17 लाख लोग सड़कों पर! हांगकांग के आंदोलन का जवाब क्यों नहीं ढूंढ़ पा रहा चीन?

प्रत्यर्पण संबंधी कानून के​ विरोध (Protest) में हांगकांग (Hong Kong) में ऐतिहासिक प्रदर्शन लगातार 11 महीनों से जारी है. ताज़ा प्रदर्शन में लाखों लोग सड़कों पर उतरे तो उधर चीन (China) ने भारी सेना तैनात कर दी है. जानिए क्यों चीन के खिलाफ हांगकांग में होते रहे विरोध प्रदर्शन.

News18Hindi
Updated: August 19, 2019, 3:58 PM IST
17 लाख लोग सड़कों पर! हांगकांग के आंदोलन का जवाब क्यों नहीं ढूंढ़ पा रहा चीन?
हांगकांग में लगातार 11 हफ्तों से जारी है आंदोलन.
News18Hindi
Updated: August 19, 2019, 3:58 PM IST
हांगकांग (Hong Kong) में चीन (China) के खिलाफ लगातार गुस्सा फूट रहा है और बीते रविवार को हुए ताज़ा विरोध प्रदर्शन (Protest) में फिर लाखों लोग सड़कों पर उतरे. 11 हफ्तों से जारी हांगकांग का विरोध प्रदर्शन अब पांच सूत्रीय मांगों पर टिक गया है और वहीं, बैकफुट पर जाने के बाद चीन अब भिड़ंत के मूड में दिख रहा है क्योंकि उसने सेना (Armed Troops) की तैनाती कर दी है. यह पहली बार नहीं है जब बड़े पैमाने पर नागरिक चीन के खिलाफ सड़कों पर उतरे हों. लेकिन, पहले कोई आंदोलन (Civil Movement) इतना लंबा और व्यापक नहीं रहा. चीन के खिलाफ होते रहे विरोध प्रदर्शनों के इतिहास के साथ ही यह भी जानें कि इस बार चीन क्यों अब तक निर्णायक कदम नहीं उठा सका.

ये भी पढ़ें : क्या था तियानमेन नरसंहार कांड? जिसे दोहराए जाने की आशंका है

हांगकांग में चीनी नीतियों के खिलाफ पिछला सबसे बड़ा प्रदर्शन इसी साल जून में हुआ था, जब लाखों लोग सड़कों पर उतर आए थे. बीते रविवार को 17 लाख यानी डेढ़ गुना ज़्यादा लोग हांगकांग की सड़कों पर उतरे. जानिए कि चीनी नीतियों (Chinese Policies) का समर्थन करने वाले एक कानून (Extradition Act) को लोकतंत्र (Democracy) के लिए खतरा बताते हुए ये प्रदर्शन किस स्तर तक पहुंच चुका है और चीन की तरफ से अब किस कार्रवाई के संकेत हैं.

ये हैं ताज़ा हालात

हांगकांग की कुल आबादी 74 लाख से कुछ ज़्यादा है. साल 1997 में हांगकांग को चीन के सुपुर्द कर दिया गया था. इसके बाद से बीते रविवार को हुआ ये प्रदर्शन सबसे बड़ा रहा. मानवाधिकार फ्रंट (Human Rights Front) की मानें तो ताज़ा प्रदर्शन में करीब 17 लाख लोग सड़कों पर उतरे और उन्होंने नए प्रत्यर्पण कानून का विरोध किया. उधर, चीन ने हांगकांग बॉर्डर पर भारी सैन्य बल तैनात किया है, जिसे लेकर दुनिया भर में चिंता का माहौल है. अमेरिका ने चीन को तियानमेन स्क्वायर (Tiananmen Square) जैसी दमनकारी नीति न अपनाने की चेतावनी तक दी है.

