तारों में धातुओं की मात्रा ने खोला तारा समूह के बारे में रोचक राज

गैलेक्सी (Galaxy) के केंद्र के पास का यह तारा समूह ब्लैक होल (Black Hole) के पास स्थित है, लेकिन इसके कई तारे बहुत दूर से आए थे.   (प्रतीकात्मक तस्वीर: M81@chandraxray)
गैलेक्सी (Galaxy) के केंद्र के पास का यह तारा समूह ब्लैक होल (Black Hole) के पास स्थित है, लेकिन इसके कई तारे बहुत दूर से आए थे. (प्रतीकात्मक तस्वीर: M81@chandraxray)

मिल्की वे (Milky Way) के केंद्र में स्थित न्यूक्लियर तारा समूह (Nuclear Star cluster) के तारों की धातुओं (Metals) की मात्रा ने इस तारा समूह के निर्माण के बारे में जानकारी दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 6:47 PM IST
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हमारे ब्रह्माण्ड (Universe) में खगोलविदों को चौंकाने के लिए न केवल बहुत से पिंड हैं, बल्कि कई तरह की घटनाएं भी हैं जो उन्हें हैरान भी करती रहती हैं. हमारी गैलेक्सी मिल्की वे (Milky Way) के केंद्र में एक बहुत बड़ा ब्लैकहोल (Black Whole के पास एक बहुत ही विशाल तारा समूह (nuclear star cluster) है. इस तारा समूह के बारे में शोधकर्ताओं को बहुत सी रोचक जानकारियां मिली हैं, जिसका संबंध ने केवल उस ब्लैकहोल से है बल्कि 3 लाख 20 हजार प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक ड्वार्फ गैलेक्सी (Dwarf Galaxy) से भी है.

सबसे बड़ा तारा समूह
यह तारा समूह हमारी गैलेक्सी का सबसे बड़ा तारा समूह है. यह सबसे तेज चमकता है और इसका भार हमारे सूर्य से करीब 2.5 करोड़ गुना ज्यादा है. एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लैटर्स जर्नल में प्रकाशित इस यह ताजा अध्ययन बताता है कि इस तारा समूह ने अपने चमक हासिल करने के लिए आस पास के छोटे तारा समूह निगले जिसमें एक ड्वार्फ गैलेक्सी भी शामिल हो सकती है.

इस खास तारा समूह के तारों का अध्ययन
न्यूक्लियर तारा समूह ब्रह्माण्ड के सबसे घने समूह होते हैं. इस बात ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर रखा है कि ये तारे कैसे एक दूसरे के पास रह पाते होंगे जो गुरुत्व से एक दूसरे जुड़े हैं. UCLA के खगोलविद तुआन दो की अगुआई में हुए हाल के अध्ययन में मिल्की वे के केंद्र से संबंधित सवालों के जवाब पाने का प्रयास किया गया.



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न्यूक्लियर तारा समूह (nuclear star cluster) बहुत बड़े और ब्रह्माण्ड के सबसे घने तारा समूह होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay). (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


धातुओं की मात्रा और तारों की गति में संबंध
इस अध्ययन में पाया गया कि जिन तारों में धातु की मात्रा हमारे सूर्य के मुकाबले कम होती है. वे उन तारों से बहुत अलग तरह से गतिमान होते हैं जिनमें धातु अधिक होती है. इस टीम ने करीब 700 विशाल लाल तारों का अवलोकन किया जो कि पांच प्रकाशवर्ष के दायरे में हमारी गैलेक्सी के केंद्र में स्थित हैं. चूंकि इतनी दूरी का प्रकाश तारों और ग्रहों के बीच की धूल रोक लेती है. इसलिए शोधकर्ताओं ने इंफ्रारेड तरंगों का उपयोग कर यह अध्ययन किया जिससे धूल वाले इलाके बीच में आने से उनके अवलोकन में फर्क न पड़े.

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क्या पाया शोधकर्ताओं ने
दो और उनके साथियों ने पता लगाया कि न्यूक्लियर तारा समूह के करीब 7 प्रतिशत तारे दूसरे तारों के मुकाबले ज्यादा तेजी से चक्कर लगा रहे हैं और उनकी धुरी भी काफी अलग है. ये तारे भी एक ही समूह के हैं क्योंकि सभी में धातु की मात्रा बहुत कम है. इस अध्ययन से यह भी पता चला कि इन तारों  में हमारे सूर्य के मुकाबले 30 प्रतिशत धातु कम है, जबकि तारा समूह के अन्य तारों में सूर्य के मुकाबले ज्यादा धातु मौजूद है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से पता चलता है कि कुछ न्यूक्लियर तारा समूहों का निर्माण इनमें गिरने वाली वस्तुओं से हुआ होगा.

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तारों (Stars) की अलग अलग गति और धातुओं (Metal) की मात्रा ने काफी कुछ बताया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: नासा)


दूसरे अध्ययन मे पता लगी यह बात
इस तरह एक अन्य अध्ययन में हैडिलबर्ग यूनिवर्सिटी जर्मनी के मैनुअल आर्का सेडा और उनके साथियों ने कम्प्यूटर मॉडल्स के सिम्यूलेशन के जरिए पता लगाया कि कैसे एक तारा समूह मिल्की वे के न्यूक्लियर तारा समूह में समा जाएगा और यह सब कैसे नए अवलोकनों के अनुकूल हो सकता है.

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इस अध्ययन ने बताया कि यदि ऐसी घटना होती है तो यह करीब 3 अरब साल पहले के आसपास हुई होगी. निगला गया तारा समूह खुद हमारे सूर्य से लाखों गुना वजन होगा.  यह दूसरा आध्ययन भी एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लैटर्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है.
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