जानिए कौन सा बड़ा खतरा मंडरा रहा है पाकिस्तान पर, मचेगी बड़ी तबाही

जानिए कौन सा बड़ा खतरा मंडरा रहा है पाकिस्तान पर, मचेगी बड़ी तबाही
टेक्टोनिक प्लेट की गतिविधियों के कारण ही पर्वतों का निर्माण होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पाकिस्तान में बड़ी संख्या में ग्लेशियर (Glaciers) है जो जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण तेजी से पिघलने लगे हैं. इससे होने वाली बाढ़ से लाखों लोगों की जान को खतरा हो गया है.

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नई दिल्ली: इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस ( Corona virus) से जूझ रही है. पाकिस्तान भी इससे अछूता नहीं है. लेकिन पाकिस्तान में इससे भी बड़ा संकट मंडरा रहा है. वहां के ग्लेशियर (Glaciers) तेजी से पिघल रहे हैं जिसकी वजह से आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ आने लगी हैं. वैसे तो बाढ़ बचने के लिए एक वार्निंग सिस्टम (Warning system) की परियोजना भी शुरू की गई है, लेकिन फिलहाल वह परियोजना पूरी नहीं होती दिख रही है. वहीं बाढ़ की वजह से स्थानीय लोगों की परेशानिंया बढ़ती जा रही है.

इस इलाके में मचाई बाढ़ ने तबाही
पिछले महीने  पाकिस्तान के हुन्जा जिले के एक छोटे से गांव हसानाबाद के लोगों ने देखा कि उनके घर के पास में बह रही नदी में अचानक से पानी का जलस्तर बढ़ने लगा है. इस नदी में शिशपेर ग्लेशियर से पानी आता है. पानी का स्तर इतना ज्यादा बढ़ गया कि वह लोगों के घरों के तीन मीटर पास तक आ गया. इस बाढ़ में पानी के साथ पत्थर के बड़े बड़े टुकड़े भी आए जिनके कारण अखरोट, चेरी और खूबानी के बगीचे नष्ट हो गए. इन फसलों पर इस गांव के कई परिवार निर्भर रहते हैं. इसके अलावा कई घर टूटने के साथ स्थानीय सिंचाई और पनबिजली परियोजना को भी खासा नुकसान हुआ.

वार्निंग सिस्टम और दिक्कतें
गांववालों ने समाचार एजेंसी रायटर को बताया कि बाढ़ के पानी से वह दीवार भी टूट गई जिससे पिछले साल सुरक्षा के लिए बनाया गया था. अब नदी का पानी उनके घर के पास से गुजर रहा है. यह इलाका पाकिस्तान की उन 24 घाटियों में शामिल है जिनमें साल 2018 से 2022 तक एक ऐसा वार्निंग सिस्टम बनाया जाना था, जो उन्हें बाढ़ की चेतावनी देगा. इसके लिए ग्रीन क्लाइमेट फंड से 3.7 करोड़ डॉलर का अनुदान भी मिला था. इस परियोजना में रुकावट के कई कारण हैं जिनमें पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और जलवायु परिवर्तन मंत्रायल में मदभेद, स्थानी सरकार में बदला और कोरोना वायरस शामिल हैं. इस प्रोजेक्ट के राष्ट्रीय निदेशक अयाज जुदात का कहना है कि समस्याएं सुलझा ली गई हैं और जून तक स्टाफ की नियुक्ति भी हो जाएगी. सितंबर तक पहला वार्निंग सिस्टम लग जाएगा.



Glacier
बतााय जा रहा है कि हिमालय के ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन की वजह से तेजी से पिघल रहे हैं.


जलवायु परिवर्तन का असर पाकिस्तान में क्यों है ज्यादा
पाकिस्तान में ध्रवीय इलाकों के बाद दुनिया के सबसे ज्यादा ग्लेशियर है. इनकी संख्या करीब सात हजार है. जलवायु परिवर्तन का सबसे घातक असर ग्लेशियरों पर भी हो रहा है. पिछले साल साइंस एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक जलवायु परिवर्तन हिमालय के इलकों में ग्लेशियर बहुत ही तेजी से पिघला रहा है. इस वजह से पाकिस्तान में के इन ग्लेशियरों की बर्फ के पिघलने की रफ्तार में भी काफी तेजी आ रही है. ग्लेशियर की बर्फ पिघल कर झीलों में जमा हो रही है. वहां क्षमता से ज्यादा पानी जमा होने के कारण आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनने लगी है.

बढ़ रही हैं झीलें और...
साल 2018 तक इस तरह तीन हजार से ज्यादा झीलें बन चुकी हैं. इनमें से 33 को खतरनाक माना गया है. यूएनडीपी के अनुसार इसकी वजह से निचले इलाके में रहने वाले करीब 70 लाख लोगों की जीवन खतरे में आ गया है. खतरे को कम करने के लिए साल 2011 से 2016 के दौरान चितराल और गिलगित की दो झीलों में इस तरह का वार्निंग सिस्टम लगाने के साथ सुरक्षा दीवार भी बनाई गई थी. नए प्रजेक्ट में ऐसा 15 जिलों में होना है.

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ग्लेशिर के तेजी से पिघलने से ही बाढ़ का खतरा बढ़ता है.


आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने से ग्लेशियर और तेजी से पिघलेंगे. इस लिहाज से जून से सितंबर तक का समय खतरनाक है क्योंकि पिछली बार सर्दियों में भारी बर्फबारी हुई थी. ऐसे में हसनाबाद निवासियों की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि उन्हें नहीं लग रहा है कि जल्दी ही उनके गांव में वार्निंग सिस्टम लग सकेगा.

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