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पाकिस्तान में कभी 'मुसलमान बनकर' रहे डोभाल ऐसे बने मोदी के राइट हैंड!

अजीत डोभाल. फाइल फोटो.

अजीत डोभाल. फाइल फोटो.

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है. जानिए, राष्ट्रीय सुरक्षा में बेंचमार्क स्थापित करने वाले डोभाल ने कैसे अंजाम दिए सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक जैसे कई अहम मिशन.

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    पाकिस्तान में रहने के दौरान एक दिन जब वो सिर पर मुसलमानों की पहचान समझी जाने वाली टोपी और पारंपरिक इस्लामी पोशाक पहने हुए एक मस्जिद से बाहर निकला, तो एक लंबी सफेद दाढ़ी वाला आदमी उसे घूर रहा था. दोनों की नज़रें मिलीं तो दाढ़ी वाले ने उसे अपने पास इशारे से बुलाया. दाढ़ी वाला कुछ बात करना चाहता था, ये सोचकर वो उसके पास गया.

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    'तुम हिंदू हो!' दाढ़ी वाले ने जैसे ही ये बात कही, तो उसने बगैर घबराए या कोई भी हिचक ज़ाहिर किए नज़रें मिलाकर कहा, 'नहीं, मैं मुसलमान हूं'. फिर दाढ़ी वाले ने उसे कुछ दूर साथ चलने को कहा. वो दाढ़ी वाले के साथ चार पांच गलियों से गुज़रते हुए एक छोटे से कमरे में पहुंचा. इस कमरे में पहुंचते ही दाढ़ी वाले ने इस बार कहा, 'मुझे पता है कि तुम हिंदू हो'. उसने फिर इनकार किया.

    अब उस दाढ़ी वाले ने राज़ खोलते हुए कहा, 'क्योंकि तुम्हारा एक कान छिदा हुआ है. हिंदू कान छिदवाते हैं, मुसलमान नहीं, समझे'. तब उसने साफ कहा, 'हां, मैं एक हिंदू परिवार में पैदा हुआ था, लेकिन मैं इस्लाम कबूल कर चुका हूं. लेकिन, आप चाहते क्या हैं?' फिर उस दाढ़ी वाले ने उसे मशवरा दिया कि वो अपने छिदे हुए कान को प्लास्टिक सर्जरी से भरवाकर नॉर्मल कर ले.

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    'आखिर आप हैं कौन? और आपको इसकी इतनी फिक्र क्यों है?' जब उसने उस दाढ़ी वाले से शिद्दत से ये पूछा तो दाढ़ी वाले ने उस कमरे में रखी एक छोटी सी अलमारी खोली और उसे भीतर रखी कोई चीज़ देखने को कहा. उसने देखा कि अलमारी के एक खाने में शिवाजी और मां दुर्गा की छोटी प्रतिमाएं रखी थीं. 'मैं भी हिंदू हूं, लेकिन इस मुल्क में मुसलमान बनकर रह रहा हूं. अब तुम समझे कि मैं तुमसे ये सब क्यों कह रहा हूं!'

    वो दाढ़ी वाला कौन था, इसका ठीक खुलासा नहीं है लेकिन उसके साथ इस दूसरे शख़्स का नाम था अजीत डोभाल. 90 के दशक में पाकिस्तान में सात सालों तक भारतीय हाई कमीशन के तौर पर सेवाएं दे चुके डोभाल ने पाकिस्तान में ही अंडरकवर एजेंट के तौर पर भी काम किया. ये किस्सा खुद डोभाल के हवाले से मीडिया में साझा होता रहा है और ऐसे ही किस्सों के चलते पाक मीडिया डोभाल को भारत का जेम्स बॉंड कहता रहा.

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    नरेंद्र मोदी के साथ अजीत डोभाल. फाइल फोटो.


    भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में लंबे योगदान के चलते डोभाल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने का ऐलान हाल में बनी नरेंद्र मोदी सरकार ने कर दिया है. डोभाल ने क्या योगदान दिया है? मोदी के विश्वासपात्रों में डोभाल कैसे शामिल हुए और उन्होंने कौन कौन से कारनामे किए हैं? ये है पूरी कहानी.

    पुलिस सेवा, फिर नॉर्थ ईस्ट से कश्मीर तक का सफर
    उत्तराखंड में 1945 में जन्मे डोभाल ने 1968 में आईपीएस के तौर पर पुलिस सेवा में पदार्पण किया था. नॉर्थ ईस्ट, खासकर मिज़ोरम में विद्रोहियों के खिलाफ सरकार के अभियान में उन्होंने खास भूमिका निभाई थी. इसी तरह पंजाब में भी विद्रोह को दबाने में डोभाल का रोल रहा. इसके बाद डोभाल इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख बने तो उन्होंने आईबी में भी मल्टी एजेंसी सेंटर की स्थापना की और फिर इंटेलिजेंस में पहली बार जॉइंट टास्क फोर्स बनाई.

