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क्यों दुनिया के ज्यादातर देशों में प्राइवेट सेक्टर को सौंपी जा रही है रेलवे की कमान?

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: October 10, 2019, 9:45 PM IST
क्यों दुनिया के ज्यादातर देशों में प्राइवेट सेक्टर को सौंपी जा रही है रेलवे की कमान?
ब्रिटिश रेलवेज का काफी हद तक प्राइवेटीकरण किया जा चुका है

पूरी दुनिया में 90 के दशक के बाद रेलवे (Railway) को सरकारी नियंत्रण से निकालकर प्राइवेट कंपनियों (Privet Companies) को देने का काम चल रहा है. ज्यादातर देशों में ये काम हो रहा है. भारत ने भी इस ओर कदम बढ़ा दिए हैं लेकिन इस प्रयोग की आलोचना भी हो रही है

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  • Last Updated: October 10, 2019, 9:45 PM IST
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नईदिल्ली. इंडियन रेलवे (Indian Railways) ने पिछले दिनों तेजस ट्रेन (Tejas Train) को कुछ रूट्स पर प्राइवेट हाथों (Private Sector) में सौंप दिया है. ये ट्रेन प्राइवेट कंपनी द्वारा संचालित की जा रही है. अब नई खबर ये है कि भारतीय रेलवे करीब 150 से ज्यादा ट्रेनों और 50 के आसपास रेलवे स्टेशन (Railway Station)  को और प्राइवेट हाथों में सौंप सकता है. अगर ये प्रयोग सफल रहा तो निश्चित तौर पर अगले कुछ सालों में ये प्रक्रिया और तेज होगी.

इंडियन रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. ये रोज 20 हजार से ज्यादा ट्रेनों का संचालन करती है.  देशभर में इसके करीब साढे़ सात हजार स्टेशन हैं. भारत में रेल लाने और इसकी पटरियां ईस्ट इंडिया कंपनी के जमाने में 19वीं सदी में बिछाई गईं थीं लेकिन ये तब प्राइवेट कंपनियों के हाथों में ही थीं. बाद में भी भारत में ट्रेनों के संचालन का काम अलग अलग रीजन में अलग प्राइवेट कंपनियां ही देखा करती थीं. वैसे दुनियाभर में 19वीं सदी में जब रेलवे की शुरुआत हो रही थी तो ये काम आमतौर पर प्राइवेट कंपनियों के जरिए ही हुआ था.



भारत में पहली गुड्स ट्रेन  1837 में मद्रास के पास दौड़ी थी. इसके बाद 1853 में पहली बार यात्री ट्रेन बोरीबंदर से थाने तक चली.आजादी के बाद 1951 में भारत सरकार ने सभी अलग रेल कंपनियों को मिलाकर एक कंपनी भारतीय रेलवे बनाई और इसका राष्ट्रीयकरण किया.

कई देशों में हो चुका है रेलवे का निजीकरण 
इस समय पूरी दुनिया में कुछ सालों से रेलवे में उथल-पुथल मची हुई है. बहुत से देशों ने अपने तमाम रेल आपरेशंस प्राइवेट हाथों में दे दिये हैं. बहुत से देश ऐसा करने के बारे में गंभीर हैं. जब से दुनिया में 90 के दशक में उदारीकरण आया तब रेलवे को प्राइवेट हाथों में सौंपा जा रहा है.

हालांकि एक दो उदाहरण ऐसे भी हैं, जहां निजीकरण के बाद रेलवे की हालत इतनी खराब हो गई कि सरकार को दोबारा उन्हें हाथों में लेना पड़ा.
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पहले विश्व युद्ध के बाद रेलवे को सरकारों ने अपने हाथों में लेना शुरू किया. लेकिन ये लंबे समय तक कायम नहीं रहा. रेलवे को फिर प्राइवेट हाथों में दे दिया गया. हालांकि दूसरे विश्व युद्ध ने पुख्ता तौर पर दुनियाभर के रेलवे को सरकारी नियंत्रण में पहुंचा दिया, ये ऐसा दौर था जब दुनिया में अनिवार्य सेवाओं और जरूरी सेक्टर्स को सरकार के हाथों में देने की पैरवी हो रही थी.

