क्या केरल में मुसलमानों का पहला जिहाद था मोपला विद्रोह

केरल (Kerala) के मालाबार (malabar) इलाके में हुए मोपला विद्रोह (Moplah rebellion) की चर्चा होती रहती है. इस विद्रोह को केरल में हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों का पहला जिहाद बताया जाता है. लेकिन क्या सच में ऐसा है...

News18Hindi
Updated: August 20, 2019, 12:03 PM IST
क्या केरल में मुसलमानों का पहला जिहाद था मोपला विद्रोह
मोपला विद्रोह में हजारों लोग मारे गए थे
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Updated: August 20, 2019, 12:03 PM IST
20 अगस्त 1921 का दिन केरल (Kerala) के इतिहास में काले दिन के तौर पर दर्ज है. इसी दिन केरल के मालाबार (malabar) इलाके में मोपला विद्रोह (Moplah rebellion) की शुरुआत हुई थी. अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुआ मोपला विद्रोह ने बाद में सांप्रदायिक रंग ले लिया. कहा जाता है कि विद्रोह के दौरान मालाबार इलाके के मोपला मुसलमानों ने हजारों हिंदुओं की हत्या कर दी थी. हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार हुए. हजारों हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कर उन्हें मुसलमान बना दिया गया.

केरल में मोपला विद्रोह की चर्चा आज तक होती है. खासकर दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग इस विद्रोह को लेकर केरल के वामपंथियों को अपने निशाने पर लेते रहे हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी मोपला विद्रोह को याद करके वामपंथियों पर हमले हुए थे. केरल के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने मोपला विद्रोह को केरल में हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों का पहला जिहाद बताया था. उनके बयान ने खासी सुर्खियां बटोरी थीं.

खिलाफत आंदोलन के साथ भड़का था मोपला विद्रोह

केरल के मालाबार इलाके में हुआ मोपला विद्रोह खिलाफत आंदोलन के साथ भड़का था. दरअसल प्रथम विश्वयुद्ध में तुर्की की हार हुई थी. इसके बाद अंग्रेजों ने वहां के खलीफा को गद्दी से हटा दिया था. अंग्रेजों की इस कार्रवाई से दुनियाभर के मुसलमान नाराज हो गए. तुर्की के सुल्तान की गद्दी वापस दिलाने के लिए ही खिलाफत आंदोलन की शुरुआत हुई.

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल मुस्लिम नेताओं अबुल कलाम आजाद, जफर अली खां और मोहम्मद अली जैसे नेताओं ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया. इस आंदोलन को बापू का भी समर्थन प्राप्त था. महात्मा गांधी इस आंदोलन के जरिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में हिंदू और मुसलमानों को एकसाथ लाने की कोशिश कर रहे थे.

moplah vidroh history of malabar rebellion in kerala which was mentioned as first jihad by muslim against hindu
मोपला विद्रोह के कैदी


इसी दौर में बापू ने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन का बिगुल फूंका था. कुछ दक्षिणपंथी इतिहासकारों के मुताबिक खिलाफत आंदोलन के समर्थन में हिंदुओं को एकजुट करने के लिए ही असहयोग आंदोलन चलाया गया था. हालांकि महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन को एक करने के पीछे हिंदु-मुसलमानों को एकजुट करना था.
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केरल में ऊंची जाति के जमींदार हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों का विद्रोह 

केरल के खिलाफत आंदोलन में मालाबार इलाके के मोपला मुसलमान शामिल थे. मोपला केरल के मालाबार इलाके में रहने वाले मलयाली मुस्लिम थे. इस समुदाय के ज्यादातर लोग छोटे किसान और व्यापारी थे. उनपर इस्लाम के कट्टर मौलवियों का प्रभाव था. जबकि मालाबार इलाके की जमीनों और बड़े व्यापारों पर उच्च वर्ग के हिंदुओं का कब्जा था. मोपला मुसलमान इनके यहां बटाईदार या काश्तकार के तौर पर काम किया करते थे.

खिलाफत आंदोलन की शुरुआत में आंदोलन अंग्रेजों के खिलाफ था. अंग्रेजों ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए हर हथकंडा अपनाया. इस आंदोलन के बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. जिसके बाद मालाबार इलाके में आंदोलन का नेतृत्व मोपला मुसलमानों के हाथों में चला गया. मोपलाओं के हाथ में जाने के बाद आंदोलन बिगड़ गया. मोपलाओं ने ऊंची जाति के जमींदार हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया.

ये जमींदारों के खिलाफ बटाईदारों का विद्रोह बन गया. मोपला मुसलमान कम मजदूरी, काम करने के तौर तरीकों और दूसरे भेदभावों की वजह से हिंदू जाति के जमींदारों से नाराज थे. केरल में जमींदारों के खिलाफ इस तरह के विद्रोह पहले भी होते रहे थे. 1836 और 1854 में भी इस तरह के विद्रोह हुए थे. 1841 और 1849 का विद्रोह काफी बड़ा था. लेकिन 1921 में हुआ मोपलाओं के विद्रोह ने काफी हिंसक शक्ल अख्तियार कर लिया.

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मालाबार इलाके में अंग्रेजों ने मोपला विद्रोह को कुचलने के लिए हर हथकंडा अपनाया था


मोपला विद्रोह में हजारों लोग मारे गए

मोपलाओं ने कई पुलिस स्टेशनों में आग लगा दी. सरकारी खजाने लूट लिए गए. अंग्रेजों को अपने निशाने पर लेने के बाद इनलोगों ने इलाके के अमीर हिंदुओं पर हमले शुरू कर दिए. इस भयावह मारकाट में हजारों मोपला भी मारे गए.

कहा जाता है कि मोपला विद्रोह के दौरान हजारों हिंदू मारे गए, उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार हुए, हजारों हिंदुओं को धर्म परिवर्तन करना पड़ा. बाद में आर्य समाज की तरफ से उनका शुद्धिकरण आंदोलन चला. जिन हिंदुओं को मुस्लिम बना दिया गया था, उन्हें वापस हिंदू बनाया गया. इसी आंदोलन के दौरान आर्य समाज के नेता स्वामी श्रद्धानंद को उनके आश्रम में ही 23 दिसंबर 1926 को गोली मार दी गई.

मोपलाओं का विद्रोह भटक गया था. इसने सांप्रदायिक रंग ले लिया और इसी वजह से ये फेल रहा. मोपलाओं के विद्रोह को लेकर आज भी मुस्लिम समुदाय को कटघरे में खड़ा किया जाता है.

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First published: August 20, 2019, 12:03 PM IST
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