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दिमाग के महीन संकेतों को लगातार कम्प्यूटर को बताएगा टैटू, यह करेगा कमाल

टैटू फैशन का ही नहीं अब तकनीक का भी हिस्सा हो रहा है.

टैटू फैशन का ही नहीं अब तकनीक का भी हिस्सा हो रहा है.

वैज्ञानिकों ने एक खास टैटू इलेक्ट्रोड (tattoo electrodes) बनाया है जो दिमाग के संकेत पढ़कर कम्प्यूटर तक पहुंचा सकता है.

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नई दिल्ली: चिकित्सा की दुनिया में लोगों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी का कारण होता है महंगी जांचें. इनके उपकरण ही इतने महंगे होते हैं कि कई बीमारियों का इलाज तो आम आदमी के बस के बाहर ही हो जाता है. शोधकर्ताओं ने एक खास टैटू इलेक्ट्रोड (Tattoo Electrode)  विकसित किया है जो दिमाग के संकेत आसानी से पढ़ सकता है. इससे EEG और MEG तकनीक वाले परीक्षणों में बहुत मदद मिल सकती है.

कैसे काम करता है यह टैटू
फ्रांसेसको ग्रेसो ने इटली के वैज्ञानिकों के साथ ये नया टैटू इलेक्ट्रोड (Tattoo Electrode) विकसित किया है. ये कंडक्टिव पॉलीमर्स (Conductive polymers) हैं जिन्हे इंकजेट प्रिंटर में मानक टैटू पेपर पर प्रिंट किया जाता है. इसके बाद इसे त्वचा पर चिपकाया जाता है जिसके बाद इनसे हमारे दिन और मांसपेशियों की गतिविधि को नापी जा सकती है.  ग्रेसो ग्राज यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के लैबोरेटरी ऑफ एप्लाइड मटेरियल्स फॉर प्रिंटेड एंड सॉफ्ट इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख हैं

यहां काम आता है यह इलेक्ट्रोड
इस तरह के इलेक्ट्रोड को हाल ही में फिर से उन्नत किया गया है. इसे इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी (electrophysiological) के परीक्षणों जैसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी (electrocardiography) यानि ECG और इलेक्ट्रोमायोग्राफी (electromyography) यानि EMG भी निकाला जाता है.

इस तकनीक से EEG और MEG जैसे परीक्षणों में मदद मिलेगी


लेकिन नए टैटू में क्या खास है
इन टैटू में 700 से 800 नैनोमीटर्स की अहम भूमिका होती है जिससे टैटू त्वचा में समान रूप से फैल जाता है और इसका शरीर को पता तक नहीं चलता. ये टैटू जैल इलेक्ट्रोड की बजाए सूखे इलेक्ट्रोड्स होते हैं. ये बिना किसी गीली सतह के काम करते है और सूखकर खत्म नहीं होते हैं.  ये लंबे समय के मापन के लिए बहुत ही बढ़िया होते हैं. यहां तक कि टैटू के क्षेत्र में बाल उगने से भी सिगनल रिकॉर्ड करने के प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं होती.

महीन संकेत भी पढ़ सकता है यह टैटू
ग्रेसो और उनके साथियों ने एक उपलब्धि और हासिल की है. उन्होंने टैटू इलेक्ट्रोड को इस तरह से परीष्कृत किया जिससे वे दिमाग की EEG  (electroencephalography) को भी नाप सकती है. इसके लिए शोधकर्ता दो साल पुरानी तकनीक का ही उपयोग किया. उन्होंने ऐसा कंडक्टिव पॉलीमर की टैटू कागज पर इंकजेट प्रिंटिंग के जरिए किया. इसमें ट्रांसफर पेपर और कंडक्टिव पॉलीमर को और कारगर करते हुए टैटू इलेक्ट्रोड और त्वचा के बीच का संपर्क बेहतर किया गया. इससे EEG संकेतों को पकड़ने की क्षमता बढ़ गई.

तो क्या फायदा हुआ इससे
इस प्रोजेक्ट में एक शोधकर्ता के तौर पर कार्य  करने वाली फ्रांस की लॉरा फेरारी ने बताया कि मस्तिष्क की तरंगे बहुत ही कम फ्रीक्वेंसी पर काम करती है इसके साथ ही EEG  संकेत का एमप्लीट्यूड भी कम होता है. इनको पकड़ पाना EMG  या ECG संकेतों से भी ज्यादा कठिन होता है. वास्तविक क्लीनिकल स्थितियों में परंपरागत EEG इलेक्ट्रोड के मुकाबला इन टैटू का परीक्षण भी उतना ही सफल रहा.

क्या बदलाव ला सकते हैं ये टैटू इलेक्ट्रोड
Taये नए टैटू इलेक्ट्रोड पहले ड्राय इलेक्ट्रोड हैं, जो लंबे समय के लिए  EEG नापने के लिए उपयुक्त हैं और इसी के साथ ही ये MEG यानि मेग्नेटो एनसेफाल्गोग्राफी (magneto-encephalography) के लिए  भी उपयुक्त हैं. अभी तक MEG जैसी मस्तिष्क गतिविधि निगरानी पद्धति के लिए केवल गीले इलेक्ट्रोड का ही उपयोग होता था. ऐसे गीले इलेक्ट्रोड के साथ समस्या यह थी कि ये केवल जेल, या इलेक्ट्रोड पेस्ट के साथ ही कम कर पाते थे, लेकिन जल्दी ही सूख जाने के कारण इनका लंबे समय तक उपयोग नही हो पाता था.

इस तकनीक का अन्य क्षेत्रोंं में भी उपयोग हो सकता है.


MEG के लिए पूरी तरह से हैं उपयुक्त
लेकिन नई पीढ़ी के टैटू इलेक्ट्रोड खास तौर पर कंडक्टिव पॉलीमर का उपयोग करते हैं. यानि इसमें कोई धातु नहीं होती इसलिए ये MEG परीक्षणो में परेशानी पैदा नहीं करते हैं और इंकजेट से खास तौरपर प्रिंट किए जाते हैं.  ग्रेसो का कहना है कि  उनकी पद्धति से एक सटीक MEG के अनुकूल इलेक्ट्रोड बनाया जा सकता है जिससे समय और पैसे की बचत हो सकती है.

इससे आविष्कार से न्यूरोइंजिनियरिंग और ब्रेन कम्प्यूटर इंटरफेस की दुनिया में बहुत बड़ा और कारगर बदलाव आ सकता है.

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