मिक्स्ड मार्शल आर्ट में क्या दांव लगाती है चीनी सेना, जो होता है खतरनाक

चीन ने सीमा पर मार्शल आर्ट के फाइटर तैनात किए थे- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

चीन ने सीमा पर मार्शल आर्ट के फाइटर तैनात किए थे- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

लद्दाख की गलवान घाटी पर हुई हिंसक झड़प (Galwan valley clash) के बारे में खुलासा हुआ है कि चीन ने सीमा पर मार्शल आर्ट के फाइटर तैनात किए (China recruited martial art fighters) थे ताकि वे भारतीय सेना (Indian army) को नुकसान पहुंचा सकें. वैसे चीन में हजारों सालों से ही खतरनाक मार्शल आर्ट्स का इस्तेमाल दुश्मनों के लिए होता रहा. 

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 29, 2020, 10:07 AM IST
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15 जून की रात को गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच हिंसक टकराव हुआ था. अब माना जा रहा है कि चीन ने बाकायदा साजिश के तहत वहां पर अपने मार्शल आर्ट जानने वाले फाइटर्स भेजे थे. ये फाइटर लड़ाई के लिए हथियारों पर निर्भर नहीं होते, बल्कि हाथ-पैर या लाठी-डंडों से भी किसी की जान ले सकते हैं. वैसे चीन में मार्शल आर्ट प्राचीन समय से ही काफी लोकप्रिय रहा. ये लड़ाई की खास शैलियां हैं जिनमें हथियारों की जरूरत नहीं होती, बल्कि हाथ-पैरों से ही दुश्मन पर हमला होता है. इसमें ये सिखाया जाता है कि शरीर के किस हिस्से पर कैसे वार करने पर क्या असर होता है. इसमें दुश्मन को बेहोश करने से लेकर हमेशा के लिए पैरालिसिस का शिकार बनाने और यहां तक कि जान लेने के तरीके भी सिखाए जाते हैं.

चीन में मार्शल आर्ट का सबसे पहला जिक्र लगभग 4000 साल पहले शिआ राजवंश के दौरान मिलता है. तब शाही सेना के लिए हाथ से लड़ाई की प्रैक्टिस काफी जरूरी मानी जाती थी. आगे चलकर येल्लो सम्राट (Yellow Emperor) के दौरान चीन में लड़ाई के पुराने तरीके को दोबारा काम में लाना शुरू किया गया और नए-नए तरीके भी तैयार किए गए. येल्लो सम्राट पहले चीन के योद्धा थे, जिन्होंने इलाज के चीनी तरीके, ज्योतिष और लड़ाई के तरीके भी तैयार किए. जल्द ही लड़ाई के तरीके काफी प्रचलित हो गए.

चीन में मार्शल आर्ट का सबसे पहला जिक्र लगभग 4000 साल पहले मिलता है




कुंग-फू (Kung Fu)- अगर कहा जाए कि आज के समय का सबसे मशहूर मार्शल आर्ट शब्द ‘कुंग-फू’ है तो कुछ गलत नहीं है. कुंग-फू चाइनीज मार्शल आर्ट है जिसका अर्थ होता है ‘अपने से बड़े और शक्तिशाली पर विजय पाना’. इस कला को भारतीय बौद्ध भिक्षु बोधिधर्मन ने किया था. सैकड़ों सालो तक यह युद्ध कला चीनी बौद्ध मठों में सिखाई जाती रही और ‘शाओलिन टेम्पल’ इस विद्या का केंद्र रहा. आज यह पूरी दुनिया में फेमस है. इसमें भी उत्तरी और दक्षिणी चीन में अलग-अलग शैलियां हैं और हरेक शैली का अलग नाम है.
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विंग चुन (Wing Chun)- विंग चुन मार्शल आर्ट का आविष्कार एक बौद्ध भिक्षुणी नग मुई ने किया था. इस मार्शल आर्ट के सभी रक्षात्मक और आक्रामक स्टाइल इन्होंने पशु, पक्षी और कीट-पतंगों से प्रेरित होकर लिए थे. आज विंग चुन के फाइटर्स दुनिया के सबसे जाने-माने फाइटर्स है और विंग चुन की विशेषता यह भी है कि ये एक ही समय में अटैक और डिफेन्स दोनों सिखाता है. ये लड़ाइयों के दौरान जानलेवा साबित होता है.

