औषधीय भांग से बनी दवा हो सकती है कोरोना वायरस का कारगर इलाज!

औषधीय भांग से बनी दवा हो सकती है कोरोना वायरस का कारगर इलाज!
कनाडा के शोधकर्ताओं का दावा हे कि भांग के कुछ खास स्‍ट्रेंस से बनी दवा कोरोना वायरस के इलाज और बचाव में फायदेमंद साबित हो सकती है.

कनाडा (Canada) के शोधकर्ताओं का कहना है कि भांग (Cannabis) से बनाई गई दवा SARS-CoV-2 से लोगों का बचाव कर सकती है. उनका कहना है कि भांग लोगों की कोरोना वायरस से मुकाबला करने की क्षमता में इजाफा कर सकती है.

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कोरोना वायरस की वैक्‍सीन (Coronavirus Vaccine) के साथ एक कारगर इलाज (Treatment) ढूंढने की कवायद लगातार जारी है. वैज्ञानिक पारंपरिक और गैर-पारंपरिक तरीकों से इलाज का हरसंभव तरीका ढूंढ रहे हैं. इस क्रम में पहले से मौजूद कुछ दवाइयों के मरीजों पर परीक्षण किए जा रहे हैं. डॉक्‍टर्स ने इबोला (Ebola) के लिए बनाई गई दवा रेम्‍डेसिविर से कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज किया. वहीं, जर्मनी (Germany) में सबसे पहले कैंसर के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता में वृद्धि करने वाली वैक्‍सीन का कोरोना वायरस के मरीजों पर क्‍लीनिकल ट्रायल किया गया.

यही नहीं, फ्रांस में वैज्ञानिकों ने बताया कि निकोटीन के जरिये कोरोना वायरस का इलाज संभव है. इसके बाद फ्रांस सरकार ने निकोटीन से बने उत्‍पादों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी. अब कनाडा (Canada) के शोधकर्ताओं का कहना है कि भांग (Cannabis) से बनी दवा की मदद से लोगों को कोरोना वायरस से बचाया जा सकता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि भांग भी कोरोना वायरस से बचाव में निकोटीन की ही तरह काम कर सकती है.

भांग के स्‍ट्रेंस कोरोना वायरस को कर सकते हैं कमजोर
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ लेथब्रिज में बायोलॉजिकल साइंसेस के प्रोफेसर डॉ. इगोर कॉवलचक ने बताया कि भांग के कोरोना वायरस पर कारगर होने के नतीजे अर्थराइटिस, कैंसर और दूसरी बीमारियों पर किए जा रहे शोध में सामने आए. उन्‍होंने कहा कि भांग के कुछ स्‍ट्रेंस लंग्‍स में घुसने की कोरोना वायरस की क्षमता को कम कर सकता है.
डॉ. इगोर कॉवलचक और उनके सहयोगियों ने दावा किया है कि उनके द्वारा निकाले गए भांग के स्‍ट्रेंस से कोरोना वायरस को शरीर में घुसने से रोका जा सकता है. (फोटो साभार: डीडब्‍ल्‍यू)




प्री-प्रिंट में लिखे अपने लेख में डॉ. इगोर और उनके सहयोगियों ने दावा किया है कि उनके द्वारा निकाले गए भांग के स्‍ट्रेंस से कोरोना वायरस को शरीर में घुसने से रोका जा सकता है. हालांकि, इस शोध की अभी समीक्षा की जानी बाकी है. लेख में उन्‍होंने लिखा है कि कोरोना वायरस को किसी व्‍यक्ति के शरीर में घुसने के लिए ACE2 नाम के रिसेप्‍टर की जरूरत होती है. ये रिसेप्‍टर लंग्‍स टिश्‍यू, मुंह व नाक की अंदरूनी सतह, किडनी और गैस्‍ट्रोइंटेस्‍टाइनल ट्रैक्‍ट्स में पाया जाता है.

ACE2 को घटा दिया जाए तो शरीर में नहीं घुस पाएगा वायरस 
शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर ACE2 के स्‍तर को शरीर में संतुलित कर दिया जाए तो वायरस के इंसान में घुस पाने की आशंका बहुत कम हो सकती है. आसान शब्‍दों में कहें तो इससे लोगों के संक्रमित होने का जोखिम एकदम घट जाएगा. डॉ. इगोर ने कहा कि अगर टिश्‍यूज में ACE2 पूरी तरह खत्‍म कर दिए जाएं तो वायरस को शरीर में घुसने के लिए कोई रिसेप्‍टर मिलेगा ही नहीं.

वैज्ञानिकों ने स्‍पष्‍ट किया कि औषधीय भांग कई तरह के इलाज में इस्‍तेमाल होती है. ये नशे के लिए इस्‍तेमाल करने वाली भांग नहीं होती है. बगीचों, घरों के पीछे या सड़क के किनारे पाई जाने वाली भांग में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) पाई जाती है. यही दवा में मुख्य एजेंट है. इसके अलावा भांग में एंटी-इंफ्लेमैटरी कैनाबिनॉयड और कैनाबिडायल (CBD) नाम का रसायन भी पाया है. शोधकर्ता इन्‍हीं से बनी कैनाबिस सटाइवा को लेकर शोध कर रहे हैं.

कैनाबिस सटाइवा के 800 नए वैरिएंट बना लिए गए हैं. इनमें सीबीडी की मात्रा काफी ज्‍यादा रखी गई है.


शोधकर्ताओं ने बना लिए कैनाबिस सटाइवा के 800 नए वैरिएंट
शोधकर्ताओं ने कैनाबिस सटाइवा के 800 नए वैरिएंट बना लिए हैं. इनमें सीबीडी की मात्रा काफी ज्‍यादा रखी गई है. उन्‍होंने 13 ऐसे रसायनों की पहचान की है, जो शरीर में ACE2 के स्‍तर को बहुत कम कर सकते हैं. डीडब्‍ल्‍यू की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. इगोर ने कहा कि हमारी टीम ने सीबीडी की बहुत ज्‍यादा मात्रा वाले वैरिएंट बनाए हैं. इससे डॉक्‍टर्स लोगों को दवा की ज्‍यादा मात्रा दे सकते हैं और लोगों को टीएचसी रसायन के कारण नशा भी नहीं होगा.

यूनिवर्सिटी ऑफ ग्‍यूल्‍प से पीएचडी डॉ. डैरिल हडसन और डॉ. ईगोर इनप्‍लांटा बायोटेक्‍नोलॉजी नाम से एक कंपनी भी चलाते हैं. बता दें कि कनाडा की इस कंपनी में भी भांग से मिलने वाले कैनाबिनॉयड्स के दवा में इस्‍तेमाल पर शोधकार्य चल रहा है. डॉ. ईगोर कॉवलचक का कहना है कि भांग से बनी उनकी दवा का इस्‍तेमाल माउथवॉश या गरारे करके भी किया जा सकता है.

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