भारत के वो नेता, जिनका जन्मदिन इस बार आया ही नहीं. करते थे स्व-मूत्रपान

भारत के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का जन्मदिन 29 फरवरी को होता है, जो दिन चार साल में एक ही बार आता है.

भारत के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का जन्मदिन 29 फरवरी को होता है, जो दिन चार साल में एक ही बार आता है.

पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी भाई देसाई का जन्मदिन 29 फरवरी को पड़ता है, जो दिन चार साल में केवल एक बार ही आता है. लिहाजा इस बार फरवरी 28 दिनों की ही थी और उनका बर्थ-डे नहीं आया. मोरारजी पक्के गांधीवादी तो थे लेकिन काफी अड़ियल और ईमानदार नेता. फैसला करने के बाद कायम रहते थे.

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का जन्मदिन इस बार नहीं आया. अगर इस बार फरवरी 29 दिन की होती तो जरूर उनका जन्मदिन आता. वो देश के अकेले ऐसे दिग्गज नेता रहे, जिनका जन्मदिन चार साल में केवल एक बार ही आता था. देश में 1977 जब पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो वो उसके प्रधानमंत्री थे. हालांकि वो ज्यादा समय तक पद पर नहीं रह पाए. सरकार गिर गई. मोरारजी भाई की एक बात जो हमेशा चर्चा में रही, वो उनका स्वमूत्रपान था. जिसे वो खुद बताते थे.

मोरारजी देसाई का जन्मम 29 फ़रवरी 1896 को हुआ. निधन 10 अप्रैल, 1995 को हुआ. वो 99 सालों तक जिंदा रहे. वो भारत के चौथे प्रधानमंत्री थे. 81 वर्ष की आयु में वह प्रधानमंत्री बने थे. हालांकि इससे पहले भी उन्होंने नेहरू के निधन के बाद कई बार प्रधानमंत्री बनने की कोशिश की लेकिन असफल रहे.

मोरारजी बहुत काबिल नेता थे. नेहरू के निधन के बाद भी वो प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार थे. इसके बाद लाल बहादुर शास्त्री के बाद भी ऐसा लग रहा था कि अब वही प्रधानमंत्री बनेंगे. मार्च 1977 में भी जब वो देश के प्रधानमंत्री बने, तब चौधरी चरण सिंह से मतभेदों के चलते उन्हें एक साल से कुछ ज्यादा समय के बाद प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा.



उनके पिता रणछोड़जी देसाई भावनगर (सौराष्ट्र) में एक स्कूल अध्यापक थे. उनके पिता ने अवसाद में कुएं में कूद कर आत्महत्या कर ली थी. पिता की मृत्यु के तीसरे दिन मोरारजी देसाई की शादी हुई. पिता के लिए उनके मन में बहुत सम्मान था.
मोरारजी देसाई की शिक्षा-दीक्षा मुंबई के एलफिंस्टन कॉलेज में हुई. जो उस समय काफ़ी महंगा और खर्चीला माना जाता था. वो बचपन में खूब क्रिकेट देखा करते थे, अलबत्ता खेले कभी नहीं.

अपनी बात पर अड़े रहने वाले नेता
मोरारजी देसाई अंग्रेजों के जमाने में उप ज़िलाधीश बने. 1930 में ब्रिटिश सरकार की नौकरी छोड़ दी. स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में कूद पड़े. कांग्रेस में शामिल हुए. वह बंबई राज्य के कांग्रेस मंत्रिमंडल में सम्मिलित हुए. हालांकि उनके बारे में शुरू से ये बात प्रचलित हो गई कि वो बहुत हठी हैं. हालांकि ऐसा था भी. गुजरात के समाचार पत्रों में अक्सर उनके इस व्यक्तित्व को लेकर व्यंग्य भी प्रकाशित होते थे.

