आसपास के तारों का रंग बदल रहा है हमारी गैलेक्सी का ये ब्लैकहोल

मिल्की वे (Milky Way) के केंद्र का ब्लैक होल (Black Hole) अपने पास के तारों का रंग बदल रहा है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA_JPL-Caltec)

मिल्की वे (Milky Way) के केंद्र का ब्लैक होल (Black Hole) अपने पास के तारों का रंग बदल रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: NASA_JPL-Caltec)

हमारी मिल्कीवे (Milky Way) गैलेक्सी (Galaxy के सुपरमासिव ब्लैकहोल (Supermassive Black Hole) सैजिटैरियस ए* (Sagittarius A*) अपने आसपास के तारों (Stars) के रंग में बदलाव के लिए जिम्मेदार है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 1, 2021, 1:34 PM IST
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ब्रह्माण्ड में ब्लैकहोल (Black Hole) के बारे में वैसे तो प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलते हैं लेकिन उनके आसपास इतनी जानकारी मिलती है कि उससे उनके बारे में बहुत कुछ पता चल चुका है. इसी तरह से हमारी गैलेक्सी (Galaxy) मिल्की वे (Milky Way) के केंद्र में सैजिटैरियस ए* (Sagittarius A*) नाम का सुपरमासिव ब्लैकहोल (Supermassive Black Hole) के बारे में भी एक नई जानकारी मिली है. खगोलभौतिकविदों को लगता है कि यह ब्लैकहोल अपने आसपास के तारों (Stars) का रंग बदल रहा है.

लाल तारों की उम्मीद से कम संख्या

सैजिटैरियस ब्लैक होल 1.6 प्रकाश वर्ष के इलाके और उसके आसपास में बहुत सारे तारे मौजूद हैं, लेकिन जितना समझा जाता रहा है इसमें विशाल लाल तारों की संख्या कहीं कम है. साइंस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं का मानना है कि इसकी वजह सैजिटेरियस ही है.

एक जेट की वजह से बदला रंग
खगोलभौतिकविदों के सिद्धांत  के मुताबिक ब्लैकहोल ने गैस का एक शक्तिशाली जेट उत्सर्जित किया था जिसने गैलेक्सी के विशाल लाल तारों की बाहरी परत को चीर दिया था जिससे तारे और ज्यादा गरम होते गए और उनका रंग नीला हो गया और लाल हिस्सा हट गया था.

अभी नहीं निकल रहे हैं जेट

इस मत को रखने वाले वरसॉ के पोशिल एकेडमी ऑफ साइंसेस खगोलभौतिकविद माइकल सजैसिक का यह अध्ययन पिछले नहीं एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ था. इन दिनों सैजिटेरियस से बहुत ज्यादा शक्तिशल जेट और गैस बाहर नहीं निकल रहे हैं, लेकिन मिल्की वे के केंद्र के ऊपर और नीचे गामा विकिरण करने वाले गैस के बुलबुले मौजूद हैं.



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ब्लैकहोल (Black Hole) से निकलने वाली जेट (Jet) ही उसके पास के विशाल लाल तारों (Red Giants) के लिए खतरनाक है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


इस जेट की मौजूदगी के प्रमाण मिले

 ये बुलबुले ही शक्तिशाली जेट के होने के संभावित प्रमाण हैं जिसकी वजह से लाल तारे 40 लाख साल पहले अपनी बाहरी परत को गंवा चुके हैं. सजैसिक का कहना है कि जेट विशाल लाल तारों पर खासा प्रभाव डालते हैं, और वे सटीकता इन्हें काट सकते हैं.

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कैसे बनते हैं ये विशाल लाल तारे

लाल तारों का निर्माण तब होता है जब छोटे तारों के केंद्र हीलियम से इतने ज्यादा भर जाते हैं कि वे हाइड्रोजन को जलाने की स्थिति में नहीं रह पाते हैं जिसकी वजह से वे केवल केंद्र के आसपास की हाइड्रोजन की परत को ही जला पाते हैं. इसकी वजह से तारे की बाहरी सतह फैलने लगती है जिससे सतह ठंडी होकर लाल रंग की हो जाती है. यही कारण है कि विशाल लाल तारे सैजिटेरियस ए* के जेट के आसान शिकार बन जाते हैं.

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विशाल लाल तारों (Red Giants) में बदलाव के लिए ब्लैकहोल (Black Hole) से निकलने वाली जेट (Jet) के अलावा डिस्क की गैसों की भूमिका थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


कितना समय लगा तारों को चीरने में

जब ये विशाल तारे सैजिटेरियस ए* की कक्षा में घूमते हैं तो वे जेट के पास से गुजरते हैं और सैंकड़ों और हजारों बार गुजरने के बाद उनकी बाहरी परत फट जाती है और लाल तारा नीले रंग में बदल जाता है. सजैसिक की टीम ने आंकलन किया कि इन जेट ने लाल तारों की बाहरी परत को चीरने में 13 प्रकाश वर्ष का समय लगाया.

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शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के बहुत से कारक मिल कर इन विशाल लाल तारों के कम होने की वजह बता सकते हैं. जेट ने इन तारों का रंग बदलने के साथ ही उन्हें ब्लैकहोल से भी दूर कर दिया होगा. इन सभी में ब्लैकहोल के बाहर गैस डिस्क की भी सक्रिय भूमिका रही होगी.
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