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कोरोना वायरस से पुरुषों को ज्यादा खतरा: शोध

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Updated: February 13, 2020, 9:36 AM IST
कोरोना वायरस से पुरुषों को ज्यादा खतरा: शोध
कोरोना वायरस से पुरुषों को ज्यादा खतरा

वैज्ञानिकों ने चीन के वुहान विश्वविद्यालय के हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का परीक्षण किया.

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  • Last Updated: February 13, 2020, 9:36 AM IST
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चीन में कोरोना वायरस (coronavirus) से अब तक 1, 113 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,015 नए मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही जापान में एक शिप पर फंसे 138 भारतीय लोगों में से 2 कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. केवल चीन ही नहीं बल्कि कोरोना वायरस से पूरे विश्व में डर है. वैज्ञानिक भी अभी कोरोना वायरस पर रिसर्च कर ही रहे हैं. वैज्ञानिकों ने कोरोना को लेकर वुहान में टेस्ट किए हैं. हाल में हुए दो शोध में यह बात समाने आई है कि कोरोना वायरस पुरुषों के लिए ज्यादा खतरनाक है बजाए कि महिलाओं के...

वैज्ञानिकों ने चीन के वुहान विश्वविद्यालय के हॉस्पिटल में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का परीक्षण किया. इस अध्ययन में 52 फीसदी पुरुष कोरोना से संक्रमित पाए गए. कोरोना से संक्रमित हॉस्पिटल में भारती मरीजों के आंकड़ों पर ध्यान देने से पता चला कि कुल एडमिट मरीजों में से 68 फीसदी पुरुष मरीज थे.

इस वायरस के फेफड़े पर हमला करने के बाद मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है
इस वायरस के फेफड़े पर हमला करने के बाद मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है


महिलाओं की इम्युनिटी ज्यादा:

विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की इम्युनिटी पॉवर पुरुषों की तुलना में ज्यादा होती है. इससे पहले भी जब चीन में ही सार्स वायरस का कहर फैला था तब भी 20 से 54 साल की महिलाएं ही सार्स की जद में आई थीं. वहीं 55 साल तक के पुरुषों में सरस के लक्षण सबसे ज्यादा पाए गए थे.

कोरोना वायरस के लक्षण:
कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में शुरुआत में सिरदर्द, नाक बहना, खांसी, गले में ख़राश, बुखार, शरीर में कमजोरी लगना, छींक आना, अस्थमा का बिगड़ना, थकान महसूस करना शामिल है.
कोरोना वायरस फैमिली का ये सदस्य सार्स की तरह खासा घातक है. सार्स ने वर्ष 2002 में पूरी दुनिया में खासी तबाही मचाई थी
कोरोना वायरस फैमिली का ये सदस्य सार्स की तरह खासा घातक है. सार्स ने वर्ष 2002 में पूरी दुनिया में खासी तबाही मचाई थी


जब कोरोना वायरस ज्याफा फ़ैल जाता है तब मरीज को निमोनिया जैसी शिकायत होने लगती है. कोरोना वायरस फेफड़ों पर हमला करता है और इसे कमजोर कर देता है. इसके बाद मरीज का शरीर इतना कमजोर हो जाता है कि उसका बचना मुश्किल हो जाता है.

बता दें कि शुरुआत में वैज्ञानिक ऐसा मानकर चल रहे थे कि कोरोना वायरस संक्रामक नहीं है. लेकिन कुछ समय पहले ही यह बात सामने आई है कि कि यह वायरस 1.4 से लेकर 2.5 लोगों को संक्रमित कर सकता है.

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First published: February 13, 2020, 9:10 AM IST
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