उदारीकरण ने फिर बदल दी है तस्वीर 
1990 के बाद जिस तरह दुनियाभर में उदारीकरण का दौर आया, उसमें फिर निजीकरण को बढ़ावा मिलना शुरू हुआ. अब ये हालत है कि तमाम देशों की रेल सेवाएं प्राइवेट कंपनियों के हाथों में जा चुकी हैं. जहां नहीं गई हैं, वो भी उसी ओर बढ़ रहे हैं. अगर भारत ने उस ओर कदम बढ़ा दिया है तो पाकिस्तान में भी ये सोचा जाने लगा है. एक रूसी बैंक ने वहां रेलवे में मोटा निवेश करने का आकर्षक प्रस्ताव भी दे दिया है.

कनाडा में पहले रेलवे प्राइवेट हाथों में थी. पहले वर्ल्ड वार के बाद सरकार ने इसे अपने हाथों में लिया लेकिन 1995 में ये फिर प्राइवेट हाथों में चली गई.

फ्रांस में रेलवे को जो कंपनी चलाती है, उसमें सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी और प्राइवेट सेक्टर की 49 फीसदी है


फ्रांस में एक जमाने में उसकी रेलवे को दस प्राइवेट कंपनियां मिलकर चलाती थीं. 1938 में सरकार ने इन सबको जोड़कर एक पब्लिक सेक्टर की नई कंपनी खड़ी की. इसके 51 फीसदी शेयर अपने पास रखे जबकि बाकी शेयर प्राइवेट हाथों में हैं.

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ब्रिटेन की स्थिति 
ब्रटेन का मामला और रोचक है. माना जाता है कि दुनिया की पहली रेललाइन यहीं बिछी. शुरुआत यहीं से हुई. पहले विश्व युद्ध से ब्रिटेन में कोई एक दो नहीं बल्कि सौ से ज्यादा कंपनियां का अलग अलग रीजन के रेलवे का संचालन करती थीं. इन्हीं में कुछ कंपनियां भारत में रेलवे जोन की मालिक थीं.

पहले विश्व युद्ध के बाद 1921 में ब्रिटिश सरकार ने एक कानून बनाकर इन सारी कंपनियों को जोड़कर चार कंपनियां बना डालीं. दूसरे विश्व युद्ध के बाद दुनिया में अगर किसी देश की रेलवे सबसे खराब हालत में पहुंच गई थी तो ये ब्रिटेन ही था. तब सरकार ने इसे अपने हाथों में लेकर राष्ट्रीयकरण किया. "ब्रिटिश रेलवे" नाम की सरकारी कंपनी अब इसकी मालिक थी.

ब्रिटेन की पूरी रेल और इसकी सहयोगी कंपनियां अब प्राइवेट कंपनियों को दी जा चुकी हैं. हालांकि इसकी बहुत सकारात्मक रिपोर्ट नहीं है.


हालांकि अब 1990 के बाद उदारीकऱण का असर ब्निटेन पर भी पड़ा है. ब्रिटेन की पूरी रेल और इसकी सहयोगी कंपनियां अब प्राइवेट कंपनियों को दी जा चुकी हैं. हालांकि इसकी बहुत सकारात्मक रिपोर्ट नहीं है. लोगों का कहना है कि अब ट्रेनों में भीड़ ज्यादा रहने लगी है. ट्रेनें अब लेट भी होने लगी हैं.

रूस भी कर सकता है विचार 
रूस में जब तक कम्युनिस्ट शासन नहीं था. तब तक जारशाही में वहां की रेल सरकारी और प्राइवेट दोनों हाथों में थीं. जब कम्युनिस्ट सरकार बनी तो उसने इसका राष्ट्रीयकरण किया. हालांकि रूस में अब कम्युनिस्ट दौर खत्म हो चला है लेकिन वहां अभी रेलवे सरकार के ही हाथों में है लेकिन रूस के उप प्रधानमंत्री ये कह चुके हैं कि 2020 के बाद इसके निजीकरण पर विचार किया जा सकता है.

