओं द्वारा बनाई गई मूर्ती आज भी चंदखुरी के मंदिर में मौजूद है, जिसमें भगवान राम को गोद में लिए हुए माता कौशल्या की मूर्ति स्थापित है.

भगवान राम के वनवास से आने के बाद उनका राज्याभिषेक किया गया. इसके बाद तीनों माताएं कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी तपस्या के लिए चंदखुरी ही पहुंची और तीनों माताएं तालाब के बीच विराजित हो गईं. तपस्या के बाद माता सुमित्रा और कैकयी दूसरी जगह चली गईं लेकिन माता कौशल्या आज भी यहां विराजमान हैं.

यहीं है वैद्य सुषेण की समाधि
वाल्मिकी रामायण के अनुसार जब लक्ष्मण मेघनाद के बाण से घायल हुए थे तब विभीषण के कहने पर भगवान हनुमान लंका के प्रसिद्ध वैद्य सुषेण को लेकर आए. वैद्य सुषेण ने हनुमान जी को द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी लाने को कहा. जब हनुमान जी पूरा द्रोणगिरी पर्वत उठा लाए तब वैद्य सुषेण ने संजीवनी बूटी से मूर्छित लक्ष्मण का उपचार किया था.

लंका के प्रसिद्ध राज वैद्य सुषेण की समाधि भी माता कौशल्या के मंदिर के पास ही मौजूद है. वहीं यहां के लोगों में भगवान राम के प्रति ऐसी आस्था है कि यहां त्योहारों में रामायण की चौपाई गाकर खुशियां मनाई जाती हैं और बच्चों को भी ये सारी चौपाइयां मुंह जुबानी याद हैं. यहां के लोग भगवान राम को अपना भांजा मानते हैं और भांजे के रूप में ही उनकी पूजा करते हैं.

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First published: February 6, 2020, 4:13 PM IST
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