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आखिर किस चमत्कार की वजह से देवसाहयम पिल्लई को मिलेगी ईसाई संत की उपाधि?

आखिर किस चमत्कार की वजह से देवसाहयम पिल्लई को मिलेगी ईसाई संत की उपाधि?

अगले साल 15 मई को पोप पिल्लई को संत घोषित करेंगे.

अगले साल 15 मई को पोप पिल्लई को संत घोषित करेंगे.

Miracles Of Devasahayam: ईसाई धर्म में चमत्कार का विशेष महत्व होता है. तभी को 18वीं सदी में हिंदी धर्म त्यागकर ईसाई बनने वाले एक आम भारतीय नागरिक को संत की उपाधि की जा रही है. उस भारतीय नागरिक का नाम है देवसहायम पिल्लई. वेटिकन में कांग्रिगेशन फॉर द कॉजेज ऑफ सेंट्स ने इसकी घोषणा की है. ईसाई बनने के बाद पिल्लई ने अपना नाम लेजारूस रख लिया था. लेजारूस का मतलब होता है देवसहायम यानी देवों की सहायता.

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    Miracles Of Devasahayam: पिल्लई ने ही 1745 में ईसाई धर्म अपना लिया था. उनका जन्म केरल के ब्राह्मण परिवार में हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने हिंदू धर्म में जाति प्रथा का विरोध किया और कहा कि हर एक इंसान बराबर है. इस कारण उनका हिंदू धर्म के कथित उच्च वर्ग में खूब विरोध हुआ और 1749 में उनको गिरफ्तार कर लिया गया. 14 जनवरी 1752 को उनको मार दिया गया. उनकी मौत के बाद उन्हें उनके चाहने वाले शहीद बताने लगे.

    क्या हुआ था चमत्कार
    वेटिकन न्यूज के मुताबिक पिल्लई भारत के पहले नागरिक हैं जिन्हें कैथोलिक संत की उपाधि दी जाएगी. ऐसा कहा जाता है कि पिल्लई को तत्कालीन त्रावनकोर के राज में मारा गया लेकिन हिंदू धर्म के लोग इसका विरोध करते हैं. उनका कहना है कि त्रावनकोर राज में ऐसी हत्या की कोई परंपरा नहीं रही है. खैर हम पिल्लई के चमत्कार की बात कर रहे हैं. दरअसल, ईसाई धर्म के अनुसार कोई व्यक्ति तभी संत घोषित हो सकता है जब उसने कोई चमत्कार किया हो. जहां तक पिल्लई का मामला है तो आधिकारिक वेबसाइट कैथोलिकसैंट्स डॉट इंफो (catholicsaints.info) के मुताबिक उन्होंने एक मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण में जान डाली थी.

    मां के गर्भ में भ्रूण में डाली थी जान!
    catholicsaints.info के मुताबिक पिल्लाई ने एक चमत्कार किया था और उन्होंने एक मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण में जान डाली थी. दरअसल, बात 2013 की है. एक महिला के गर्भ में 24 सप्ताह का एक गर्भ था. उनसे अचानक मां के गर्भ में हरकत करना बंद कर दिया. उसका दिल धड़कना भी बंद हो गया. वह महिला एक कैथोलिक थी और वह लेजारूस (पिल्लई) की उपासक थी. वह भ्रूण के हरकत नहीं करने से डर गई और लेजारूस की प्रार्थना करने लगी. एक घंटे के भीतर ही महिला को अनुभव हुआ कि उसे पेट में उसके बच्चे ने हरकत की है. इसके बाद उसका परीक्षण किया गया तो उसके दिल की धड़कन की समान्य चल रही थी. बाद में इस बच्चे का जन्म बिना किसी परेशानी के हुआ. इसी घटना को चमत्कार माना गया है. इसके अलावा इस वेबसाइट पर इस घटना के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है.

    दरअसल, चमत्कार एक ऐसी चीज होती है जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता है. चमत्कार को न तो साबित किया जा सकता है और न ही इंसान के नियंत्रण में होता है. इसी कारण इसे सभी धर्मों में ईश्वर से जोड़ा जाता है. ईश्वर एक ऐसी चीज है जिसे आज तक प्रमाणित नहीं किया जा सका है, लेकिन इसे खारिज भी नहीं किया जा सकता है.

    ईसाई धर्म में संत बनने के लिए चमत्कार क्यों जरूरी है?
    यही सबसे बड़ा सवाल है. दरअसल, पिल्लाई की मौत के करीब 260 साल बाद उनके एक भक्त के साथ चमत्कार हुआ और इस कारण उन्हें संत की उपाधि दी जा रही है. दरअसल, आस्था के सवाल का जवाब आप तर्क से नहीं खोज सकते है. किसी व्यक्ति को संत की उपाधि देने के लिए चमत्कार की बात काफी पुरानी है. उस वक्त तक आधुनिक विज्ञान का जन्म तक नहीं हुआ था. उस समय धारणा थी कि इंसान का जीवन किसी दूसरी दुनिया के प्रभाव से संचालित होता है.

    अगले साल 15 मई को दी जाएगी उपाधि
    वेटिकन के अधिकारियों के मुताबिक पोप फ्रांसिस अगले साल 15 मई को वेटिकन के सेंट पीटर्स बेसिलिका में पिल्लई को छह अन्य लोगों के साथ संत की उपाधि देंगे. इसके साथ ही वह पहले एक आम भारतीय होंगे जिन्हें ईसाई धर्म में संत की उपाधि दी जाएगी.

    मदर टेरेसा को 2016 में घोषित किया गया था संत
    नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता मदर टेरेसा को ईसाई धर्म में 2016 में संत की उपाधि दी गई थी. उनको संत घोषित किए जाने का दुनिया के लाखों लोग गवाह बने थे. मदर टेरेसा का 1997 में निधन हो गया था. हालांकि उन्होंने जो चमत्कार किया था उसको लेकर दुनिया में विवाद भी हुआ था.

    Tags: Devasahyam Pillai, Head of the Catholic Church, Pope Francis

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