एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी थे माया-मुलायम, देखिए दोनों के राजनीतिक रिश्ते की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश की राजनीति की दो बेहद अहम केंद्र मायावती और मुलायम सिंह यादव के राजनैतिक रिश्ते की कहानी 25 साल से भी ज्यादा पुरानी है.

News18Hindi
Updated: April 20, 2019, 10:28 PM IST
News18Hindi
Updated: April 20, 2019, 10:28 PM IST
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने एक साथ रैली की. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच बेहद सम्मान और एक साथ आने की ललक दिखी. लेकिन इतिहास गवाह है, कभी यही दोनों नेता एक दूसरे के कट्टर विरोधी हुआ करते थे.

मायावती और मुलायम सिंह यादव के राजनैतिक रिश्तों को बयां करती एक रिपोर्ट न्यूज 18 ने साल 2009 में ही प्रसारित की थी. यह वीडियो स्टोरी आज भी बेहद प्रासंगिक है. हालांकि यह स्टोरी अंग्रेजी मे है. इसलिए वीडियो की हिन्दी ट्रांसस्क्रिप्ट नीचे दी गई है.

मुलायम सिंह अंग्रेजी विरोधी ग्रामीण-शहरी बंटवारे की राजनीति कर रहे हैं.

हम भारतीय भाषाओं का विकास चाहते हैं. हम चाहते हैं कि बांग्लादेश का विकास हो, बांग्ला भाषा का विकास हो. आपकी हिंदी का विकास हो.

समाजवादी पार्टी का इंग्लिश विरोधी घोषणापत्र एक चालाक कदम है.

इंग्लिश बोलने वाला शहरी मध्यवर्ग भले ही इसे पिछड़ापन कह दे लेकिन ग्रामीण भारत में यह सफल है. यह एक ऐसा मुद्दा है जो भारतीय समाजवाद के जनक और मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक गुरू राम मनोहर लोहिया के दौर से ही हर भारतीय समाजवादी के दिल के करीब है.

1954, जिला सैफई, इटावा चम्बल के नालों से मिलकर बना यमुना का फैला हुआ पाट मध्यप्रदेश की सीमा है. सिंचाई के लिए इटावा में हमेशा पानी की कमी रहती है.राम मनोहर लोहिया सिंचाई कर में बढ़ोत्तरी के बाद एक विरोध दल का नेतृत्व कर रहे हैं.

सैफई गांव से आने वाला एक युवा 15 साल का लड़का अपने माता-पिता की इच्छा के खिलाफ सर्दियों में सवेरे-सवेरे ही पानी को लेकर चल रहे विरोध में हिस्सा लेने के लिए घर से निकल जाता है.

लोहिया जी की जीवनशैली का इनपर बहुत प्रभाव पड़ा. 15 साल की उम्र में ही मुलायम सिंह यादव पहली बार गिरफ्तार हुए. यही उनका राजनीति में पहला कदम था और लोहिया का समाजवाद कहे जाने वाले सोच से उनका पहला परिचय भी.

“डॉ राममनोहर लोहिया जिंदाबाद, डॉक्टर को हमारे बच्चे गाटर जानते हैं तो कहते हैं गाटर लोहिया जिंदाबाद”

चार सालों के अंदर मुलायम सिंह यादव, इटावा डिग्री कॉलेज में छात्रसंघ के अध्यक्ष चुन लिए गए.

"कुछ लोग तो यह भी कहते थे कि नहीं! यह आपकी नहीं अखिलेश की फोटो है और एक बार तो नेताजी खुद कन्फ्यूज हो गए उस फोटो को देखकर. उनको यह लगा ही नहीं कि यह फोटो उन्ही की है."- अखिलेश

13 साल बाद मात्र 28 की उम्र में वे संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जसवंतनगर से जीतकर विधानसभा के सबसे छोटे सदस्य बन गए.

