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तब माधुरी नहीं विदेशी बाला मारिया पर जमकर 'फिदा' थे MF हुसैन!

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Updated: September 17, 2019, 11:42 AM IST
तब माधुरी नहीं विदेशी बाला मारिया पर जमकर 'फिदा' थे MF हुसैन!
एमएफ हुसैन की फाइल फोटो

तब एमएफ हुसैन अपनी बीवी को छोड़ने की हद तक तैयार हो चुके थे. उन्होंने अपने परिवार को बताया कि वो मारिया से शादी करने जा रहे हैं. आखिरी मौके पर मारिया का मन क्यों बदल गया

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वह 90 साल के थे और उनकी प्रेमिका अब 70 की हो चुकी थी. 45 साल पहले वह उससे तब मिले थे जब वो बमुश्किल 23-24 साल की थी और वो खुद 40 से ऊपर के. अब वो उससे मिलने के लिए ऑस्ट्रेलिया गए थे. दोनों ने एक दूसरे को देखा. फिर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- अरे तुम्हारे बाल भी मेरे बालों की तरह ही सफेद हो गए हैं. अगले तीन दिन दोनों ने साथ बिताए हाथों में हाथ डाले. आंखों के निधि वन में खोते हुए.

एक मशहूर प्रेम कहानी का ये उत्तर-प्रसंग साल 2005 का है. हालांकि वह इस प्रसंग को हमेशा ही जीते रहे. बात उस शख्स की हो रही है जो भारत का सबसे मशहूर पेंटर था, जो 95 सालों तक जिया. सुंदर महिलाओं के आसपास रहना उसकी कमजोरियों में शुमार थे. झक सफेद दाढी और रेशमी सफेद बालों वाले मकबूल फिदा हुसैन (M.F. Husain) की प्रेम कहानी है ये.

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मकबूल 50 के दशक तक फेमस हो चुके थे. मुफलिसी और संघर्ष के उनके दिन लगभग खत्म हो गए थे. वह देश ही नहीं विदेशों में भी पहचाने जाने लगे थे. यूरोप में जब उनकी पेंटिंग्स खासी सराही गईं. 1956 में वो चेकोस्लोवाकिया में थे. प्राग में उनकी 34 पेंटिग्स की प्रदर्शनी लगी थी. एक शाम जब गैलरी करीब-करीब खाली थी. उसके बंद होने का समय हो रहा था. तभी वहां एक खूबसूरत युवती आई. वो बड़े ध्यान से उनकी पेंटिंग्स को देख रही थी. मंत्रमुग्ध सी. मकबूल ने कुछ देर उसे देखा. फिर उसके पास पहुंचे. उससे पूछा क्या ये उसे पसंद आई. तो उसने मुस्कराते हए सिर हिलाया और जवाब दिया-ये वाकई गजब की हैं. हुसैन ने तुरंत अपनी सारी पेंटिंग्स उसे उपहार में दे दीं. वह युवती-हक्की बक्की रह गई. अगले दिन उसने फिर उसी समय आने का वादा किया.

वह मारिया जोराकोवा थी. दिलकश मारिया. ऊर्जा, उत्साह और उमंग से भरपूर. अगले शाम फिर आई. मकबूल सूट में थे. टाई के साथ. दाढ़ी साफ करा दी. मारिया आई. उन्हें आलिंगन में लिया. गालों में चुंबन. फिर उन्हें देखकर हंसने लगी. उसने कहा, "तुम ऐसा करके किसी का भी दिल जीत सकते हो लेकिन मैं तो तुम्हें दाढ़ी के साथ ही पसंद करती हूं."

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आठ साल चला ये रिश्ता
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इसके बाद मारिया और हुसैन छह सालों तक चेकोस्लोवाकिया में मिलते रहे. हुसैन ने अपने भारत लौटने का कार्यक्रम टाल दिया. वह लंबे समय तक वहीं रुक गए. मारिया उनकी संगिनी बन गई. दोनों प्राग में एक खुशुनमा जोड़ी के रूप में हाथों में हाथ डाले घूमते रहे. उनकी कंपेनियनशिप आठ सालों तक चली. 1956 से 1964 तक. हुसैन उसके साथ शादी करना चाहते थे.

