पुण्यतिथि: जब China के सबसे ताकतवर लीडर माओ के मल-मूत्र से रूस ने उन्हें डरपोक साबित कर दिया

पुण्यतिथि: जब China के सबसे ताकतवर लीडर माओ के मल-मूत्र से रूस ने उन्हें डरपोक साबित कर दिया
माओ को उनके रहस्यमयी तौर-तरीकों के लिए जाना जाता है

माओ जेडोंग (Mao Zedong) जब रूस गए तो जोसेफ स्टालिन (Joseph Stalin) ने उन्हें होटल में कैद करवा दिया. वो चाहता था कि माओ के मल-मूत्र की जांच हो.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 9, 2020, 6:53 AM IST
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चीन में अब तक के सबसे ताकतवर नेता माओ (Mao Zedong) को उनके रहस्यमयी तौर-तरीकों के लिए भी जाना जाता है. वे खुद को किसान मानते और आधुनिक टॉयलेट के इस्तेमाल से परहेज करते थे. वे इसके लिए बॉडीगार्ड लेकर जंगलों में जाया करते. इसी आदत के कारण वे एक बार बुरी तरह फंसे. साल 1949 में वे मॉस्को (रूस) पहुंचे तो उन्हें यकीन था कि देश उनका खूब स्वागत करेगा. इसके उलट पहुंचते ही उन्हें होटल ले जाकर छोड़ दिया गया और खूब खिलाया गया. गुस्से में माओ चीखने लगे कि वे यहां खाने और वॉशरूम जाने के लिए नहीं आए हैं. इधर स्टालिन को इंतजार था कि कब माओ टॉयलेट जाए और कब उनके मॉडिफाइट टॉयलेट से उनका मल-मूत्र इकट्ठा कर उसकी जांच हो सके.

जब स्टालिन ने दिखाई तानाशाही
दरअसल तत्कालीन सोवियत संघ के लीडर स्टालिन का मानना था कि माओ के अपशिष्ट में अगर पोटैशियम की भरपूर मात्रा नहीं मिले तो इसका मतलब है कि वे घबराए हुए हैं. तानाशाह स्टालिन को घबराए हुए नेता से किसी बात या करार का शौक नहीं था. और हुआ भी यही. काफी वक्त बाद माओ से मिलने के बाद भी स्टालिन ने उनके साथ किसी खास मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया.

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माओ जेडोंग और जोसेफ स्टालिन (Photo-pxhere)

किताब में जिक्र मिलता है


माओ के फिजिशियन और बेहद करीबी रहे Li Zhisui ने अपनी किताब The Private Life of Chairman Mao में माओ के अजीबोगरीब रहनसहन का खुलकर जिक्र किया था. जैसे चीन के इस नेता को नहाने से भी सख्त बैर था. वैसे ये बात और है कि स्विमिंग माओ का शौक था और वे स्विमिंग में ठीक भी थे.

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युवा दिखाने का था शौक
साल 1966 में वे 70 के हो चुके थे लेकिन खुद को उतना ही जवान और चुस्त दिखाने के लिए उन्होंने Cross-Yangtze Swimming Competition आयोजित किया. Yangtze नदी पर आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के 5000 तैराक शामिल हुए. प्रतियोगिता शुरू हुई और माओ जीत गए. दावा किया गया कि 70 साल के नेता ने 15 किलोमीटर की दूरी महज 65 मिनट में तय की. इसके बाद नेता के नदी पार करने का तो कोई वीडियो नहीं आया लेकिन चीन के अखबार दावा करते रहे कि उनके पास सुपर-ह्यूमन ताकत है, जिससे वे 70 की उम्र में ही किसी जवान से आगे हैं.

युवा बने रहने के लिए माओ स्त्रियों का साथ जरूरी मानते थे


डांसर लड़कियों से रखते थे संबंध
अजीबोगरीब बातों के अलावा माओ को उनकी रंगीनमिजाजी के लिए भी याद किया जाता है. नॉर्थ कोरिया के तानाशाहों के हरम की तर्ज पर माओ भी जहां जाते, अपने साथ युवा लड़कियों का डांस ग्रुप ले जाते. इसे Cultural Work Troupe कहा जाता था, जिसका काम था माओ के साथ नृत्य करना. हालांकि नृत्य खत्म होते-होते माओ ग्रुप में से किसी एक को चुनकर अपने साथ अपने बेडरूम में ले जाया करते. उम्र बढ़ने के साथ माओ में औरतें के साथ की इच्छा और बढ़ती चली गई और वे उनसे घिरे रहने लगे.

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यौन रोग होने के बाद भी किसी ने मुंह नहीं खोला
चीनी कहावत के अनुसार वे मानते थे कि ऐसा करने पर उनका पौरुष लौट आएगा. माओ का डॉक्टर इसपर उन्हें चेताता भी था लेकिन उन्होंने ये जारी रखा. माओ के साथ रह चुकी बहुत सी युवतियों को यौन रोग हो गया जो कि उन्हीं से ट्रांसफर हुआ था लेकिन युवतियों के लिए ये badge of honor था और कभी किसी ने खुलकर विरोध नहीं किया. वैसे विरोध न करने की एक साफ और असल वजह ये भी हो सकती है कि माओ उस दौर में चीन का सबसे शक्तिशाली शख्स था, जिसके बारे में कुछ भी कहना जान गंवाना था.

माओ के एक आदेश के कारण साठ के दशक में चीन भुखमरी का शिकार हो गया


गलत आदेश से देश में फैली भुखमरी
इसका अंदाजा माओ के Four Pests Campaign से लगाया जा सकता है. साल 1958 में माओ ने एक मुहिम शुरू की. इसके तहत खेती को नुकसान पहुंचाने वाले 4 जीव-जंतुओं को मारने का फैसला हुआ- चूहे, जिनसे प्लेग फैलता है, मच्छर क्योंकि वे मलेरिया फैलाते हैं और मक्खियां जो कि हैजा फैलाती हैं. इनके साथ चौथी थी गौरैया. जेडोंग का मानना था कि ये चिड़िया फसल के दाने खा जाती है जिससे काफी नुकसान हो रहा है. Four Pests Campaign के बाद चूहे, मच्छर और मक्खियों का तो कुछ नहीं बिगड़ा लेकिन पूरे चीन से गौरैया लगभग खत्म हो गई. जिस गौरैया को किसानों का दुश्मन और अनाज खाने वाला कहकर मार दिया गया था, वो असल में टिड्डियों को खाकर फसलों की रक्षा करती थीं.

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करोड़ों लोग मारे गए लेकिन कोई चर्चा नहीं
साल 1960 में फसल बहुत कम आई क्योंकि सारे धान पर टिड्डियां लग चुकी थीं. गौरैया न होने के कारण टिड्डियों और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले दूसरे कीड़ों की तादाद तेजी से बढ़ चुकी थी. पैदावार लगातार घटती गई और यहां तक कि इस वजह से चीन में भयंकर अकाल पड़ा. माना जाता है कि इस दौरान 2.5 करोड़ से भी ज्यादा चीनी आबादी मारी गई. इसे Great Chinese Famine के नाम से जाना जाता है. आज भी इसपर चीन में बात वर्जित है. यहां तक कि इसे रिपोर्ट करने वाले पत्रकार Yang Jisheng की किताब Tombstone पर चीन में बैन लगा दिया.
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