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जितना सोचा था, उससे तेजी से दूर जा रहा है शनि का चंद्रमा, क्या बदलेगा इससे

जितना सोचा था, उससे तेजी से दूर जा रहा है शनि का चंद्रमा, क्या बदलेगा इससे

कैसिनी के आंकड़ों के अध्ययन से पता चला है कि टाइटन शनैि से ज्याादा तेजी से दूर जा रहा है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कैसिनी के आंकड़ों के अध्ययन से पता चला है कि टाइटन शनैि से ज्याादा तेजी से दूर जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने पाया है कि शनि (Saturn) का उपग्रह टाइटन (Titan) जितना पहले समझा गया था, उससे कहीं ज्यादा तेज गति से दूर जा रहा है.

नई दिल्ली: अंतरिक्ष में स्थित खगोलपिंडों (Heavenly bodies) के बारे में जानना भी कम रोमांचक नहीं होता. वहां से आने वाली तरंगों (Electromagnetic Waves) के जरिए ही वैज्ञानिक काफी कुछ जानकारी जमा कर चुके हैं, लेकिन इन जानकारियों को भी चुनौती मिलती रहती है.हाल ही में वैज्ञानिकों को शनिग्रह (Saturn) के प्राकृतिक उपग्रह टाइटन (Titan) के बारे में मिली नई जानकारी ने चौंकाया. पता चला है कि यह जितना पहले समझा जा रहा था, उससे कहीं ज्यादा तेजी से अपने ग्रह से दूर जा रहा है.

कितना पीछे जा रहा है टाइटन
खगोलविदों को यह जानकारी नासा के कैसिसनी अंतरिक्ष यान के आंकड़ों  से मिली है. इसके मुताबकि अभी टाइटन शनी ग्रह से 11 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से पीछे जा रहा है, यह देखने में छोटी गति लगती है, लेकिन यह धीरे धीरे शनिग्रह से दूर जा रहा है.  ग्रह सूर्य से दूर जाने के मामले में बहुत धीरे चलते हैं. वहीं कई ग्रहों के चंद्रमा भी अपने ग्रह से दूर जा रहे हैं. इस प्रक्रिया को टाइडल एक्सिलरेशन कहा जाता है.

कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं शोध से
इस अध्ययन के नतीजे नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित हुए हैं. इनसे शनि से संबंधित कई पुराने सवालों के जवाब मिल सकते हैं. अभी तक वैज्ञानिक शनि के बारे में यह तो जानते हैं कि वह 4.6 अरब साल पहल, सौरमंडल के निर्माण के समय ही बना था, लेकिन वे यह नहीं जान सके हैं कि इस ग्रह  में वलय और उसके 80 प्राकृतिक उपग्रह का सिस्टम कैसे और कब बना था.

Planet with ring
पहले आंका गया था कि टाइटन 0.1 सेमी प्रतिवर्ष की दर से शनि से दूर जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


दूर तो पहले से ही जा रहा था टाइटन
टाइटन इस समय शनि ग्रह से  12 लाख किलोमीटर दूर है. इसका शनि से दूर जाना हैरानी का विषय नहीं हैं. लेकिन वैज्ञानिकों को यह उम्मीद से ज्यादा तेजी से दूर जाता दिखाई दे रहा है. करीब 100 गुना ज्यादा. इस नई दर से पता चला है कि जितना पहले समझा गया था टाइटन शनि के उससे ज्यादा पास था. यानि कि पूरा सिस्टम ही जितना सोचा गया था, उससे ज्यादा तेजी से फैला. इससे यह भी साबित हुआ है कि अब तक टाइड एक्सीलरेशन को समझने में कुछ गड़बड़ भी रही थी.

तो फिर कैसे दूर जा रहे हैं उपग्रह
टाइडल एक्सीलरेशन से संबंधित एक और प्रक्रिया है टाइडल फ्रिक्शन, इसे पृथ्वी को देखकर भी समझा जा सकता है. चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण हमारे महासागरों और समुद्रों में ज्वार भाटा की गतिविधि देखने को मिलती है. इस शक्ति के कारण पृथ्वी फूलती है और अपना आकार वापस पा लेती है. लेकिन इस वजह से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से चंद्रमा को हलका धक्का लगता है और उसकी कक्षा की गति बढ़ जाती है. इस अतिरिक्त ऊर्जा से चांद धीरे धीरे हमसे दूर जा रहा है. यह गति 3.82 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष है. ठीक ऐसा ही शनि के टाइटन के साथ भी हो रहा है.

लेकिन इस आंकलन में हो गई गलती
लेकिन वैज्ञानिकों को लगा था कि टाइटन के मामले में यह ज्यादा नहीं होगा. ऐसा उन्होंने इसलिए सोचा कि शनि गैसीय ग्रह है और पृथ्वी पर समुद्र और धरती की वजह ज्यादा घर्षण होगा. लेकिन वे गलत साबित हुए. तब आंकलन किया गया था कि टाइटन शनि  केवल 0.1 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष दूर जा रहा है. लेकिन अब स्पष्ट हुआ है कि यह 11 सेमी प्रति वर्ष की दर से दूर जा रहा है.

Planet
शनि का टाइटन अब 11 सेमी प्रतिवर्ष की दर से शनि से दूर जा रहा है.


कैसिनी के सटीक आंकड़ों ने यह नई जानकारी दी. इस संबंध में दो तकनीकों का उपयोग हुआ. एक है एस्ट्रोमेट्री और दूसरे रेडियोमेट्री.  इन दो तकनीकों ने कैसिनी के आंकड़ों से टाइटन के दूर होने की सही गति की पुष्टि की.

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Tags: Research, Science, Space

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