एमएफ हुसैन इस चेक लड़की पर इस कदर फिदा थे कि अपनी बीवी को छोड़कर उससे शादी करना चाहते थे


हुसैन ने अपनी जीवनी मकबूल फिदा हुसैन के लेखक के विक्रम सिंह से कहा, “हमें लगता था कि हम कोई सपना जी रहे हैं. करने को ढेर सारी बातें थीं.” ये प्यार तेजी से आया और दोनों को जबरदस्त तरीके से जकड़ गया. हुसैन ने कहा, “ये आठ साल ऐसे बीते मानो आठ मिनट.”

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दोनों ने चर्च में शादी का फैसला किया
इस किताब में कहा गया कि ये तय हो चुका था कि मारिया के साथ वह प्राग के चर्च में ही शादी कर लेंगे. उन्होंने भारत में अपनी बीवी फाजिला को फोन किया. सारी बातें बताईं. तलाक देने को कहा, जिससे वो कैथोलिक तरीके से शादी कर सकें. फाजिला बीबी से उनकी शादी 1941 में हुई थी. वह शादी उन्होंने अपने अब्बू और अम्मा की रजामंदी से की थी. फाजिला से हुसैन के छह बच्चे थे. हुसैन मुस्लिम तौर-तरीके से चार बीवियां रख सकते थे लेकिन फाजिला तलाक देने के लिए राज़ी हो गईं.

हुसैन शादी का जोड़ा खरीदने लंदन गए थे और क्या हो गया..
हुसैन शादी का जोड़ा खरीदने लंदन गए. वहां उन्होंने मारिया के लिए एक वॉक्सवैगन कार बुक कराई. लेकिन ठीक आखिरी मौके पर मारिया का मन बदल गया. उसका मानना था कि ये शादी नहीं चल पाएगी, क्योंकि दोनों के कल्चर और जड़ों में बहुत अंतर है. वो भारत आने को भी तैयार नहीं थी. लेकिन इसके बाद भी हुसैन से रिश्ते बरकरार रहे. जब मारिया ने बाद में एक साइंटिस्ट जेन डॉटियर से शादी की तब भी हुसैन उसमें शामिल हुए.

उन्होंने मारिया से शादी करने के लिए शादी का जोड़ा खरीद लिया था. शादी की तारीख भी फिक्स हो गई थी लेकिन आखिरी मौके पर मारिया ने मना कर दिया


फिर जब शादी के बाद वो ऑस्ट्रेलिया जा रही थी तो हुसैन विशेष तौर पर प्राग गए ताकि कस्टम से उन पेंटिंग्स को क्लीयर कराकर भेजा जा सके, जो उन्होंने मारिया को उपहार में दी थीं. इसमें वो पेंटिंग्स भी थीं, जो उन्होंने मारिया सीरीज से अपने और मारिया के संबंधों पर बनाईं थीं.

अपनी प्रेम कहानी पऱ फिल्म बनाई
मारिया को हुसैन कभी नहीं भूल पाए. उन्होंने जब तब्बू को लेकर फिल्म "मीनाक्षीः ए टेल ऑफ थ्री सीटीज" बनाई तो ये अपनी उसी प्रेमिका को ध्यान में रखकर बनाई गई. इसकी लवस्टोरी उनकी अपनी कहानी थी. फिल्म बनने के बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में मारिया की खोज कराई. ये आसान तो नहीं था लेकिन उन्होंने उन्हें मेलबर्न में खोज ही निकाला. खुद उसके पास गए. ऑस्ट्रेलिया में हुसैन की अगवानी मारिया की बेटी ने की. दोनों ने तीन दिन मेलबर्न में साथ गुजारे-पुरानी हसीन रोमानी यादों को याद किया. हंसे-मुस्कराए. मारिया ने हुसैन के लिए खाना बनाया.