इंदिरा को प्रधानमंत्री बनाने पर खिन्न रहे
1952 में मोरारजी बंबई के मुख्यमंत्री बनाये गए. 1967 में इंदिरा गाँधी के प्रधानमंत्री बनने पर मोरारजी को उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बनाया गया. लेकिन वो इस बात से खिन्न रहते थे कि सीनियर होने के बाद भी इंदिरा गांधी को क्यों प्रधानमंत्री बनाया गया. इंदिरा से उनकी कभी नहीं बनी. वो उनके काम में लगातार रुकावट भी पैदा करते रहे.

इंदिरा गांधी ने जब ये समझ लिया कि मोरारजी देसाई उनके लिए कठिनाइयां पैदा कर रहे हैं तो उन्होंने उनके पर काटने शुरू कर दिए. नवम्बर 1969 में जब कांग्रेस का विभाजन हुआ और इंदिरा गांधी ने नई कांग्रेस बनाई तो वो इंदिरा के खिलाफ खेमे वाली कांग्रेस-ओ में थे.

1977 में जनता सरकार में प्रधानमंत्री बने
1975 में मोरारजी देसाई जनता पार्टी में शामिल हो गए. मार्च 1977 में जब लोकसभा के चुनाव हुए तो जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हो गया लेकिन उनके लिए प्रधानमंत्री बनना इतना आसान नहीं था क्योंकि चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार थे. ऐसे समय में जयप्रकाश नारायण का समर्थन काम आया और मोरारजी प्रधानमंत्री बने.

पीएम बनते कांग्रेस सरकारों को भंग कर दिया
प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने देश के नौ राज्यों में कांग्रेस के शासन वाली सरकारों को भंग कर दिया गया. राज्यों में नए चुनाव कराये जाने की घोषणा की. उनके इस कदम की काफी आलोचना भी हुई. हालांकि मोरारजी के शासन के दौरान देश में लगातार अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं. वास्तव में जनता पार्टी ऐसी खिचड़ी सरकार थी, जिसमें अलग विचारधाराओं वाले लोग मंत्री थे. जो अपने अपने तरीके से काम कर रहे थे न कि सरकार के अनुसार.

देश में जबरदस्त अव्यवस्था फैल गई
1979 में अर्द्धसैनिक बलों ने विद्रोह कर दिया, जिसे कुचलने में काफ़ी समय लगा. 1978-79 में कई राज्यों में सूखा पड़ा. अक़ाल की स्थिति पैदा हो गई.महंगाई बढ़ गई. केरोसिन तेल भी ग़रीब जनता के लिए सपना हो गया.

मोरारजी देसाई का अपने किसी मंत्री पर कोई जोर नहीं रह गया. 15 जुलाई, 1979 को मोरारजी देसाई की सरकार अल्पमत में आ गई. उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा. उन्हें गांधीवादी नीति का परम समर्थक माना जाता है. वो जो फैसला कर लेते थे, उस पर कायम रहते थे. हालांकि वो सादगी वाले और ईमानदार नेता थे.वो समझौते नहीं कर पाते थे.

स्वमूत्रपान को उत्तम औषधि मानते थे
मोरारजी देसाई 'स्व-मूत्रपान' को स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम औषधि मानते थे. 'शिवांगु' अर्थात् स्व-मूत्रपान के सम्बन्ध में उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था. इसके लाभ भी बताए. वह भोजन में थोड़ा दूध, मौसमी फलों का रस एवं कुछ सूखे मेवे लेते थे.

रात में जगाना पसंद नहीं था
जब वो सोने चले जाते थे तो उन्हें रात में जगाना पसंद नहीं था. प्रधानमंत्री रहते हुए भी यही प्रक्रिया जारी रही. वो 100 साल जीना चाहते थे लेकिन इनकी मृत्यु 99 वर्ष और कुछ माह गुज़रने के बाद 1995 में हो गई. वह अकेले ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्हें भारत सरकार की ओर से 'भारत रत्न' तथा पाकिस्तान की ओर से 'तहरीक़-ए-पाकिस्तान' का सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ.
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