इससे पहले भी हांगकांग में बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं. इनमें से एक 2014 में हुआ अंब्रेला आंदोलन था जिसमें भी लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन खबरों की मानें तो इस प्रदर्शन से बहुत बड़ी संख्या में नागरिक हालिया प्रदर्शन में शामिल हुए. इसकी एक वजह तो ये है कि अंब्रेला प्रदर्शन में मुख्यत: छात्र वर्ग शामिल था जबकि ताज़ा प्रदर्शन में कारोबारी लोग, मध्यम वर्ग, मध्यम आयु वर्ग और पहली बार प्रदर्शन में शामिल हो रहे लोग यानी बहुत बड़ी आबादी शामिल रही.

ज़रूरी जानकारियों, सूचनाओं और दिलचस्प सवालों के जवाब देती और खबरों के लिए क्लिक करें नॉलेज@न्यूज़18 हिंदी
Loading...

china news, hong kong news, historic protest, people protest, china law, चीन समाचार, हॉंगकॉंग समाचार, ऐतिहासिक प्रदर्शन, जन आंदोलन, चीनी कानून
ताज़ा प्रदर्शन में करीब 17 लाख लोग सड़कों पर उतरे और नए प्रत्यर्पण कानून का विरोध किया.


पांच सूत्रीय हो चली हैं मांगें
नागरिक मानवाधिकार फ्रंट के हवाले से खबरों में कहा जा रहा है कि हांगकांग में चीन के खिलाफ जो प्रदर्शन पिछले 11 हफ्तों से जारी है, अब वह पांच मांगों को लेकर हो रहा है. पहली मांग तो वही है कि प्रत्यर्पण संबंधी कानून को बगैर शर्त पूरी तरह वापस लिया जाए और विरोध प्रदर्शनों को दंगा माने जाने की व्यवस्था भी वापस ली जाए. प्रदर्शनकारियों ने जून से अब तक गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने, जून से अब तक की घटनाओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र आयोग बनाने और वैश्विक मताधिकार देने जैसी मांगें रखी हैं.

क्या है प्रत्यर्पण कानून? जिसका विरोध हो रहा है
हांगकांग में जिस कानून के विरोध के लिए घंटों तक प्रदर्शन हुआ, उसके मुताबिक चीन को ये अधिकार ​होगा कि वह हांगकांग के किसी भी पलायक नागरिक यानी किसी और देश के नागरिक का प्रत्यर्पण कर सके. इस कानून को मानव अधिकारों और लोकतंत्र के लिए खतरा माना जा रहा है क्योंकि ताइवान समेत यूएन, अमेरिका और कई नामचीन संस्थाएं इस कानून के बारे में चीन को पहले ही चेता चुकी थीं.



इस विशाल विरोध प्रदर्शन के बाद नीति निर्माताओं ने कहा था कि अभी ये कानून लागू नहीं किया गया है और इसके दूसरे ड्राफ्ट की तैयारी चल रही है. दूसरे ड्राफ्ट के बाद इस पर बहस करवाई जाएगी और लोगों के हित में कानून बनने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा. लेकिन, विशेषज्ञों का मानना रहा है कि इस कानून के बाद नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सुनवाई की गारंटी नहीं होगी और चीन अपनी मनमानी करते हुए प्रत्यर्पण करने का अधिकार हथिया लेगा.

पहले भी हांगकांग में हुए हैं ऐतिहासिक प्रदर्शन
साल 2003 में दंगा संबंधी कानून के विरोध में यहां एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था. दंगा संबंधी कानून के तहत प्रावधान था कि चीन के खिलाफ किसी भी किस्म का दंगा भड़काने, साज़िश करने या द्रोह करने पर दोषी को उम्र कैद तक हो सकती थी. इस कानून के विरोध में करीब 5 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे और इसका असर ये हुआ था कि इस कानून को रद करना पड़ा था.

