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    विदेश में दो भारतीय युवतियों की मुकेश अंबानी से मुलाकात कैसे बनी यादगार, शिष्टता की हुईं कायल

    जब लीचेस्टीन के एक कैफे में दो भारतीय लड़कियां मुकेश अंबानी को भी वहां देखकर हैरान रह गईं. फिर उनके साथ जिस तरह फोटो खिंचवाई, वो उनकी जिंदगी का सबसे यादगार क्षण बन गया.
    जब लीचेस्टीन के एक कैफे में दो भारतीय लड़कियां मुकेश अंबानी को भी वहां देखकर हैरान रह गईं. फिर उनके साथ जिस तरह फोटो खिंचवाई, वो उनकी जिंदगी का सबसे यादगार क्षण बन गया.

    ज्यूरिख (Zurich) से लीचेस्टीन (Lichtenstein) घूमने गईं दो भारतीय प्रोफेशनल लड़कियों की वहां एक कैफे हाउस में अचानक मुकेश अंबानी से मुलाकात हो गई. जो एक आम आदमी की तरह वहां अपनी बेटी ईशा के साथ कॉफी पीने गए थे. इस मुलाकात क्यों दोनों लड़कियों के लिए यादगार बन गई. पेश है ये संस्मरण जो मीडियम डॉट कॉम से साभार है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 30, 2020, 3:15 PM IST
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    मनुश्री विजयवर्गीय
    जीवन में कई बार कुछ ऐसे क्षण आते हैं कि हमेशा के लिए खास और यादगार बन जाते हैं. क्योंकि वो वाकई असाधारण होते हैं. ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ जब मैं लीचेस्टीन के एक कैफे में अचानक मुकेश अंबानी और उनकी बेटी ईशा से मिली. जीवन में चूंकि ऐसे मौके फिर नहीं मिलते, लिहाजा तय किया कि इसके बारे में जरूर लिखूं.

    सुंदर पिचाई ने बेहद व्यस्त दिनों के बीच हमें उस शुक्रवार की एक अतिरिक्त छुट्टी दे दी. इससे हमें सप्ताहांत के दो दिनों को लेकर तीन ऐसे दिन मिल गए, जब हम कहीं जाकर सुखद समय गुजार सकते थे. कोई आफिस का काम नहीं. तीन दिन पूरी फुरसत. मैने बाहर घूमने जाने का तय किया. कुछ जगहें तलाशीं. इस बीच मधु का मैसेज आया, क्यों ना हम लीचेस्टीन घूमने चलें.  ज्यादा दूर भी नहीं है. हम 24 घंटे में इस खूबसूरत देश को पूरा घूम सकते हैं.

    लीचेस्टीन दुनिया के सबसे छोटे देशों में है. 25 किलोमीटर के दायरे में सबकुछ. इसी में इसकी 38,000 की आबादी रहती है. ये ज्यूरिख से दो घंटे की ट्रेन यात्रा दूरी पर है. हमने वहीं जाने का फैसला किया. सुबह 09.00 बजे निकलना था. रात में सारी तैयारी हो गई लेकिन सुबह जल्दी नहीं उठ सके. लिहाजा कुछ देर से निकले. करीब 12 बजे हम खूबसूरत लीचेस्टीन में थे. पासपोर्ट पर स्टैंप लगवाने के बाद अब हमें वहां का नजारा लेना था.
    लीचेस्टीन सिटी सेंटर वादुज़ बस स्टाप से करीब 500 मीटर दूर है. हम दोनों ने तय किया कि कुछ फेमस स्पॉट्स देख लेते हैं. उस दिन सूरज तेज चमक रहा था. 20 किलोमीटर दूर और ऊंचाई पर बने लीचेस्टीन किले को देखने के बाद हम थककर निढाल पड़ चुके थे.



    the lichtenstein castle
    लीचेस्टीन का खूबसूरत किला


    लीचेस्टीन सिटी सेंटर यूरोपीयन देशों के स्क्वेयर की तरह है लेकिन छोटा. वहां केवल एक पिज्जा और एक घड़ी की दुकान के अलावा एक बार भी है.

    हमारे थके कदम अमेरिकी कैफे की ओर बढ़े. पता लगा था कि यहां कॉफी बहुत अच्छी मिलती है. यहीं पर हमारे जीवन का वो बड़ा लम्हा भी आने वाला था, जिसे हम कभी नहीं भूल पाएंगे.

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    हमने कैफे में सामने मुकेश अंबानी और ईशा को देखा 
    हम वहां कुछ घंटे रहे, तब तक बाहर ज्यादा ठंडा होने लगा था. कैफे में हमारे अलावा कुछ लोकल लोग ही थे. जैसे ही शाम के 04 बजने को हुए, हमने कैफे से निकलने का फैसला किया, जैसे ही बाहर जाने के लिए दरवाजा खोला, तभी अपने सामने दुनिया के छठे सबसे धनी शख्स (एशिया में नंबर वन धनी) मुकेश अंबानी को देखा. उनके साथ बेटी ईशा अंबानी भी थीं. हम तो हैरान रह गए. विश्वास ही नहीं हुआ कि हमारे सामने वाकई अंबानी हैं या कोई सपना देख रहे हैं.

    मुकेश और ईशा से हैलो हुई 
    ईशा कैजुअल ड्रैस में थीं. मुकेश सूट में थे. हम इंट्रेंस डोर से सटकर खड़े हो गए. हम और मधु ही वहां ऐसे थे, जो उन्हें एक सांस में पहचान गए. ईशा सीधे हमारी ओर आईं. मैं वाकई चकित थी. फिर मुकेश आगे बढ़े. उन्होंने हमारी ओर देखा. आपस में हैलो का आदान-प्रदान हुआ.

