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समुद्र के नीचे से तेजी से आते हैं मीथेन के बुलबुले, शोध ने खोला इनका रहस्य

बहुत से इलाकों में समुद्र के नीचे के तल (Sea bed) में से मीथेन (Methane) गैस के बुलबुले (Bubbles) निकल रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
बहुत से इलाकों में समुद्र के नीचे के तल (Sea bed) में से मीथेन (Methane) गैस के बुलबुले (Bubbles) निकल रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

गहरे समुद्र (Deep Sea) में से मीथेन (Methane) जमे हुए पानी में बुलबुलों के रूप में बाहर आने का रहस्य का खुलासा इस शोध से हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 1:27 PM IST
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मीथेन (Methane) प्राकृतिक गैस (Natural Gas) का प्रमुख तत्व है और वह सभी उपलब्ध ईधनों (Fuels) में पर्यवरण (Environment) को नुकसान न पहुंचाने वाले ईंधन माना जाता है, लेकिन जब यह वायुमंडल में होती है तो यह गैस एक प्रदूषक (Pollutant) हो जाती है जो कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) से भी ज्यादा हानिकारक होती है. कुछ आंकलनों से पता चला है कि समुद्र तली (Sea bed) की मीथेन जितनी जमे हुए रूप में है वह दुनिया के सभी कोयला, तेल और गैस के वैश्विक भंडारों से ज्यादा है. लेकिन यह मीथेन समुद्र की तली में से निकल कर कैसे बाहर निकल रही है यह अभी तक रहस्य ही था. ताजा शोध ने इसका सही कारण पता लगाने में सफलता पाई है.

मीथेन के बुलबुले
अभी तक इस बारे में बहुत ही कम समझा जा सका था कि गहरे समुद्र में से मीथेन बाहर कैसे निकलती है. दुनिया भर में अवलोकित स्थानों पर मीथेन के बुलबले निकलते देखे गए हैं. लेकिन वैज्ञानिकों के लिए हैरानी की बात यह है कि अत्यधिक दबाव और कम तापमान वाली जगहों पर भी मीथेन निकलने में कामयाब कैसे हो जाती है, जबकि ऐसी जगहों पर बर्फ की परत को उसे बाहर निकलने से रोकने का काम करना चाहिए.

कैसे और क्यों का सवाल
बर्केले में कैलीफोर्निय यूनिवर्सिटी की जियाओजिंग (रूबी) फू, एमआईटी के रूबेन हुआनेस और स्विट्जरलैंड, स्पेन, न्यू मैक्सिको एवं कैलिफोर्निया के पांच अन्य शोधकर्ताओं के  PNAS जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में इस बात की व्याख्या हुई है कि कैसे और क्यों मीथेन समुद्री की तली से बाहर निलकती रहती है. शोधकर्ताओं ने गहरे समुद्र के अवलोकन, लैबोरेटरी प्रयोग और कम्प्यूटर मॉडलिंग का उपयोग कर शोधकर्ताओं ने उस प्रक्रिया का पता लगा लिया है जो यह बताती है गैस कैसे पानी और मीथेन के जमे हुए बर्फीले मिश्रण को तोड़कर बाहर निकलती है.



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कई जगहों पर महासागरों (Oceans) के तल पर मीथेन (Methane) बुलबुले (Bubbles) निकलते दिखाई देते हैं. . (प्रतीकात्मक तस्वीर)


एक पूरा सिलसिला बन जाता है
हैरानी की बात यह है कि जमे हुए मीथेन और पानी जिसे हाइड्रेट कहते हैं, न केवल महासागर से बाहर निकल पाती है, बल्कि वह बाद में दूसरी मीथेन निकलने की रास्ता भी बनाकर जाती है. पहले फू ने मैक्सिको की खाड़ी में NOAA शोध जहाज से लिए गए फोटो और वीडियो देखे जिससे  मीथेन के बुलबुले समुद्र की तली से बाहर निकल रहे थे.

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हो सकती है सामान्य सी घटना
यह साफ था बुलबुले खुद ही जमी हुई पर्पटी से बनते हैं और ऊपर समुद्र की सतह पर आ जाते हैं. इसके बाद फू ने सोनार का उपयोग कर यह पता लगाया कि वर्जीनिया के तट पर भी एक रिचर्ज जहाज से ऐसे ही बुलबुले देखने को मिल रहे हैं. फू ने बताया, ‘हमने इन बुलबुलों को देख कर पाया कि ये बहुत ही सामान्य सी परिघटना हो सकती है.

लेकिन समुद्र तली पर वास्तव में ऐसा क्या हो रहा था जिससे ये बुलबुले निकल रहे थे यह अभी तक पता नहीं लगा था. लैब में किए गए बहुत सारे प्रयोगों और सिम्यूलेशन के बाद यह प्रक्रिया धीरेधीरे जाहिर हो गई.

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मीथेन (Methane) कार्बनडाइ ऑक्साइड (CO2) से ज्यादा खतरनाक प्रदूषण (Pollution) वाली गैस मानी जाती है.


कैसे होता है ये सब
भूकंपीय अध्ययनों से पता चला कि ये बुलबुले वास्तव में चीमनी जैसी लंबे पाइप की तरह हैं जिनसे गैस निकलती लग रही है. फू ने बताया कि बहुत सारे गैस हाइड्रेट और मीथेन गैस की मौजूदगी एक साथ हो सकती है. लैब में हालातों को सिम्यूलेट करने के लिए शोधकर्ताओं ने दो ग्लास की प्लेटों के बीच उच्च दबाव से गैस के बुलबलों को रखा. माइक्रोफ्लयूडिक प्रयोगों से उन्हें पता चला कि जब गैसे का बुलबुला फैलता है तो उससे हाइड्रेट के खोल में दरार पड़ने के लिए पर्याप्त दबाव पड़ता है. यह बिलकुल अंडे के अंदर से उसे तोड़ने का प्रयास होना जैसे है. लैब में यह प्रक्रिया छोटे पैमाने पर अवलोकित की गई. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह समुद्र में यह बड़े पैमाने पर होती होगी.

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मीथेन पहली बार हाइड्रेट में दरार  बनाती है और उसके बाद उसी दरार से मीथेन के बुलबले लगातार निकलने लगते हैं. वहीं कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस यह प्राकृतिक घटना ऊर्जा उप्तादन में काम आ सकती है.
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