इसके बाद 2014 के अंब्रेला आंदोलन में कुछ हज़ार लोग सड़कों पर उतरे थे लेकिन आखिरकार ये आंदोलन नाकाम हो गया था क्योंकि इसे नागरिकों के बड़े वर्ग का समर्थन नहीं मिला था. हालांकि ये आंदोलन भी लोकतंत्र के बचाव के नाम पर था. इस बार प्रत्यर्पण कानून मसौदे के खिलाफ हुए आंदोलन को भी 'प्रो डेमोक्रेसी' कहा गया. इस बार दस लाख से ज़्यादा लोगों के समर्थन का दावा किया जा रहा है.

china news, hong kong news, historic protest, people protest, china law, चीन समाचार, हॉंगकॉंग समाचार, ऐतिहासिक प्रदर्शन, जन आंदोलन, चीनी कानून
चीन के प्रत्यर्पण संबंधी कानून का विरोध हांगकांग के अलावा ताइवान और अमेरिका भी कर चुके हैं.


गौरतलब है कि 4 जून को तियानमेन स्क्वायर नरसंहार की 30वीं बरसी मनाने के लिए भी हांगकांग के विक्टोरिया पार्क में लाखों लोग जमा हुए थे. लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को 1989 में बीजिंग स्थित तियानमेन स्क्वायर पर मौत के घाट उतार दिया गया था. उस नरसंहार की याद में हर साल मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती है. हांगकांग में बीते 4 जून को कैंडल लाइट सभा के लिए पार्क में 1 लाख 80 हज़ार लोग जमा हुए. 2014 के अंब्रेला मूवमेंट के बाद ये मौका था, जब इतनी बड़ी संख्या में लोग जुटे और इसके बाद 9 जून को प्रत्यर्पण कानून के विरोध में ऐतिहासिक प्रदर्शन हुआ.

अब तक क्यों मजबूर दिखा चीन
चीन का आधुनिक इतिहास गवाह है कि हर बड़े विद्रोह या आंदोलन को चीन कुचलता रहा है. कभी नरसंहार तो कभी आंदोलनकारियों को देशनिकाला देकर. इस बार क्या हुआ कि हांगकांग का आंदोलन ढाई महीने से भी ज़्यादा और व्यापक रूप से चलता रहा लेकिन चीन अब तक कोई हल नहीं निकाल सका. इस बार माना जा रहा है कि चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव ज़्यादा रहा है और अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड वॉर के चलते भी वह दुनिया की नाराज़गी झेलने की स्थिति में नहीं है इसलिए हर कदम फूंककर रखना उसकी मजबूरी रही है. ऐसे ही ग्लोबल कारणों के चलते जून में चीन ने हांगकांग के विरोध को शांत करने के लिए बैकफुट पर जाने का कदम भी उठाया था.

चीन हो सकता है आक्रामक
जून से हांगकांग में चीन की नीतियों और कानून के खिलाफ प्रो डेमोक्रेसी नाम से चल रहे इस आंदोलन को लगातार जारी और बढ़ते देखकर चीन आक्रामक कदम उठाने के मूड में आ सकता है. जून और जुलाई में खबरें थीं कि प्रदर्शनों को देखकर चीन ने कानून के मसौदे पर कुछ बदलाव करने का मन बनाया था लेकिन इन संशोधनों पर हांगकांग के आंदोलनकारियों ने संतोष ज़ाहिर नहीं किया और प्रत्यर्पण कानून को पूरी तरह वापस लेने की मांग पर अड़े रहे. अब हांगकांग बॉर्डर पर चीन सेना भेजने की कवायद कर चुका है. माना जा रहा है कि चीन उसी तरह की नरसंहार जैसी दमनकारी नीति अपना सकता है जो उसने 30 साल पहले बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर आंदोलन को कुचलने के लिए अपनाई थी.

ये भी पढ़ें:


हांगकांग में सड़क पर उतरे लाखों लोग, ट्रंप ने चीन को चेताया

कौन सा खज़ाना गड़ा है? जो ग्रीनलैंड पर गड़ी है अमेरिका की नज़र
First published: August 19, 2019, 1:38 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...