मार्शल आर्ट के सभी रक्षात्मक और आक्रामक स्टाइल पशु, पक्षी और कीट-पतंगों से प्रेरित होकर लिए गए (Photo-pixabay)


पिनयिन, जिसे Baguazhang मार्शल आर्ट कहते हैं, ये भी चीन में हाथों से लड़ाई की खास शैली है. 19वीं सदी में चीन की पहाड़ियों पर रहने वाले बौद्ध भिक्षु शरीर और मन की ताकत के लिए इसकी प्रैक्टिस किया करते थे. इसमें शरीर के लोच को खास महत्व दिया जाता है और सालोंसाल इसे सीखने वाले बस शरीर को तरह-तरह से मोड़ने का अभ्यास करते हैं. मार्शल आर्ट के दूसरे तरीकों से अलग इसमें हथियारों के उपयोग पर मनाही नहीं है. पेन-पेंसिल से लेकर बड़ी तलवारें तक इसमें इस्तेमाल की जाती हैं.

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शुआई जिआओ (Shuai jiao) को चीन का सबसे प्राचीन मार्शल आर्ट माना जाता है. इसका अध्ययन करने वाले कई इतिहासकारों का मानना है कि ये आर्ट 6000 साल से भी पुराना है. ये एक तरह की कुश्ती है, जिसमें दुश्मन को जमीन पर पटक-पटककर उसकी जान लेनी होती है. पहले इसे "Jiao li" के नाम से जाना जाता है. इसमें शरीर के जोड़ों को तोड़कर दुश्मन को जमीन पर गिराना होता था. चीनी सैनिकों को ये आर्ट सिखाया जाता था. इसकी भी कई अलग-अलग शैलियां हैं जो इसपर निर्भर करती हैं कि फाइटर लड़ाई में शरीर के किस अंग का सबसे ज्यादा उपयोग करता है.

कई अलग-अलग शैलियां हैं जो इसपर निर्भर करती हैं कि फाइटर लड़ाई में शरीर के किस अंग का उपयोग करता है


ताई ची (Tai Chi) चीन के सबसे प्रचलित मार्शल आर्ट्स में से है. इसमें फाइटर को सिर्फ मारने या बचने की ट्रेनिंग ही नहीं दी जाती, बल्कि इसमें मेडिटेशन भी सिखाया जाता है ताकि शरीर भीतर से भी मजबूत हो. यही वजह है कि ये आर्ट फॉर्म पूरी दुनिया में प्रचलित हो चुका है. चीन के दूसरे मार्शल आर्ट्स की बजाए इसका कोई ड्रेस कोड भी नहीं है, बल्कि ट्रेनिंग ले रहे लोगों को ढीले-ढाले कपड़े पहनने को कहा जाता है. कुल मिलाकर फाइटिंग इसका छोटा हिस्सा है और ज्यादातर इसमें अब कसरत और मेडिटेशन ही सिखाया जाता है.

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वैसे चीन ही नहीं दुनिया के दूसरे देशों में भी बिना हथियारों के जीतने के लिए कई सारे मार्शल आर्ट के तरीके हैं. इन्हीं में से एक है कलरीपायट्टु (Kalaripayattu). इसे कलरी भी कहते हैं जो केरल से आई विद्या है. इसे दुनिया के 10 सबसे खतरनाक मार्शल आर्ट्स में शुमार किया जाता है. भारतीय बौद्ध भिक्षु और कलारी मास्टर बोधिधर्मन ने ही चीन जाकर कुंग फू को जन्म दिया. कलारी का अर्थ होता है युद्ध का मैदान और इसीलिए इस मार्शल आर्ट के बारे में यह कहा जाता है कि ये किसी भी स्थिति में खेल नहीं है, बल्कि गंभीर युद्ध कला है जो सिर्फ जीत और जीत के लिए बनी है.
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