जानिए, खगोलविदों ने हमारी गैलेक्सी के पीछे कैसे खोजे खरबों तारे

जानिए, खगोलविदों ने हमारी गैलेक्सी के पीछे कैसे खोजे खरबों तारे
हमारी गैलेक्सी के पीछे करीब 1.4 अरब प्रकाशवर्ष बड़ा विशाल खगोलीय पिंडों का समूह छिपा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हमारी गैलेक्सी (Galaxy) मिल्की वे (Milky Way) के पीछे अरबों तारे (Stars), हजारों गैलेक्सियां मौजूद हैं, खगोलविदों ने बड़े रोचक तरीके से इसका पता लगाया.

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ब्रह्माण्ड (Universe) की विशालता को हमारे खगोलविद (Astromers) एक चुनौती की तरह लेते हैं. इतनी विविधताओं से भरे इस ब्रह्माण्ड में कई विशालकाय तारे, गैलेक्सी, और अन्य पिंड हैं जो कई बार हैरान भी करते हैं.  इनके बारे में जानकारी हासिल करना काफी मुश्किल काम है, खासकर तब जब हम इनके बारे में जानने के लिए अंतरिक्ष आने वाली किरणों और तरंगों पर ही निर्भर हैं. इस चुनौतीपूर्ण माहौल में खगलोविदों ने हमारी गैलेक्सी मिल्कीवे (Milky Way) के पीछे एक ऐसा इलाका (Cosmic Structure) ढूंढा है जहां बहुत सारी गैलेक्सी तारे और ग्रह मौजूद है. इन्हें अब तक इसलिए नहीं देखा जा सका था क्योंकि ये हमारी गैलेक्सी के पीछे हैं

सीमाओं के बाद भी नक्शा बनाने की कोशिश
ब्रह्माण्ड की इतनी अधिक विशालता और हमारी सीमाओं के कारण इसका नक्शा बनाना बहुत कठिन है. वर्तमान तकनीक से हम केवल 10 अरब प्रकाशवर्ष दूर के पिंडों को अवलोकित कर पाते हैं. ऐसे में हमारी पृथ्वी से ही इस ब्रह्माण्ड का थ्रीडी नक्शा बनाना बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. लेकिन इसके बाद भी ब्रह्माण्ड का नक्शा बनाने की कोशिशें जारी हैं. शोधकर्ता ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जिससे हमें उन पिंडों के बारे में जानकारी मिल सके जिन्हें हम सीधे नहीं देख सकते हैं.

इस कोशिश से हुआ बड़ा खुलासा
इसी तरह के एक प्रयास में ताजा शोध में एक अतिविशालकाय खगोलीय संरचना के बारे पता चला है जिसमें बहुत सारे तारे गैलेक्सी और ग्रह समाए हुए हैं. इस विशाल संरचना को वैज्ञानिकों ने दक्षिणी ध्रुव की दीवार (South Pole wall) नाम दिया है.



Stars
खगोलविदों ने बहुत सारे आंकड़े जमा कर ज्ञात गैलेक्सियों की गतिविधियों के आधार पर यह जानकारी हासिल की. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


कितना विशाल है यह क्षेत्र
हाल ही में एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक इस विशाल संचरचना की लंबाई करीब 1.4 अरब प्रकाशवर्ष बताई जा रही है जिसमें सैकड़ों गैलेग्सी के समूह हैं. और इसकी सबसे खास बात यही है कि यह हमारी मिल्की वे के पीछे छिपी हुई थी.

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सीधे न देख पाने की समस्या
जब हम अंतरिक्ष में देखते हैं तो बहुत सा हिस्सा हमें साफ दिखता है, लेकिन जब हम अपनी खुद की गैलेक्सी की दिशा में देखते हैं बहुत सारे तारे और पिंड से आने वाली रोशनी इस गैलेक्सी के कारण हम तक नहीं पहुंच पाती है. यह बिलकुल वैसा है कि जब आप किसी चीज को देख रहे हैं तो उसके पीछे की चीजों को नहीं देख पाते. इसलिए शोधकर्ताओं ने इस न दिख पाने वाले पिंडों को जानने के एक अलग तरीका निकला.

Space
इस विशाल संरचना को खगोलविदों ने द साउथ पोल वॉल नाम दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


तो अब कैसे पता चला
ऐसी चीजों को सीधे देखने की कोशिश करने के बजाय, शोधकर्ताओं ने पुराने आंकड़ों की मदद ली और  सुदूर गैलेक्सियों की गतिविधियों का अध्ययन किया जिन्हें वे देख सकते थे. उन्होंने यह देखा कि ये गैलेक्सियां पृथ्वी से कितनी तेजी से दूर जा रही हैं और उनपर दूसरी दिशाओं से गुरुत्व बलों का क्या प्रभाव पड़ रहा है. इस तरह के बहुत सारे  आंकड़ों को एक साथ देखने के बाद जो नक्शा सामने आया, उससे शोधकर्ताओं ने पाया कि हमारी गैलेक्सी मिल्की वे के पीछे एक अतिविशाल गैलेक्सियों का समूह होना जाहिए जो अब तक के पाए गए सबसे बड़े दस समूह में शामिल होगा.

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बताया जा रहा है कि इस  साउथपोल वॉल में दस करोड़ अरब सूर्य हो सकते हैं और शायद इससे ज्यादा भी. इसके बाद भी शोधकर्ता यह दावा करने की स्थिति में नहीं हैं कि इस विशालकाय समूह में कितना और किस तरह का पदार्थ होगा. हो सकता है कि उसें हजारों गैलेक्सियां हों लेकिन उसमें डार्कमैटर की हिस्सेदारी के बारे में अनुमान लगाने की स्थिति में वे नहीं हैं.
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