    लीचेस्टीन का वो कॉफी हाउस, जहां दोनों भारतीय प्रोफेशनल लड़कियां अंबानी परिवार से अचानक मिलीं. वो भी वहां साधारण लोगों की तरह ही गए थे.


    हम ये सोच ही रहे थे कि क्या करें, क्या उन्हें साथ में फोटो खिंचाने के लिए कहें. फिर लगा ये अनुरोध तो जरूर करना चाहिए. ऐसा मौका फिर जिंदगी में कहां मिलने वाला. हम उनके पास पहुंचे. एक फोटो साथ लेने के लिए रिक्वेस्ट की. मुझको मधु का तो नहीं मालूम लेकिन मैं जरूर पूरे समय कांप रही थी.

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    वो अपनी कॉफी का ऑर्डर दे रहे थे
    इस छोटे से कैफे को एक अकेला शख्स मैनेज कर रहा था, जो बहुत विनम्र और मददगार था. ईशा और मुकेश जब अपनी कॉफी का आर्डर दे रहे थे, तभी मैने महसूस किया कि हमारे पास ज्यादा समय नहीं है, बस हमें जो कुछ कहना है इसी समय कह देना चाहिए.

    तब मुकेश ने बेटी से पूछा
    कॉफी लेने के दौरान पिता-बेटी के बीच आपस में बातचीत चल रही थी. ये भी लगा कि उन्हें बीच में डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए. ईशा ने दो कॉफी का पैसा देने के लिए 20 स्विस फ्रेंक का नोट निकाला. बिल कुछ कम का था. इसमें कुछ सिक्के देने थे. तब मुकेश ने बेटी से पूछा कि वो अपने कार्ड का इस्तेमाल कैसे करें. मैं गवाह हूं कि कैसे एक ताकतवर असाधारण शख्स भी एक कामन मैन की तरह कैसे ट्रांजिक्शन करता है.
    हम उन्हें पहले ही हैलो कह चुके थे, इसलिए लगा कि अब बस सीधे बोल देते हैं कि प्लीज हम आपके साथ एक फोटों खिंचाना चाहते हैं.

    तब ईशा ने खुद कैमरा लेकर हमारी तस्वीर खींची 
    मैने कैमरा मधु को दिया ताकि हम दोनों बारी-बारी से एक दूसरे की तस्वीर ले सकें. तभी ईशा ने खुद पिक्चर खींचने की बात कहते हुए हमसे कैमरा ले लिया ताकि हम दोनों ही एक साथ मुकेश अंबानी जी के साथ फोटो खिंचा सकें.

    केवल यही नहीं मुकेश और ईशा ने कॉफी के कप को टेबल पर रखते हुए कहा, "कॉफी को पिक्चर से दूर रखते हैं." उन्हें अंदाज था कि पिक्चर कैसी होनी चाहिए.

    मैने उनसे पूछा कि क्या वो बिजनेस के लिए वहां हैं. तो उन्होंने कहा कि वो अगली बड़ी डील के लिए जा रहे हैं.

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    मुकेश ने हमसे ही पूछ लिया-क्या हम वहीं रहते हैं
    उल्टे उन्होंने हमसे पूछ लिया, क्या हम वहीं रहते हैं और कैसे हम वहां रह रहे हैं. मधु ने तपाक से जवाब दिया. मैं बोल नहीं पा रही थी. मानो शब्द कहीं खो गए हों. मैं बस इतना ही कह सकी, "हम आपसे मिलकर बहुत सम्मानित महसूस कर रहे हैं, धन्यवाद." मेरे ये कहने पर उनके चेहरों पर मुस्कुराहट आई.

    बाहर नीता अंबानी उनका इंतजार कर रही थीं
    उसके बाद वो बाहर निकल गए. नीता अंबानी  गुलाबी फूलों के बॉर्डर वाले सफेद कुर्ते और लैगिंग में बाहर खड़ी थीं. उनके साथ मास्क पहने हुए कोई लोकल शख्स था. हो सकता है कि वो ड्राइवर रहा हो.

    तो ये थी यादगार मुलाकात
    तो ये थी मुलाकात की बात. हालांकि मधु और मेरे लिए अगले तीन घंटे उन तीन मिनटों के बारे में बार-बार सोचते हुए गुजरे. ये भी सोचते हुए कि हम क्या कह सकते थे, क्या कर सकते थे.

    इस छोटी सी मुलाकात में हमने कुछ सीखा भी. भले ही वो अरबपति हों लेकिन पिता-पुत्री के रिश्ते कितने सहज-सरल लग रहे थे. वो खुद किस तरह यूं ही कॉफी पीने चले जाते हैं. बगैर कोई होहल्ला किए. अपनी कॉफी लेने के लिए वो किसी की मदद नहीं लेते. वो 20 फ्रेंक का नोट भी साथ लेकर चलते हैं.

    उनकी जो बात दिल को छू गई
    सबसे खास बात, जो मेरे दिल को छू गई, जब उन्होंने हमारे बारे में पूछा कि हम कैसे हैं और क्या हम वहीं रहते हैं. मेरी मां कहती हैं जो व्यक्ति जितना बड़ा होता है वो उतना ही विनम्र होता है. मुकेश अंबानी मुझको ऐसे ही लगे. जिस तरह उन्होंने कॉफी का मग किनारे टेबल पर रखा कि हमारी फोटो उनके साथ बेहतर आ सके, वो भी उनका बड़ा दिल और बेहतर भावना ही कही जाएगी. ऐसे खास लम्हे आपको जिंदगी में हमेशा याद रह जाते हैं. (मीडियम.कॉम से मंजुश्री का संस्मरण साभार)
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