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे एम के नारायणन से ट्रेनिंग लेने वाले डोभाल ने कुछ समय तक आतंकवाद निरोधी अभियानों के लिए काम किया. रोमानिया के कूटनीतिक लिवियू राडू को छुड़ाने के मिशन में डोभाल पंजाब में थे. 1988 के ऑपरेशन ब्लैक थंडर से महत्वपूर्ण जानकारियां निकालने के लिए वो अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के भीतर भी रहे थे.

    फिर पाकिस्तान में सात सालों तक भारतीय उच्चायोग और अंडरकवर एजेंट के तौर पर डोभाल ने कारनामे किए. कहा जाता है कि वो इस दौरान पाकिस्तान में छुपे हुए मिशन्स को अंजाम देने के लिए मुसलमान के भेस में रहा करते थे. डोभाल को 1990 में कश्मीर में कूका पारे जैसे आतंकियों को राज़ी करने और फिर भारत विरोधी आतंकियों का सफाया करने के मिशन में शामिल रहे. इन प्रयासों के बाद ही 1996 में जम्मू व कश्मीर में चुनाव होना संभव हो सका था.

    रिटायर नहीं रोक सका सुरक्षा का जज़्बा
    डोभाल जनवरी 2005 में इंटेलिजेंस ब्यूरो प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे लेकिन वो राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर हमेशा जागरूक एवं सक्रिय बने रहे. उन्होंने जन नीतियों के एक थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशल फाउंडेशन बनाया था. कई अखबारों में लिखते रहे और देश व दुनिया में सुरक्षा के मुद्दों पर व्याख्यान देते रहे. 2009 और 2011 में उन्होंने 'सीक्रेट बैंकों और टैक्स के स्वर्गों में जमा भारत का काला धन' विषय पर दो बड़े लेख संयुक्त रूप से लिखे थे.

    लेकिन, ये अचानक नहीं था क्योंकि इस वक्त तक वो भाजपा की टास्क फोर्स के लीडर के तौर पर जुड़ चुके थे. अपनी काबलियत से नीतिगत और थिंक टैंक के तौर पर योजनाएं देने वाले डोभाल को भाजपा ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का ज़िम्मा सौंपा, जैसे ही 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी.

    सर्जिकल स्ट्राइक से एयर स्ट्राइक तक
    पाकिस्तान के संबंध में भारत की सुरक्षा नीतियों को सैद्धांतिक तौर पर 'डिफेंसिव' मोड से 'आक्रामक' मोड में शिफ्ट करने का श्रेय डोभाल को जाता रहा है. ये भी कहा जाता है कि सितंबर 2016 में पाकिस्तान के भीतर की गई भारत की सर्जिकल स्ट्राइक डोभाल के ही दिमाग की उपज थी, जो भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी का कदम माना गया.

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    प्रतीकात्मक तस्वीर


    इस कदम के बाद विदेश सचिव एस जयशंकर को मोदी का बायां हाथ कहा जाता था तो डोभाल को मोदी सरकार के दाहिने हाथ के तौर पर देखा जाने लगा था. जयशंकर और चीन में राजदूत विजय केशव गोखले के साथ ही डोभाल को भी डोकलाम के मुद्दे को कूटनीतिक ढंग से सुलझाने का श्रेय दिया जाता है.

    इन्हीं उपलब्धियों के चलते 2018 में, उन्हें स्ट्रैटजिक पॉलिसी ग्रुप यानी एसपीजी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था. इसके बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक डोभाल के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ है. मीडिया के खबरों के अनुसार डोभाल इस एयरस्ट्राइक के पीछे प्रमुख व्यक्ति थे और साथ ही, उन्होंने भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तान के कब्ज़े से जल्द छुड़वाने के लिए भी पूरी बिसात बिछाई थी.

    और भी हैं डोभाल के किस्से
    जून 2014 में अजीत डोभाल ने कूटनीतिक और जासूसी ढंग से इराक से 46 भारतीय नर्सों को सुरक्षित भारत लाने का मिशन बखूबी अंजाम दिया था. इन नर्सों को इराक के तिरकित में एक आतंकी संगठन ने अपने जाल में फंसा लिया था, लेकिन डोभाल की कोशिशों के चलते करीब एक महीने बाद इन्हें महफूज़ भारत लाने में कामयाबी मिली थी.

    इसके साथ ही, डोभाल ने आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सोहाग के साथ मिलकर क्रॉस बॉर्डर सैन्य अभियान को भी अंजाम दिया था. म्यांमार से नागालैंड में आतंकी गतिविधियां चलाने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ इस मिशन की कामयाबी इस तरह बताई गई कि 50 आतंकी मारे गए.

    और आखिरकार, ये भी एक दिलचस्प फैक्ट है कि 1971-1999 के बीच हवाई जहाज़ हाईजैकिंग की 15 घटनाओं में भारत के सुरक्षा बलों में मुख्य भूमिका निभाने का अनुभव भी डोभाल के पास रहा.

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