क्या है यह ‘Mini Moon’ जो तेजी से आ रहा है पृथ्वी की कक्षा में?

यह पिंड पहले सूर्य (Sun) की कक्षा (Orbit) में था अब यह पृथ्वी (Earth) की कक्षा में आ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
यह पिंड पहले सूर्य (Sun) की कक्षा (Orbit) में था अब यह पृथ्वी (Earth) की कक्षा में आ रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

पृथ्वी (Earth) की कक्षा (Orbit) की ओर एक पिंड (object) तेजी से आ रहा है. नासा (NASA) विशेषज्ञ का कहना है कि यह कोई क्षुद्रग्रह (Asteroid) नहीं बल्कि पुराने रॉकेट का हिस्सा है जो चंद्र अभियान के लिए उपयोग में लाया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 11:04 AM IST
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पृथ्वी (Earth) की कक्षा (Orbit) में एक वस्तु (Object) आ रही है और वैज्ञानिक इसे मिनी मून (Mini Moon) कह रहे हैं. इस पिंड की खास बात यह है कि यह पहले पृथ्वी की चक्कर नहीं, बल्कि सूर्य (Sun) का चक्कर लगा रहा था, लेकिन  अब छोटा सा यह चंद्रमा पृथ्वी की कक्षा में घुसने की राह पर है. यह 27 हजार मील की दूरी तक आ चुका है. यह एक क्षुद्रग्रह (Asteroid) नहीं है जो पृथ्वी की कक्षा में आकर उसके पास से निकल जाए, बल्कि यह एक अंतरिक्ष का कचरा (Debris) है जो हमारे ग्रह की ओर वापस आ रहा है.

पुराने रॉकेट का हिस्सा
नासा के सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑबजेक्ट स्टडीज के निदेशक डॉ पॉल चोडास का मानना है कि यह वस्तु जिसका नाम एस्ट्रॉयड 2020 SO दिया गया है. वास्तव में 1960 के दशक का पुराना बूस्टर रॉकेट है. चोडास ने सीएनएन को बताया, “मुझे लगता है कि हाल ही में खोजा गया 2020 SO एक पुराना बूस्टर रॉकेट है क्योंकि यह यह सूर्य की कक्षा में चल रहा है जो पृथ्वी की कक्षा जैसी ही है. यह कक्षा लगभग वृत्ताकार है, पृथ्वी की कक्षा के ही तल में हैं, बस केवल सूर्य से ज्यादा दूर है.

चंद्र अभियान के चरण का भाग
डॉ चोडास ने बताया, “यह बिलकुल उसी तरह की कक्षा है जब एक रॉकेट चंद्रमा के अभियान के दौरान किसी चरण पर अलग होता है एक बार यह चंद्रमा से आगे निकलने पर सूर्य की कक्षा में चला जाता है. इसकी संभावना नहीं है कि कोई क्षुद्रग्रह इस तरह से अपनी कक्षा बना ले, लेकिन यह नामुमकिन भी नहीं है.”



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आमतौर पर पृथ्वी (Earth) के पास क्षुद्रग्रह (Asteroid) ही गुजरते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


किस अभियान का हिस्सा रहा होगा ये
डॉ चोडास ने इस पिंड की गतिविधि को समय के पीछे ले जाकर अध्ययन किया और उसे एक किसी ज्ञात चंद्र अभियान से जोड़कर देखा और पाया कि यह 1966 के आसपास के अभियान से जुड़ा होगा.  उन्होंने पाया का यह  सर्वेयर 2 के प्रक्षेपण से जुड़ा था जो 20 सितंबर 1966 को प्रक्षेपित किया गया था. वह अभियान चंद्रमा पर हलकी लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन इसके नाकाम होने से अंतरिक्ष यान क्रैश हो गया था. इस अंतरिक्ष यान को बूस्ट करने के लिए सेंटॉर रॉकेट का उपयोग किया गया था जो चंद्रमा से आगे निकल कर सूर्य के पास की कक्षा में चला गया था जो अब से पहले कभी नहीं देखा गया था.

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कब आएगा यह
उस रॉकेट का यह हिस्सा पृथ्वी की दूर की कक्षा में इस साल नवंबर के अंत में प्रवेश कर सकता है. क्षुद्रग्रह के जैसा लगने के कारण इसे एक तरह का मिनी मून कहा जा रहा है. अगर यह वाकई बूस्टर रॉकेट निकला जैसा कि डॉ चोडास संदेह जता रहे हैं, तो यह अंतरिक्ष में घूम रहे दूसरे कचरों की तरह ही एक और कचरे का टुकड़ा होगा.

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क्षुद्रग्रह (Asteroid) का इस तरह से कक्षा (Orbit) बदलाव नामुमकिन तो नहीं लेकिन बहुत ही मुश्किल है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


अगले महीने होगी स्थिति स्पष्ट
“एक महीने साफ हो जाएगा कि क्या 2020 SO वास्ताव में किसी रॉकेट का हिस्सा है भी या नहीं. क्योंकि  तब तक हम उस इसकी गति पर सूर्य के प्रकाश का प्रभाव देख पाएंगे. यदि यह वास्तव में रॉकेट का हिस्सा हुआ तो इसका घनत्व किसी क्षुद्रग्रह से काफी कम होगा और सूर्य के प्रकाश का कारण जरा सा भी दबाव इसकी गति में पर्याप्त बदलाव कर देगा जो हम देख सकेंगे.” डॉ चोडास ने कहा.

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लंबे समय से खोए हुए रॉकेट के हिस्सों के लिए यह बहुत ही कम स्थिति होती है कि वे सूर्य की कक्षा छोड़ कर पृथ्वी की कक्षा में आ जाएं. यह केवल दूसरी बार होगा कि रॉकेट का हिस्सा किसी कक्षा में आया है. इससे पहले साल 2002 में जब अपोलो 12 के सैटर्न V के ऊपरी हिस्से के साथ ऐसा हुआ था.
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