पहली बार जब वे 1967 में चुनाव लड़े, 28 साल के यादव समाज के नेता के पास अपनी जसवंतनगर विधानसभा में चुनाव लड़ने और चुनाव प्रचार करने के लिए केवल एक जीप थी.

घर का बना हुए एक ग्लास छाछ पीकर मुलायम सिंह अपनी दूसरी रैली को संबोधित करने के लिए तैयार हैं. उनके समर्थकों के लिए वे हमेशा नेताजी रहे. आखिरी अथॉरिटी, अनन्यतम नेता.

नहीं तो कहीं हाथी जीत गई तो कमल के फूल से साथ कर लेगी तो पांच साल हम लोग पछताएंगे.

प्रधानमंत्री हमारे नेताजी से बोलेंगे आपसे देश का कल्याण हो जाएगा.

जून 1997, जब देवेगौड़ा की सरकार गिरी
सपना जो 1997 में लगभग साकार हो गया, लगभग साकार. एचडी देवेगौड़ा की सरकार तब गिर गई जब नए कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी ने उससे समर्थन वापस ले लिया. संयुक्त मोर्चा पूरी शिद्दत से एक नए प्रधानमंत्री की तलाश में जुटा हुआ था.

और शायद यही टाइम था, आंधी आ रही थी तो वीपी सिंह साहब दोपहर में ही घर से निकल गए थे. हम लोग उनसे बैठकर बात कर रहे थे तो उन्होंने कहा कि पीएम बनने के लिए मेरे नाम का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता और वे दोपहर से ही घर से निकल गए. मुलायम सिंह यादव का नाम सामने आया लेकिन दो दूसरे यादव नेताओं ने अपने हाथ पीछे खींच लिए. लालू और शरद यादव ने दूसरे यादव के सामने दूसरी पंक्ति में खड़े होने से इंकार कर दिया.

सुरजीत को किसी PLA के कार्यक्रम के लिए मास्को जाना था और तब चंद्रबाबू नायडू आए और बोले हालांकि ज्यादातर लोग मुलायम सिंह यादव के पक्ष में हैं लेकिन उनके खिलाफ बहुत जबरदस्त कुछ विरोध भी हैं. अगले दिन आईके गुजराल का नाम समझौते के नाम के तौर पर घोषित किया गया.

ये सच है कि प्रधानमंत्री बनना तय भी हो गया था. आखिरी वक्त में किसने विरोध किया, किसने नहीं बनने दिया, इस बात का कोई मतलब नहीं है. यह दो यादव प्रमुखों के बीच की लड़ाई थी, जो करीब एक दशक तक चलती रही. अब दोनों ने फिर से हाथ मिला लिए हैं ताकि हिंदीपट्टी में पिछड़ा-मुस्लिम वोटबैंक को फिर से जगाया जा सके.

"हम, लालू प्रसाद जी और रामविलास पासवान जी तीनों दल मिलकरके फैसला करेंगे कि कौन प्रधानमंत्री बने. यह किसी राजनेता के करियर में ऐसा मोड़ है जो साबित करता है कि राजनीति में कोई हमेशा के लिए दुश्मन या दोस्त नहीं होता है. केवल हमेशा के लिए अपने हित होते हैं.

मायावती के यूपी की राजनीति में आने से मुलायम सिंह के सामने मुस्लिम और पिछड़ी जातियों के बंट जाने का खतरा सामने आया. 2007 के विधानसभा चुनावों में मायावती की शानदार जीत के बाद मुलायम सिंह यादव की आलोचना होने लगी.

"मुझे श्री मुलायम सिंह यादव जब खुद ही आज उसने अपनी पराजय मान ली है तो मरे हुए आदमी को मुझे क्या मारना है?"

विडम्बना यह है कि 15 साल पहले वे मुलायम सिंह यादव ही थे जिन्होंने कांशीराम और मायावती को सत्ता का स्वाद पहली बार चखने में मदद की थी. अब बीएसपी इसकी सबसे बड़ी विरोधी है.

