चंद्रयान-2 मिशन के पीछे हैं दो महिलाएं, जानें कौन हैं रॉकेट वूमन और डेटा क्वीन

इसरो और भारत के स्पेस कार्यक्रमों के इतिहास में ये पहली बार हो रहा है कि इतने महत्वाकांक्षी मिशन के पीछे मुख्य भूमिकाओं में दो महिलाएं हैं. जानें ये दो खास चेहरे कौन हैं और क्यों याद रखने लायक हैं.

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Updated: July 14, 2019, 2:13 PM IST
चंद्रयान-2 मिशन के पीछे हैं दो महिलाएं, जानें कौन हैं रॉकेट वूमन और डेटा क्वीन
इसरो के इतिहास में पहली बार मिशन की प्रमुख दो महिलाएं हैं.
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Updated: July 14, 2019, 2:13 PM IST
आंध्र प्रदेश के श्री​हरिकोटा में स्थित सतीश धवन स्पेस रिसर्च सेंटर से 15 जुलाई की अलसुबह 2:51 बजे भारत का चंद्रयान 2 मिशन लॉंच होगा, जिसे इसरो के वैज्ञानिकों का महत्वाकांक्षी मिशन माना जा रहा है. इसरो और भारत के स्पेस कार्यक्रमों के इतिहास में ये पहली बार हो रहा है कि इतने महत्वाकांक्षी मिशन के पीछे मुख्य भूमिकाओं में दो महिलाएं हैं. मुथैया वनिता प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर तो रितु कारिधाल मिशन डायरेक्टर के तौर पर इस मिशन की रीढ़ रही हैं. आइए जानें ये दो चेहरे कौन हैं और क्यों याद रखने लायक हैं.

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इन दोनों महिला वैज्ञानिकों की प्रतिभा ज़ाहिर करते हुए पिछले दिनों इसरो के चेयरमैन के सिवान ने प्रेस से कहा था कि चंद्रयान 2 मिशन की टीम में 30 फीसदी महिलाएं हैं. भारत के दूसरे महत्वपूर्ण चंद्रमा अभियान का नेतृत्व दो महिलाओं ने किया है और दुनिया को ये बात बताते हुए इसरो गर्व महसूस करता है. ये दोनों ही महिलाएं यानी वनिता और रितु पिछले 20 सालों से ज़्यादा समय से इसरो के साथ जुड़ी हैं और सेवाएं दे रही हैं.

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'बेस्ट साइंटिस्ट' मुथैया वनिता हैं डेटा क्वीन
चंद्रयान 2 मिशन की प्रोजेक्ट डायरेक्टर वनिता को 2006 में सर्वश्रेष्ठ महिला वैज्ञानिक के अवॉर्ड से नवाज़ा जा चुका है. इसरो के इतिहास में किसी प्रोजेक्ट की प्रमुख बनने वाली पहली महिला का गौरव वनिता को इस मिशन की प्रमुख होने के साथ हासिल हुआ है. इससे पहले वनिता कार्टोसेट-1, ओशियनसेट-2 और मेघ ट्रॉपिक्स उपग्रहों के मिशन से जुड़े डेटा सिस्टम के लिए प्रोजेक्ट की सह निदेशक रह चुकी हैं.

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वनिता को डेटा क्वीन माना जाता है क्योंकि यह उनकी विशिष्ट प्रतिभा का क्षेत्र है. चंद्रयान 1 मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रह चुके डॉ. एम अन्नादुरई ने ही वनिता को चंद्रयान 2 मिशन की ज़िम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित किया था. न्यूज़18 से खास बातचीत में अन्नादुरई ने कहा 'वनिता डेटा हैंडल करने में माहिर हैं. डिजिटल/हार्डवेयर क्षेत्र में वनिता बेहद कुशल महसूस करती थीं लेकिन इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर के तौर पर काम करने में उन्हें हिचक थी'.

न्यूज़18 को अन्नादुरई ने ये भी बताया कि इस भूमिका को निभाने के लिए जी तोड़ मेहनत करना होती है, क्योंकि आप रोज़ 18 घंटे तक काम करते हैं और निजी जीवन एक तरह से कुर्बान करते हैं. बदले में आपको पूरे देश में पहचान मिलती है और बड़ी ज़िम्मेदारियां अपने आप में आपको एक पहचान दिलाती हैं.

'मंगल' के बाद 'चांद' तक रितु हैं 'रॉकेट वूमन'
चंद्रयान 2 मिशन की डायरेक्टर रहने से पहले रितु 2013 में भारत के महत्वाकांक्षी मंगल मिशन में बतौर वैज्ञानिक काम कर चुकी थीं. यह मिशन बेहद कामयाब रहा था और भारत चौथा देश बना था, जिसने मंगल तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की थी. उस वक्त रितु ने मंगल मिशन में उपग्रह के ऑपरेशन्स को लेकर भूमिका निभाई थी. रितु के कौशल को पहचाना गया और इस बार उन्हें बड़ी ज़िम्मेदारी दी गई.

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रितु बचपन से ही अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट थीं और उन्हें हमेशा से अंतरिक्ष में रुचि थी. वह बचपन की पढ़ाई के दौरान नासा और इसरो की तमाम खबरों की कटिंग अपने पास रखा करती थीं. लखनऊ से भौतिकी में मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद रितु ने बेंगलूरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान से एमटेक किया. वो अपने निजी जीवन में सामान्य व पारंपरिक भारतीय महिला की छवि रखती हैं.

अपने छोटे भाई बहनों और अपने दो बच्चों की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से उठाने वाली रितु निजी जीवन में जितनी सादगी भरी रही हैं, कामकाजी जीवन में उतनी ही प्रोफेशनल और कुशलता से उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारियां निभाई हैं. अंतरिक्ष विज्ञान में उनके कौशल के कारण ही उन्हें इसरो और अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में भारत की 'रॉकेट वूमन' के नाम से जाना जाता है. 1997 में रितु ने इसरो के साथ अपना सफर शुरू किया था और उन्हें पूर्व राष्ट्रपति रहे मशहूर वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों सम्मानित भी किया जा चुका है.

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