Mission Paani: इस तरीके से बचा सकते हैं बारिश का पानी

बारिश का पानी जहां भी आसानी से ज्यादा से ज्यादा जमा हो पाता है, ये तकनीक वहीं अपनाई जानी चाहिए.

News18Hindi
Updated: August 27, 2019, 12:23 PM IST
Mission Paani: इस तरीके से बचा सकते हैं बारिश का पानी
बारिश के पानी को कुछ खास तरीकों से इकट्ठा करने की प्रक्रिया को रेनवॉटर हार्वेस्टिंग कहते हैं (प्रतीकात्मक फोटो)
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Updated: August 27, 2019, 12:23 PM IST
बारिश से देश के बहुतेरों हिस्सों में बाढ़ आई हुई है लेकिन मौसम बीतते ही यही हिस्से दोबारा पानी की किल्लत से परेशान होते नजर आएंगे. जलसंकट (acute water shortage) से पूरा देश परेशान है. ऐसे में पानी बचाने के लिए बारिश का मौसम मुफीद है. रेनवॉटर हार्वेस्टिंग (rain water harvesting) ऐसी ही एक तकनीक है. जानिए, कैसे कर सकते हैं रेनवॉटर हार्वेस्टिंग.

क्या है रेनवॉटर हार्वेस्टिंग
बारिश के पानी को कुछ खास तरीकों से इकट्ठा करने की प्रक्रिया को रेनवॉटर हार्वेस्टिंग कहते हैं. इसकी मदद से जमीन के भीतर के पानी का स्तर बढ़ जाता है. ये तकनीक पूरी दुनिया में अपनाई जा रही है. ये प्रणाली उन सारी जगहों पर इस्तेमाल हो सकती है, जहां हर साल न्यूनतम 200 मिलीमीटर बारिश होती है.

इसलिए है जरूरी

ग्राउंड वॉटर के लगातार इस्तेमाल से इसका स्तर घटता चला जा रहा है. इससे पेयजल की किल्लत हो रही है. बारिश का पानी बहकर बर्बाद हो जाता है. उसे बचाकर इस्तेमाल करें तो शहरों में पानी की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है. हार्वेस्टिंग से बचे पानी का इस्तेमाल पशुओं के पीने के लिए, बागवानी में, साफ-सफाई या सिंचाई में हो सकता है. गाड़ियां भी धोई जा सकती हैं.

कई शहरों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाए जाने की बात हो रही है (प्रतीकात्मक फोटो)


कैसे करें हार्वेस्टिंग
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बारिश का पानी जहां भी आसानी से ज्यादा से ज्यादा जमा हो पाता है, ये तकनीक वहीं अपनाई जानी चाहिए. आमतौर पर घरों या दफ्तरों की छत पर हार्वेस्टिंग होती है. इसके तहत दो तरह के गड्ढे बनाए जाते हैं. एक में रोजाना के इस्तेमाल के लिए पानी जमा होता है, वहीं दूसरे में सिंचाई या पशुओं को पिलाने के लिए पानी रखा जाता है. रोजमर्रा के लिए बने गड्ढे को पक्का बनाते हैं, जबकि दूसरा गड्ढा कच्चा रखा जाता है. उन दोनों को ही नालियों और पाइपों के जरिए छत की नालियों और टोंटी से जोड़ा जाता है ताकि बारिश का पानी सीधे इन दोनों गड्ढों में पहुंच सके.

हो सकता है जरूरी
पिट यानी गड्ढे खुदवाने के बाद उसमें नीचे की ओर फिल्टर मीडिया लगवाया जाता है. यह ईंट, चारकोल या एक्टिवेटिड कार्बन और बालू यानी रेत से मिलकर बनता है. कई शहरों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाए जाने की बात हो रही है, खासकर अगर आपका घर 100 स्क्वैयर फीट या उससे बड़े एरिया में बने.

हालांकि घरेलू मकसद से इस तकनीक को अपनाने के कई तरीके हैं, जैसे:

स्टोरेज- इसके तहत बारिश का पानी सीधे जमा करते हैं. इसके लिए रेनी फिल्टर लगाता जाता है ताकि पानी का बेसिक हाइजीन बना रहे. जिस जगहों पर ग्राउंडवॉटर यानी भूमिगत जल खारा होता है, वहां ये तरीका ज्यादा अपनाते हैं. ये पानी बगीचे, कूलर या साफ-सफाई के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें 5 से 7 हजार रुपयों का खर्च आता है.

घरेलू मकसद से इस तकनीक को अपनाने के कई तरीके हैं (प्रतीकात्मक फोटो)


रिचार्ज- जिन इलाकों में भूमिगत जल मीठा होता है, वहां हार्वेस्टिंग के लिए रिचार्ज का तरीका अपना सकते हैं. इसके तहत रेनवॉटर हार्वेस्टिंग फिल्टर के जरिए बारिश के पानी को सीधे गड्ढे तक पहुंचाते हैं. इससे साफ पानी का स्तर बढ़ता है. छत के आकार के हिसाब से फिल्टर की कीमत अलग-अलग होती है. जो 3000 से लेकर 10000 तक भी हो सकती है.

घर भी कर सकते हैं
थोड़ी जानकारी ले लें तो आप खुद भी रेनवॉटर हार्वेस्टिंग के लिए गड्ढे तैयार कर सकते हैं, हालांकि फिल्टर और बेसिक चीजें खरीदनी होंगी. फिल्टर की जगह जूट मैट भी आजमा सकते हैं जो मल्टीपल लेयर्स में हो. ये बाजार में ऑर्डर देकर तैयार करवाई जा सकती है. खुद से सिस्टम तैयार करने की लागत लगभग 30000 रुपए बैठ सकती है, जो छत के आकार पर निर्भर करती है.

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First published: August 27, 2019, 11:25 AM IST
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