11 अरब साल पुरानी घटना ने बदल दिया था हमारी गैलेक्सी का पूरा आकार

मिल्की वे (Milky Way) के इस ऐतिहासिक विलय (Merger) से बहुत कुछ पता चला है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
मिल्की वे (Milky Way) के इस ऐतिहासिक विलय (Merger) से बहुत कुछ पता चला है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

हमारी गैलेक्सी (Gallaxy) मिल्की वे (Milky Way) का 11 अरब साल पहले एक दूसरी गैलेक्सी से विलय (Merger) में उसका पूरा आकार ही बदल गया था. इस घटना से और भी रहस्य खुले हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 19, 2020, 6:45 AM IST
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हमारी गैलेक्सी (Galaxy) मिल्की वे (Milky Way) का इतिहास काफी लंबा है. इस दौरान उसका कई गैलेक्सी से टकराव और विलय (Merger) भी हुआ है. इस लंबे इतिहास का सिलसिलेवार पता लगा एक बहुत ही मुश्किल काम है. मिल्की वे का चक्कर लगाने वाले घने तारा समूह (Star Cluster) के विश्लेषण से खगोलविदों को इस इतिहास की एक अहम घटना के बारे में पता चला है.  अरबों साल पहले एक विलय ने हमारी मिल्की का पूरा का पूरा आकार (Shape) ही बदल कर रख दिया था.

अब तक का सबसे बड़ा विलय
खगोलविदों को अब तक के संपूर्ण आकाशगंगा संबंधी विलय के बारे में पता चला है. यह विलय मिल्की वे और एक अन्य गैलेक्सी के बीच हुआ था जिसे वैज्ञानिकों ने नाम दिया है क्रकेन (Kraken). दोनों गैलेक्सी के बीच का विलय 11 अरब साल पहले हुआ था. इससे मिल्की वे के बारे केवल कुछ ही जानकारी मिल पाई है.

खास तारा समूह से मिली जानकारी
इस बात की जानकारी खास खगोलविदों को तारा समूहों से जानकारी मिली है. इन तारा समूह को ग्लोबुलर क्लस्टर्स कहा जाता है. इस तरह के तारा समूहों को शुरुआती ब्रह्माण्ड के जीवाश्म कहा जाता है. ये बहुत ही घने गोलाकार समूह होते हैं जिनमें एक से 50 लाख  की संख्या में तारे ब्रह्माण्ड  की उम्र के जितने पुराने होते हैं. किसी ग्लोबुलर क्लस्टर में सभी तारे एक ही साथ एक ही गैस के बादल से बनते हैं. इसका मतलब यह है कि इनकी रासायनिक संरचना से इनकी उत्पत्ति के बारे में जाना जा सकता है.



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गैलेक्सी (Galaxy) के आसपास के तारा समूह (Star Clustur) से बहुत सारी जानकारी मिलती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


केवल एक भाग
लेकिन यह पहेली का केवल एक ही हिस्सा है.  मिल्की वे के आसपास इस तरह के करीब 150 ग्लोबुलर क्लस्टर हैं.  इनकी कक्षा के बारे में पूरी जानकारी निकलाने से यह भी जानकारी मिल सकती है कि वे कहां से आए हैं.  जबकि इन तारा समूहों में से कुछ टूटफूट कर लंबे स्टेलर स्ट्रीम यानी तारों की धारा में बदल गए हैं.

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सिम्यूलेशन से बनाई पूरी जानकारी
मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित ताजा शोध में खगोलविदों की टीम ने यही मुश्किल काम किया है. खगोलविदों ने आर्टिफीशियल न्यूरल नेटवर्क का उपयोग कर मिल्की वे जैसे गैलेक्सी का चक्कर लगाते हुए ग्लोबुलर क्लस्टर का सिम्यूलेशन किया. इन सिम्यूलेशन को E-MOSAICS कहा जाता है जो ग्लोबुलर क्लास्टर के पूरे जीवन की रूपरेखा मॉडल होता है जिसमें उनकी उत्पत्ति से लेकर उनकी खत्म होने का लेखा-जोखा होता है.

इतिहास से जोड़ने का मुश्किल काम
शोधकर्ताओं का कहना है कि इन तारा समूहों के गुणों को गैलेक्सी के विलय के इतिहास से जोड़ना बहुत कठिन प्रक्रिया है. इससे इन क्लस्टर की कक्षाएं बदल पूरी तरह से बदल जाती हैं. शोधकर्ताओं ने अपने एल्गॉरिदम को हजारों बार सिम्यूलेशन पर जांचा और विलय के इतिहास का पता लगाने की कोशिश की.

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ग्लोबुलर क्लस्टर्स (Globular Clusters) से गैलेक्सी (Galaxy) के इतिहास के बारे में पता चला.


और सैटेलाइट से मिले आंकड़े
इसके बाद उन्होंने वास्तविक यानि आज के उपलब्ध आंकड़ों को सॉफ्टवेयर में डाला. ये आंकड़े उसे यूरोपीय स्पेस एजेंसी के गीगा सैटेलाइट से मिले जो मिल्की वे गैलेक्सी का नक्शा बनाने पर काम कर रहा है.

पांच बड़े टकराव
इन आंकडों की मदद से टीम ने ग्लोबुलर क्लस्टर का उनकी कक्षाओं के आधार पर समूह बनाए. एक सी कक्षा के क्लस्टर की उत्पत्ति एक साथ हुई थी इससे यह भी पता चला कि कभी मिल्की वे का किसी गैलेक्सी से विलय हुआ था.  आंकड़ों और सिम्यूलेशन के आधार पर खगोलविदों को पता चला कि मिल्की वे का पांच गैलेक्सी से टकराव हुआ था.

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शोध में पाया गया है कि पांचवा टकराव अहम था जिस गैलेक्सी से यह टकराव हुआ था उसका नाम क्राकेन दिया गया. वह टकराव वास्तव में एक विलय था. उस समय मिल्की वे का भार आज के भार से चार गुना कम था. इस विलय के कारण क्राकेन ने निश्चित तौर पर मिल्की वे का आकार बदल दिया होगा.
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