मायावती इतनी तेजी से सत्ता की सीढ़ियां चढ़ीं कि एकबारगी तो उनके सामने पहलवान बेबस नज़र आने लगे.

02 जून, 1995, सवेरे के 10:30 बजे, होटल ताज, लखनऊ
समाजवादी पार्टी की नेशनल एक्जीक्यूटिव मीटिंग चल रही थी. एक साल में यह साफ हो गया था कि दलित-ओबीसी का यह साथ लखनऊ में सत्ता में था लेकिन उनके कार्यकर्ता जमीन पर लड़ाई कर रहे थे. इस दौरान मायावती ने भी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई. मायावती अपने गेस्ट हाउस में वापस आईं और खुद को सभी बीएसपी विधायकों के साथ एक कमरे में बंद कर लिया.

मनमोहन शर्मा जो उस वक्त एक प्रोफेशनल फोटो जर्नलिस्ट थे, उस वक्त मायावती के साथ वीआईपी गेस्ट हाउस में थे.

"2 जून की सुबह प्रेस कांफ्रेंस की थी इन्होंने. उसी के बाद थोड़ी उत्तेजना और बढ़ गई थी. जिससे यह घटना घटी.

02 जून, 1995, सवेरे 11 बजे, (राज्य अतिथि गृह) स्टेट गेस्ट हाउस, लखनऊ

शाम तक समाजवादी पार्टी के गुस्साए कार्यकर्ताओं ने मायावती और उनके कार्यकर्ताओं को बंधक बनाए रखा. गेस्ट हाउस का पानी और बिजली बंद कर दिए गए. लेकिन मायावती समर्पण न करते हुए मजबूती से डटी रहीं.

"मुलायम सिंह यादव की तरफ से कोई निर्देश इस मामले में नहीं था. हालांकि ये जरूर था कि जब ये सब हो रहा था, उनको इस सारे मामले की एक-एक पल की ख़बर मिल रही थी और इसको रोकने के लिए कोई प्रभावी पहल उनकी तरफ से नहीं की गई."

मायावती को बाद में बचाया गया और 38 साल की उम्र में वे बीजेपी के सहयोग से उत्तरप्रदेश की सबसे युवा मुख्यमंत्री बनीं.

इसके बाद मायावती से मिलकर चुनाव लड़ने को मायावती ने बहुत बड़ी भूल बताया था. लेकिन मुलायम को अगर चुनावों में अच्छा करना है तो उन्हें राज्य के इस हिस्से यानि पूर्वांचल में अच्छा करना होगा.

(ये वीडियो 2009 में बनाया गया था.)
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर

वोट करने के लिए संकल्प लें

बेहतर कल के लिए#AajSawaroApnaKal
  • मैं News18 से ई-मेल पाने के लिए सहमति देता हूं

  • मैं इस साल के चुनाव में मतदान करने का वचन देता हूं, चाहे जो भी हो

    Please check above checkbox.

  • SUBMIT

संकल्प लेने के लिए धन्यवाद

जिम्मेदारी दिखाएं क्योंकि
आपका एक वोट बदलाव ला सकता है

ज्यादा जानकारी के लिए अपना अपना ईमेल चेक करें

डिस्क्लेमरः

HDFC की ओर से जनहित में जारी HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (पूर्व में HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड). CIN: L65110MH2000PLC128245, IRDAI R­­­­eg. No. 101. कंपनी के नाम/दस्तावेज/लोगो में 'HDFC' नाम हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HDFC Ltd) को दर्शाता है और HDFC लाइफ द्वारा HDFC लिमिटेड के साथ एक समझौते के तहत उपयोग किया जाता है.
ARN EU/04/19/13626

News18 चुनाव टूलबार

  • 30
  • 24
  • 60
  • 60
चुनाव टूलबार