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mercury fragments scattered buried on earth billions of years ago viks

क्या अरबों साल पहले पृथ्वी पर गिरे थे बुध ग्रह के टुकड़े

बुध ग्रह (Mercury) के बारे में इस तरह की अवधारणा पहली बार दी गई है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

बुध ग्रह (Mercury) के बारे में इस तरह की अवधारणा पहली बार दी गई है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

बुध ग्रह (Mercury) पर हुए एक अध्ययन में कुछ खगोलविदों ने दावा किया है कि एक समय बुध ग्रह बहुत ही विशाल ग्रह था लेकिन उसपर हुए टकरावों (Impacts) और सौर विकरण की वजह से उसकी बाहर परतों के लागातार टुकड़े होते रहे जिनमें से कुछ तो पृथ्वी (Earth) पर भी पाए जा सकते हैं. लेकिन कुछ खगोलविदोंने इन दावों को खारिज भी किया है.

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    पृथ्वी पर जीवन और उसके समर्थन करने वाले वातावरण का विकास कैसे हुआ. इन सवालों के जवाब की खोज में हमारे खगोल वैज्ञानिक सौरमंडल का इतिहास (Solar System History) जानने का प्रयास कर रहे हैं. वे यह भी जानने की कोशिश भी कर रहे हैं सौरमंडल के साथ पृथ्वी और उसके अन्य ग्रहों का निर्माण कैसे हुआ और क्यों अन्य ग्रह पृथ्वी की तरह आवासीय नहीं बन सके. इनमें बुध ग्रह (Mercury) के बारे में एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने नया दावा किया है कि अरबों साल पहले बुध ग्रह काफी बड़ा ग्रह था, लेकिन उसके बहुत से टुकड़े होते गए जिनमें से कुछ पृथ्वी (Earth) तक भी पहुंच गए होंगे.

    सूर्य के पास होने का गुनाह
    बुध ग्रह सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे पास का ग्रह है. यहां जीवन के अनुकूल हालात बिलकुल भी नहीं हैं.  वैज्ञानिकों का मानना है कि बुध की इस हालात की वजह उसका सूर्य के बहुत पास होना ही है.  लूनार एंड प्लैनेटरी साइंस कॉन्फ्रेंस में पेश की गई अवधारणा में कुछ खगोलविदों ने दावा किया है कि एक समय बुध ग्रह बहुत बड़ा ग्रह था.

    विशाल से छोटा होते जाना
    इस अवधारणा में शोधकर्ताओं ने दावा किया कि अरबों साल पहले विशाल बुध ग्रह पर होते रहे लगातार टकरावों और सौर विकिरण के कारण उसकी बाहरी परतें टूट कर अलग होती रहीं और कुछ टकराव इतने शक्तिशाली थे कि उसकी वजह से बुध के टुकड़े बाहरी अंतरिक्ष में चले और कुछ पृथ्वी तक भी पहुंच गए.

    किसके अध्ययन के आधार पर
    फ्रांस की लौरीन यूनिवर्सिटी की ग्रह वैज्ञानिक कैमिली कार्टियर, जिन्होंने इस सिद्धांत को प्रस्तुत किया था, और उनके सहयोगियों ने इस मुद्दे का मजबूती से समर्थन किया कि अरबों साल पहले बुध ग्रह एक सुपर मर्क्यूरी यानि अतिविशाल ग्रह के रूप में अस्तित्व में था. अपने शोध कार्टियर ने दुनिया में पाए और संग्रहालयों में रखे गए उल्कापिंडों के 70 हजार टुकड़ों का अध्ययन किया.

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    अध्ययन में बताया गया है कि सूर्य के पास होने के कारण बुध ग्रह (Mercury) का आकार आधा रह गया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    दोगुना बड़ा बुध ग्रह
    कोर्टियर ने बताया कि इनमें से अधिकांश टुकड़े चंद्रमा से आए थे या फिर मंगल ग्रह या फिर क्षुद्रग्रहों से आए थे. लेकिन इनमें से कुछ सुपर मर्क्यूरी या प्रोटो मर्क्यूरी के भी टुकड़े हो सकते हैं जिसका आकार वर्तमान बुध ग्रह के आकार से दोगुना रहा होगा. नए शोधपत्र में विशेषज्ञों ने खास ऑब्राइट्स श्रेणी की उल्कापिंडों की विशेषताओं का जिक्र किया है.

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    क्या हैं ऑब्राइट पत्थर
    ऑब्राइट वे दुर्लभ अंतरिक्ष चट्टानें हैं जिनका नाम फ्रांस के गांव ऑब्रेस के नाम पर रखा गया है. इन पीले रंग पत्थरों में कम मात्रा में धातुएं होती हैं. अभी तक पृथ्वी पर 80 ऑब्राइट ही मिल सके हैं. अब चूंकी वैज्ञानिकों के पास बुध ग्रह के नमूने नहीं हैं इसलिए इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि ऑब्राइट वास्तव में इसी ग्रह के टुकड़े हैं.

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    वैज्ञानिकों ने खास (Aubrites) उल्कापिंड का जिक्र किया है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    पृथ्वी की ओर कैसे
    कार्टियर का कहना है कि इन टुकड़ों के अध्ययन से पता चला है कि उनकी विशेषताएं वहीं हैं जो शुरुआती बुध की हो सकती हैं. कार्टियर ने इस  बात की भी व्याख्या की है कि ये टुकड़े पृथ्वी तक कैसे पहुंचे होंगे. उनके मुताबिक बुध का एक बड़े और ग्रह के एक तिहाई भार के पिंड से टकराव हुआ होगा जिससे उसके टुकड़े अंतरिक्ष में बिखर कर क्षुद्रग्रह की पट्टी में जाकर ई प्रकार के क्षुद्रग्रह बन गए होंगे.

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    इसके बाद इन क्षुद्रग्रहों दूसरे टकरावों और सौरपवनों की वजह से भी बदलाव होंगे और फिर अन्य क्षुद्रग्रहों की तरह ही सौरमंडल के आंतरिक हिस्से में पहुंच कर पृथ्वी तक पहुंचे होंगे. शोधकर्ताओं का कहना है कि ऑब्राइट प्रोटो मर्क्यूरी के मैंटल के उथले हिस्से को टुकड़े होंगे. इससे बुध ग्रह की उत्पत्ति के रहस्य भी सुलझ सकते हैं. लेकिन कई विशेषज्ञ इस अवधारणा पर आपत्ति भी दर्ज कर रहे हैं.

    Tags: Earth, Research, Science, Solar system, Space

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