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जब मोरारजी देसाई ने कहा था- अगर पाकिस्तान के पास परमाणु बम है तो हम उसे बर्बाद कर देंगे

News18Hindi
Updated: February 29, 2020, 10:18 AM IST
जब मोरारजी देसाई ने कहा था- अगर पाकिस्तान के पास परमाणु बम है तो हम उसे बर्बाद कर देंगे
मोरारजी देसाई देश के पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री बने.

मोरारजी देसाई (Morarji Desai) ने अपने कार्यकाल में पाकिस्तान (Pakistan) के साथ देश के रिश्ते इतने अच्छे कर लिए थे कि पाकिस्तान ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया.

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  • Last Updated: February 29, 2020, 10:18 AM IST
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आज देश के चौथे और पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (Morarji Desai) की जन्म जयंती है. आज ही के दिन 1896 में बॉम्बे प्रांत के भदेली गांव में मोरारजी रणछोड़जी देसाई (Morarji Ranchhodji Desai)का जन्म हुआ था. मोरारजी देसाई 1977 से लेकर 1979 तक देश के प्रधानमंत्री रहे. इसके अलावा वो बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री के पद पर भी रहे. आजादी की लड़ाई से लेकर उसके बाद देश की राजनीति में उन्होंने अपना अहम योगदान निभाया. एक पारंपरिक धार्मिक परिवार से आने वाले मोरारजी देसाई कहा करते थे कि हर आदमी को अपनी जिंदगी में सच्चाई और उसके विश्वास के अनुरूप काम करना चाहिए.

ब्रिटिश शासनकाल के दौरान मोरारजी देसाई ने करीब 12 वर्षों तक डिप्टी कलेक्टर का पद संभाला. लेकिन महात्मा गांधी से प्रेरित होकर वो 1930 में आजादी की लड़ाई में कूद पड़े. 1931 में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ले ली. आजादी के बाद भी उन्होंने देश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई. वो जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में गृहमंत्री के पद पर रहे. इसके बाद इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए, वो उपप्रधानमंत्री और वित्तमंत्री रहे.

इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल के सबसे मुखर विरोधी रहे मोरारजी देसाई
1969 में जब इंदिरा गांधी ने उनसे वित्तमंत्रालय छीनकर 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया तो उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इंडियन नेशनल कांग्रेस (आर्गेनाइजेशन) की स्थापना की, जिसे सिंडिकेट भी कहा गया. मोरारजी देसाई उन बड़े नेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल का पुरजोर विरोध किया था. इंदिरा विरोध में एकजुट हुई जनता पार्टी का उन्होंने नेतृत्व किया और 1977 के चुनाव में जब जनता पार्टी ने शानदार बहुमत हासिल किया तो उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला.



अपने छोटे से कार्यकाल में मोरारजी देसाई ने पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए थे.

जब पाकिस्तान का बड़ा भाई बनने को तैयार थे मोरारजी देसाई
सत्तर के दशक में भारत पाकिस्तान के रिश्ते बहुत खराब हो चले थे. खासकर पूर्वी पाकिस्तान के आजाद होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था. मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते स्थापित करने की कोशिश की. पाकिस्तान की जिया उल हक की सरकार ने मोरारजी देसाई की सरकार के साथ बेहतर संबंध स्थापित की दिशा में काम किए थे. कहा जाता है कि अगर मोरारजी सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाती तो शायद दोनों देशों के रिश्ते कुछ और होते.

मोरारजी देसाई ने पाकिस्तान के साथ देश के रिश्ते इतने अच्छे कर लिए थे कि पाकिस्तान ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया. दोनों देशों के रिश्तों को ठीक करने के लिए मोरारजी देसाई और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया उल हक के बीच एक मीटिंग हुई थी. उस मीटिंग में मोरारजी देसाई ने जिया उल हक से कहा- लेन-देन चलते रहना चाहिए. अगर हम दोनों देशों के हितों की दिशा में काम करें तो हमारे बीच कोई झगड़ा नहीं होगा. हमें एकदूसरे से भाई की तरह व्यवहार करना चाहिए. मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूं. मुझे तुमसे कुछ लेना नहीं है. मुझे बस तुम्हें सबकुछ देना है.’

मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री रहते हुए पाकिस्तान के साथ भरोसे और विश्वास का मजबूत संबंध कायम कर लिया था.

पाकिस्तान के पास परमाणु बम होने को लेकर भड़के थे मोरारजी देसाई
मोरारजी देसाई पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते सुधारना चाहते थे. लेकिन देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता से वो किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं थे. वो अपनी सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते थे. जिया उल हक के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने ये भी कहा था कि ‘अगर कुछ भी होता है तो तुम जिम्मेदार होगे. मैं ऐसा शख्स नहीं हूं, जो सिर्फ बातें करता है. मैं एक्शन लेता हूं.’

पाकिस्तान के साथ वो रिश्ते सुधारना चाहते थे लेकिन उसकी कुटिलता को लेकर वो सतर्क थे. अपने कार्यकाल के दौरान एक बार उन्होंने एक अमेरिकी अधिकारी से कहा था कि ‘अगर पाकिस्तान के पास परमाणु बम है तो हम उसे बर्बाद कर देंगे.’ वो देश की सुरक्षा को खतरे में डालकर रिश्ते सुधारने के पक्ष में नहीं थे. लेकिन इतना है कि उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच तनाव कम हुए.

मोरारजी देसाई के एक्टिव पॉलिटिक्स से रिटायर होने के बाद 1986 में पाकिस्तान ने उन्हें निशान-ए-पाकिस्तान सम्मान से नवाजा. 1991 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया. 10 अप्रैल 1995 को उनका निधन हो गया.

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First published: February 29, 2020, 10:18 AM IST
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