दक्षिण अफ्रीका की वो युवा रानी, जिसे भगवान इंद्र की तरह ताकतवर माना जाता है

समुदाय की होने वाली रानी Masalanabo Modjadji के पास बारिश पर नियंत्रण की शक्ति मानी जाती है

दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में जिम्बाब्वे (Zimbabwe) की सीमा से लगा एक शहर लिंपोपो (Limpopo) बेहद खास है. इसकी वजह है यहां रहती 16 साल की युवती, जिसके पास बारिश कराने और रोकने की ताकत है. इस युवती को Rain Queen भी कहा जाता है. 

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    हिंदू माइथोलॉजी में भगवान इंद्र का जिक्र है जो बारिश के देवता माने जाते हैं. इंद्र का जिक्र किताबों में मिलता है, हालांकि हकीकत में उन्हें किसी ने नहीं देखा. वहीं दक्षिण अफ्रीका में Rain Queen का उल्लेख किसी किताब में नहीं. यहां के लिंपोपो प्रांत में एक आदिवासी समुदाय की होने वाली रानी Masalanabo Modjadji के पास बारिश पर नियंत्रण की शक्ति मानी जाती है.

    लिंपोपो अफ्रीका का अकेला ऐसा प्रांत है, जहां रानियों का शासन चलता है. Masalanabo Modjadji साल 2023 में इस प्रांत की सातवीं रानी बनेंगी. प्रांत का पक्का यकीन है कि इन रानियों के पास आसमानी ताकतें हैं, खासकर ये बारिश होने पर कंट्रोल कर पाती हैं. होने वाली रानी Masalanabo अभी 16 साल की हैं और 2023 में जैसे ही वे 18 की होंगी, प्रांत को चलाने का जिम्मा उनके पास आ जाएगा. फिलहाल कम उम्र होने के कारण रानी के भाई Prince Mpapatla अनौपचारिक तौर पर सत्ता संभाल रहे हैं, उन्हें प्रजा रीजेंट पुकारती है.

    लिंपोपो अफ्रीका का अकेला ऐसा प्रांत है, जहां रानियों का शासन चलता है


    रानियों के शासन के पीछे इस प्रांत के आदिवासी समुदाय के पास एक कहानी है. माना जाता है कि आज से 400 साल पहले यहां के आदिवासी जिम्बाब्वे से आए थे. तब पुरुष ही शासन किया करते थे और कुछ भी हासिल करने के लिए आपस में लड़ाइयां करते. इस तरह से काफी कत्लेआम मचा करता था. आखिरी पुरुष राजा के सपने में कोई ईश्वरीय ताकत आई, जिसने उसे स्त्रियों को शासन सौंपने के लिए कहा. इसके बाद राजा की बड़ी बेटी ने राजकाज संभाला. पहली स्त्री शासक को Modjadji कहा गया, जिसका मतलब है शासन करने वाला. मान्यता है कि उस पहली रानी के आते ही प्रांत के हालात सुधरने लगे और लड़ाइयां खत्म हो गईं. यहां तक कि दूसरे प्रांतों के राजा रानी के पास बारिश करवाने की गुजारिश लेकर आने लगे क्योंकि प्रांत के लोगों को यकीन था कि रानी पर बारिश वाले देवता की कृपा है.

    हालांकि इस रानी की जिंदगी आसान नहीं थी. उसे दूसरी महिलाओं से खुद को अलग साबित करना था. इसके लिए उसे तमाम तरह के तंत्र-मंत्र जपने होते. उसने एक बड़ा समय जंगलों में अकेले रहते हुए बिताया, वहीं से वो पुरुष साथियों को प्रजा को चलाने के लिए आदेश देती. उसने शादी भी नहीं की थी, बल्कि अपने ही परिवार के पुरुषों से संबंध बनाकर उनके जरिए बच्चों को जन्म दिया. ये पुरुष रानी के पति या साथी नहीं, बल्कि केवल बच्चों के जन्म का साधन थे और घरेलू कार्यों के अलावा उन्हें बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी. ये ठीक वैसा ही है, जैसा आमतौर पर स्त्रियों के साथ होता आया था.  माना जाता है कि पहली रानी ने 1800 से 1854 तक शासन किया. उसकी मौत के बाद सबसे बड़ी बेटी को शासन मिला. इसी तरह से परंपरा आगे बढ़ती रही.

    केवल 3 ही रानियों के बाद ही इस समुदाय को नस्लभेद का शिकार होना पड़ा


    वैसे अगले दो सालों बाद बनने जा रही रानी Masalanabo Modjadji बहुत खास हैं क्योंकि पूरे 50 साल बाद दोबारा इस प्रांत पर रानियों का शासन होने जा रहा है. इससे पहले केवल 3 ही रानियों के बाद ही इस क्वीन किंगडम को नस्लभेद का शिकार होना पड़ा. उन्हें नाम के ही लिए रानी रहने दिया गया, और सारे अधिकार छीन लिए गए. ये साल 1972 की बात है. हाल ही में साल 2016 में पूर्व प्रेसिडेंट Jacob Zuma ने इस प्रांत को दक्षिण अफ्रीका में ही खास दर्जा दिया और इस बात पर हामी भरी कि वे अपना अलग शासन चला सकते हैं, जो रानी-शासित ही होगा.

    साल 2023 में रानी बनने के बाद Masalanabo के पास 100 गांव होंगे, जिनपर उसका ही शासन होगा. साथ ही अपनी शाही जिंदगी बनाए रखने के लिए उसे सरकारी मदद भी मिलती रहेगी. हालांकि ये अभी तक नहीं देखा जा सका कि क्या इस रानी के पास पहले बनी रानियों की तरह ही बारिश कराने की ताकत है भी या नहीं!

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