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Ayodhya Case Verdict: कौन था वो शख्स, जिसने बनवाई थी बाबरी मस्जिद

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 12:08 PM IST
Ayodhya Case Verdict: कौन था वो शख्स, जिसने बनवाई थी बाबरी मस्जिद
इस शख्स ने कराया था बाबरी मस्जिद का निर्माण

ताशकंद के इस कमांडर को उसकी क्रूरता के साथ-साथ वास्तुकला में उसकी परख के लिए भी जाना जाता है. माना जाता है कि इसी ने अपने शासक बाबर को अमर बनाने के लिए उसके नाम पर बाबरी मस्जिद बनवाई.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 12:08 PM IST
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अयोध्‍या (Ayodhya) के राम जन्‍‍‍‍‍‍‍मभूमि (Ram janmbhoomi) और बाबरी मस्जिद (Babri masjid) जमीन विवाद मामले में (Ayodhya Land Dispute case) में आज (9 नवंबर) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  का फैसला आ गया. कोर्ट के फैसले के अनुसार विवादित जमीन रामलला को दी जाएगी. दशकों से चले आ रहे अयोध्या मामले के दौरान बार-बार एक नाम दोहराया जा रहा था- मीर बाकी (Mir Baqi). ये वही शख्स है जिसने बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था. मुगल बादशाह बाबर के इस सेनापति को बाबरनामा में बाकी ताशकंद के नाम से भी जाना जाता है.

मीर बाकी को मीर के नाम से कम जाना गया, बल्कि उसके जानने वालों ने उसके अनेकों नाम रखे. इनमें बाकी शाघावाल, बाकी बेग और बाकी मिंगबाशी हैं. इतिहास के जानकारों के अनुसार अंग्रेजों ने 1813-14 में बाकी के आगे मीर शब्द लगाया, जिसका अर्थ फारसी में राजकुमार होता है. माना जाता है कि उसे मीर नाम ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सर्वेयर फ्रांसिस बुकानन ने दिया जो सबसे ज्यादा प्रचलित हुआ. फ्रांसिस ने मीर बाकी को ये नाम उसके वीरताभरे कामों के उल्लेख से प्रभावित होकर दिया जो बाबर के शासनकाल के दौरान उसने किए थे.

अयोध्या विवाद (Ayodhya Land Dispute) वर्षों पुराना है (प्रतीकात्मक फोटो)


साल 1526 में बाबर भारत आया और बढ़ते-बढ़ते उसका शासन अवध (अब अयोध्या) तक फैल गया. इसी दौर में मीर बाकी बाबर के कुछ सबसे विश्वसनीय सेनापतियों में शुमार था. मीर मूल रूप से ताशकंद का रहने वाला था. ये ताशकंद अब उजबेकिस्तान का एक शहर है. बाबर का प्रिय होने की वजह से मीर को अवध का कमांडर बनाया गया, यानी वही इस शहर का कर्ता-धर्ता बन गया.

इससे ठीक पहले मीर को लाहौर के पास बल्ख (अब अफगानिस्तान) में हुए विद्रोह को काबू करने की जिम्मेदारी मिली. जीतकर लौटने पर बाबर ने इनाम में मीर को लगभग 7 हजार सैनिकों का कमांडर बनाया और अवध पर शासन दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या मामले (Ayodhya Case) में अपना फैसला सुनाया.


ताशकंद के इस कमांडर को उसकी क्रूरता के साथ-साथ वास्तुकला में उसकी परख के लिए भी जाना जाता है. बाबर के नाम पर बनवाई गई बाबरी मस्जिद इतनी भव्य और खूबसूरत थी कि इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे. उस दौर में ये उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी मस्जिद हुआ करती थी और अनेकों जगहों पर उल्लेख मिलता है कि इसे 1940 के दशक में मस्जिद-ए-जन्मस्थान भी कहा गया. हालांकि किसी भी ओपन सोर्स में कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिलता कि इसका निर्माण मंदिर को तोड़कर हुआ.
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विवादित ढांचे पर ढेरों विवाद और अलग-अलग तथ्य हैं. साल 1672 तक मीर या बाबर का कोई उल्लेख नहीं मिलता. साल 1574 में तुलसीदास रचित रामचरित मानस और बाद की आईन-ए-अकबरी में बाबरी मस्जिद का कोई उल्लेख नहीं मिलता. दूसरी ओर मस्जिद के ही होने को मानने वाला धड़ा यहां पर बाबरी मस्जिद से पहले किसी भी मंदिर के होने को पूरी तरह से खारिज करता है. विवादित जमीन पर साल 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को कुछ अवशेष मिले जो मंदिरों से मिलते-जुलते थे. इसके बाद यहां पर मंदिर होने की हिंदू संगठनों की बात को और बल मिला.

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First published: November 9, 2019, 11:38 AM IST
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