क्या वाकई ‘नैतिक वृद्धि’ की तकनीकों से बेहतर बन सकता है इंसान

नैतिक वृद्धि (Moral Enhancement) तकनीकें इंसान की क्षमता को बढ़ा सकती है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नैतिक वृद्धि (Moral Enhancement) तकनीकें इंसान की क्षमता को बढ़ा सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नैतिक वृद्धि (Moral Enhancement) एक नई अवधारणा है तकनीकों से इंसान (Human) की नौतिकता को मजबूत कर उसके कार्यनिष्पादन को बढ़ा सकता है.

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  • Last Updated: April 30, 2021, 12:59 PM IST
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मानव विकास (Human Development) की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चुनौती इंसान 9Humans) को कहीं से मिली है तो वह खुद इंसान से और उसके मन से. कहा भी जाता है कि खुद पर जीत इंसान की सबसे बड़ी जीत होती है. वैज्ञानिक तक मानते हैं इंसान अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता का सबसे अच्छा उपयोग तभी कर पाता है जब वह ज्यादा सहयोग, परोपकार, प्रोत्साहन जैसे गुणों से सम्पन्न होने के साथ नैतिक रूप से अच्छा हो. अब इंसान को नैतिक तौर पर मजूबत बनाने के लिए नैतिक वृद्धि (Moral Enhancement) का विचार प्रचलन में आ रहा है.

लोगों को नैतिक बनाने का प्रयास

नैतिक वृद्धि का विचार उस तकनीक को दर्शाता है जिसका उपयोग लोगों को और ज्यादा नैतिक बनाने के लिए किया जा सकता है. इसके समर्थक दलील देते हैं कि हमें दुनिया की समस्याओं को सुलझाने के लिए बेहतर लोगों की जरूरत है. इस विषय पर विचार तो बहुत सारे हैं लिकन इसमें पक्की सहमति अभी नहीं बन सकी है.

बेहतर बनाने का प्रयास
फिलहाल लोग खुद को बेहतर बनाने के लिए बहुत से उपाय करते हैं. वे कैफीन और अन्य उत्तेजक पदार्थों के सेव से ज्ञान संबंधी प्रदर्शन के बेहतर बनाने के लिए उपयोग करते हैं. प्राकृतिक रूप से संभव शारीरिक क्षमता से भी ज्यादा बेहतर एथलीट प्रदर्शन के लिए एस्ट्राइड्स लेते हैं.

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लोग (Humans) अपनी क्षमताओं का विकास करने के लिए पहले ही तकनीकों का उपयोक कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


होना चाहिए इन तकनीकों का उपयोग



विज्ञान और तकनीक के पास ऐसी बहुत सारी तकनीकें हैं जिनसे लोग अपना प्रदर्शन बेहतर कर सकेत हैं. पिछले कछ सालों में बुद्धिजीवियों का कहना है कि इन उपकरणों का उपयोग इंसान की नैतिक क्षमताओं के विकास के लिए किया जाना चाहिए जिससे मानव ज्यादा सहयोगात्मक, ज्यादा अनुभूतिपूर्ण और सही तरीके से प्रोत्साहित प्रजाति बन सके.

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आखिर यह नैतिक वृद्धि है क्या

नैतिक वृद्धि शब्द का पहली बारउपयोग साल 2008 में टॉम डगलस ने किया था. उनका इशारा उन जैवचिकित्सकीय वृद्धियों की ओर था जो वे तकनीकी प्रयास होते हैं जो इंसान को और ज्यादा नैतिक बनाने के लिए होते हैं. यह बहस का विषय होसकता है कि अधिक नैतिक होने के क्या मतलब होता है. लेकिन इस विषय का साहित्य लोगों को और ज्यादा सहयोगात्मक, परोपकारी आदी बनाने पर केंद्रित रहता है.

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नैतिक वृद्धि (Moral Enhancement) तकनीकें आज की बड़ी बड़ी समस्याओं को सुलझाने में मददगार हो सकती हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


नैतिक विफलताओं में सुधार

हम सब कई बार जितना हम सोचते हैं उससे बुरा बर्ताव करते हैं, लेकिन उसे बेहतर करने में मुश्किल होती है. नैतिक वृद्धि  वह तकनीकी दखल होगा जो हमें वैसा ही बर्ताव करने में मदद करेगा जैसा हमें करना चाहिए. हम सब में एक नैतिक विफलता का साझा स्वरूप है. नैतिकता के तंत्रिकाविज्ञान के विकास के साथ हम तकनीकों की मदद से ये विफलताएं सुधार सकते हैं. वास्तव में हमें इनकी बहुत जरूरत है.

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बहुत से अध्ययन दर्शा चुके हैं कि लोगों को नैतिक बर्ताव पर जैवचिकित्सकीय दखल प्रभाव डाल सकता है. लोगों के उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने वाली कई दवाओं का उपयोग आज के चिकित्सक करते हैं. वहीं सेरोटोनिन के बढ़ते स्तर से लोग सच्चाई के विचारों के करीब रहते हैं. कई हारमोन्स की पहचान की गई है जो व्यक्ति के नैतिक मूल्यों को प्रभावित करते हैं. तकनीकी पहले से ही लोगों की नैतिकता पर अवांछनीय असर डाल रही है. इसलिए हमें इसे नियंत्रित करने का प्रयास करना ही चाहिए.
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