जानिए क्यों 2021 के अंतरिक्ष अभियानों का मंगल पर होगा ज्यादा ध्यान

मंगल ग्रह (Mars) पर इस साल तीन देशों के अभियान पहुंचेंगे. ( फाइल फोटो)

मंगल ग्रह (Mars) पर इस साल तीन देशों के अभियान पहुंचेंगे. ( फाइल फोटो)

इस साल तीन देशों के अभियान मंगल ग्रह (Mars) पर पहुंचेगे ऐसे में साल 2021 में अंतरिक्ष अभियान (Space Missions) मंगल केंद्रित ही रहेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 7, 2021, 6:39 AM IST
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वैज्ञानिकों के साथ ही बहुत सारे लोगों का मानना है कि साल 2021 भी अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) के लिए काफी उपलब्धियों भरा रहने वाला है. साल 2020 में अंतरिक्ष उपलब्धियों का दौर इस साल भी जारी रहेगा. वैसे तो इस साल बहुत सारे काम होने हैं, लेकिन फिर भी ज्यादा ध्यान मंगल (Mars) पर केंद्रित रहेगा. इसमें अमेरिका (US) का नासा (NASA), चीन (China) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)  तीनों अपने मंगल अभियान पर ज्यादा जोर देंगे. ये अभियान इस साल के कुछ बड़ी गतिविधियों तक पर हावी रह सकते हैं.

तीन अभियानों में अंतर

इस समय नासा, चीन और यूएई तीनों के अभियान मंगल की ओर जा रहे हैं. इसमें नासा का पर्सिवियरेंस रोवर, चीन का तियानवान 1 और यूएई का होप प्रोब शामिल हैं. ये तीनों जल्दी ही मंगल पर पहुंचेंगे.  जहां नासा का रोवर मंगल पर उतेरगा, यूएई की प्रोब मंगल का चक्कर लगाते हुए उसका अवलोकन करेगा. लेकिन चीन के अभियान में एक प्रोब, एक लैंडर और एक रोवर शामिल हैं. यह किसी देश का इस तरह का पहला अभियान है.

मंगल पर कायम रहेगा फोकस
इन तीनों अभियानों के अगले महीने ही काम शुरू करने की उम्मीद है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मंगल पर फोकस यहीं खत्म खत्म हो जाएगा. जहां चीन और यूएई के ये मंगल के पहले अभियान हैं. वहीं नासा का यह पहला मंगल रोवर नहीं है, फिर भी इस रोवर के जरिए नासा मंगल पर इंसान भेजने संबंधी प्रयोग करेगा. इसलिए इस पर वहां पहुंचने के बाद भी सभी की निगाहें बराबर लगी होंगी.

चीन का अलग है अभियान

चीन का अभियान बाकी दो अभियानों से अलग है. उसका अंतरिक्ष यान मंगल के यूटोपिया इलाके में उतरेगा. लेकिन उससे पहले उसका प्रोप कुछ महीने मंगल का चक्कर लगाएगा. इसलिए मंगल पर चीन की लैंडिंग साल के अंत में हो सकती है. चीन अमेरिका के बाद दूसरा ऐसा देश होगा जो मंगल पर सॉफ्ट लैंडिंग करने का प्रयास करेगा.



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चीन (China) ने अपना महत्वाकांक्षी तियानवेन-1 (Tianwen-1) मिशन 23 जुलाई 2020 को प्रक्षेपित कर दिया था. यह अपने तरह का अनोखा और दुनिया का एकमात्र मिशन है जिसमें ऑर्बिटर, रोवर और लैंडर तीनों एक साथ भेजे गए हैं.


चीन के शोध पर निगाहें

चीन का मंगल अभियान मंगल की मिट्टी, वहां की भूगर्भीय संरचना, वातावरण, वायुमंडल, और पानी के संकेतों की खोज करेगा. चीन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने पिछले साल नेचर जर्नल में प्रकाशित लेख में बताया था कि अगर अभियान सफल होता है तो बहुत अहम तकनीकी उपलब्धियां हासिल होंगी. इसी बीच नासा के पर्सिवियरेंस रोवर और उसके पिछले शोध की तुलना भी चीन के शोधों से होगी.

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यूएई का होप प्रोब

यूएई का होप प्रोब भी अगले महीने ही मंगल की कक्षा में उसकी सतह से एक हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर प्रवेश करेगा. वहीं रह कर दो साल तक यानि मंगल के एक साल तक उसके वायुमंडल और मौसम का अध्ययन करेगा. मंगल का एक साल पृथ्वी के 687 दिन के बराबर है. यह अभियान यूएई ने नासा और जाक्सा के सहयोग से भेजा है.

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पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance Rover) मंगल (Mars) पर मानव अभियानों के लिए कुछ खास प्रयोग करेगा. . (तस्वीर: NASA JPL)


नासा पर्सिवियरेंस है खास

नासा के पर्सिवियरेंस रोवर पर लोगों की सबसे ज्यादा निगाहें लोगों में इसके मंगल पर उतरने का उतना कौतूहल नहीं होगा क्योंकि नासा के बहुत से रोवर मंगल पर उतर चुके हैं, लेकिन यह रोवर पिछले रोवर से अपने आप में बहुत खास है. यह मंगल की मिट्टी को पृथ्वी पर लाने के लिए जमा करेगा. इस अभियान की तैयारी भी नासा और यूरोपीय स्पेस एंजेंसी शुरू कर चुके हैं. इसके अलावा यह रोवर मंगल पर ऑक्सीजन का निर्माण का भी प्रयोग करेगा.

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तो फिर चंद्रमा

पिछले साल चंद्रमा पर नासा ने लोगों का काफी ध्यान खींचा. नासा चंद्रमा पर साल 2024 तक एक महिला और एक पुरुष को उतारने के लिए आर्टिमिस अभियान पर जोरों काम कर रहा है. उसका ओरियन यान का परीक्षण भी इसी साल होगा. फिर भी इसके नतीजे अंतिम नहीं होंगे इसलिए चंद्रमा के लिए नासा पर लोग उतना ध्यान न दें बल्कि उन्हें पर्सिवियरेंस के प्रयोगों के नतीजों का इंतजार होगा.
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