दोनों 45 साल बाद यूं मिले
दोनों 45 साल बाद मिले थे लेकिन ऐसा लगा जैसे कल ही मिले हों. हुसैन ने जीवनी लेखक से कहा, ये प्लेटोनिक लव था, हां इसमें नजदीकियां भी थीं. हम साथ में सोये भी. जब हुसैन ऑस्ट्रेलिया से लौट रहे थे तो मारिया को फिल्म की डीवीडी हाथों में देकर आए.

मारिया ने हुसैन के निधन के बाद लौटा दी ये अमानत
कतर ने हुसैन को नागरिकता दे दी थी. 2006 में उन्हें देश छोड़ना पड़ा था. लेकिन वो इसके बाद कभी वापस नहीं लौट पाए. 9 जून 2011 में लंदन में उनका निधन हो गया. उसके साथ ही भारत के पिकासो की कहानी भी थम गई. हालांकि एक पेंटर के तौर पर उनकी ना जाने कृतियां दुनियाभर में लोगों को लगातार सम्मोहित करती रहती हैं. हुसैन के निधन के बाद मारिया ने वापस अपने देश चेक रिपब्लिक लौटने का फैसला किया. तब उसने हुसैन से मिली सारी पेंटिंग्स उनके परिवार को लौटा दी, जिनकी कीमत करोड़ों में थी. वह चाहतीं तो बड़े आराम से उन्हें बेचकर करोड़ों-अरबों कमा सकती थीं. हुसैन ने अपनी जितनी पेटिंग्स बनाई, उन सभी के केंद्र में भारतीय संस्कृति, देवी-देवता, देश, लोग, पर्सनालिटीज, सरोकार, पौराणिक कहानियां थीं. उनकी अकेली पेटिंग सीरीज मारिया ही थी, जिसमें उन्होंने विदेशी कल्चर की झलक अपनी पेटिंग्स में उकेरीं.

कई बॉलीवुड एक्ट्रैस भी प्रेरणा बनीं
हुसैन रोमानी तबीयत के शख्सियत थे. बाद में उनका नाम कई सुंदर महिलाओं से जुड़ा. उसमें कुछ बॉलीवुड की वो अदाकाराएं थीं, जिनकी सुंदरता का कायल सारा जमाना था. उनमें से कुछ को लेकर उन्होंने फिल्में बनाईं. उनके वो करीब रहे. इनमें माधुरी दीक्षित, तब्बु, अनुष्का, उर्मिला मातोंडकर, अमृता राव और विद्या बालन शामिल रहीं.

67 बार देखी माधुरी की फिल्म
माधुरी को लेकर वो इतने फिदा हो गए थे कि उनकी फिल्म “हम आपके हैं कौन” को उन्होंने 67 बार देखा. जब माधुरी ने “आजा नचले” फिल्म से वापसी की तो उन्होंने वर्ष 2007 में सारा थिएटर बुक कराया. अकेले वह फिल्म देखी. इससे पहले वो माधुरी को लेकर “गजगामिनी” भी बना चुके थे. साथ ही “गजगामिनी” पर माधुरी की पेंटिंग्स की सीरीज भी. अमृता राव की “विवाह” को नौ बार देखा. इस पर भी पेटिंग सीरीज रची. “इश्किया” देखने के बाद विद्या बालन के इश्क में पड़े कि एक नई फिल्म बनाने की योजना बनाने लगे. वैसे मकबूल जितने रोमानी थे उतने ही विवादित भी रहे. बाद में हिंदू देवी देवताओं पर उनकी कुछ पेंटिग्स पर इतना विवाद और प्रदर्शन हुए कि वो खुद देश छोड़कर चले गए. कभी सऊदी अरब में रहे तो कभी ब्रिटेन में.

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First published: September 17, 2019, 11:40 AM IST
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