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अर्जेंटीना में निजीकरण से रेलवे हो गई बर्बाद 
अर्जेंटीना में हालत अलग है. वहां रेलवे का आगाज ब्रिटिश, फ्रांसीसी और अर्जेंटीना की प्राइवेट कंपनियों ने किया था. शुरुआत में ये प्राइवेट कंपनियां ही वहां की रेलवे को चलाती थीं. 1948 में इसका राष्ट्रीयकरण किया गया.

अर्जेंटीना में 90 के दशक में सरकार ने रेलवेे को प्राइवेट हाथों में दे दिया लेकिन उसके बाद इसकी इतनी शिकायतें आनीं शुरू हुईं कि सरकार को इसे वापस अपने हाथों में लेना पड़ा


1990 में उदारीकरण के दौर में सरकार ने इन्हें प्राइवेट हाथों में दे दिया. हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर को सरकार ने अपने हाथों में रखा. कुछ समय बाद ही प्राइवेट कंपनियों का कामकाज के तौरतरीकों की शिकायतों की भरमार लगनी शुरू हो गई. ये फिर इतनी ज्यादा बढ़ने लगीं कि अर्जेंटीना सरकार को इसको 2015 में अपने हाथों में ही लेने का फैसला करना पड़ा. ऐसा इस दौर में एक अलग उदाहरण है कि जब निजीकरण ने निराश किया.

जर्मनी में सरकार ही चलाती है रेलवे 
जर्मनी में अब भी सरकार ही रेलवे का संचालन करती है. यहां भी कहानी पुरानी ही है. पहले कई प्राइवेट कंपनियां थीं. पहले विश्व युद्ध के बाद सरकार ने उन्हें अपने हाथों में लिया. फिर सरकार इन पर और कंट्रोल करती गई. जब जर्मनी दो हिस्सों में बंटा तो दोनों हिस्सों में अलग अलग सरकारी कंपनियां वहां के रेलवे को चलाने लगीं. अब डीबीएजी नाम की सरकारी कंपनी इसे चलाती है.

आयरलैंड, स्पेन में क्या हो रहा है
आयरलैंड में ये प्राइवेट हाथों में है. इटली में रेल नेटवर्क पर सरकारी नियंत्रण है लेकिन जो स्पीड ट्रेनें चल रही हैं, उसे प्राइवेट कंपनी चला रही है. स्पेन इस मामले में सबसे अलग है. यहां जितने राज्य हैं. उतनी रेल कंपनियां. हर राज्य की अपनी कंपनी और अपना क्षेत्र है, जहां वो रेल संचालन करती है.

चीन में तीन तरह की रेल सेवाएं हैं, जिन्हें राज्य सरकारों से लेकर कुछ सरकारी कंपनियां चलाती हैं लेकिन चीन भी अपनी प्रांतीय ट्रेन सेवा को प्राइवेट हाथों में देने पर विचार कर रहा है


चीन में तीन तरह की रेलवे 
चीन में तीन तरह की रेलवे चलाई जाती हैं और तीनों के आपरेटर्स यानि मालिक अलग अलग हैं. चीन में रेल की प्रांतीय सेवा, राष्ट्रीय सेवा और डेजिनेशन रेलवे सेवा है. प्रांतीय सेवा का जिम्मा राज्य सरकारों के पास है तो नेशनल रेलवे को सरकारी कंपनी चाइना रेल कारपोरेशन चलाती है. वहीं डेजिनेटेड रेलवे को चलाने का जिम्मा कुछ अन्य सरकारी कंपनियों के पास है. हालांकि चीन अब अपनी प्रांतीय सेवा की ट्रेनों को प्राइवेट कंपनियों को देने जा रहा है.

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First published: October 10, 2019, 9:00 PM IST
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