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क्या माउथवॉश से कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है?

क्या माउथवॉश से कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है?

इनमें से 113 लोग इलाज के बाद संक्रमण मुक्त हो चुके हैं, जबकि 101 का अभी कोरोना वायरस संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है.  (सांकेतिक फोटो)

इनमें से 113 लोग इलाज के बाद संक्रमण मुक्त हो चुके हैं, जबकि 101 का अभी कोरोना वायरस संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है. (सांकेतिक फोटो)

वैज्ञानिक (scientists) ये समझने में जुटे हुए हैं कि क्या माउथवॉश का रोजाना इस्तेमाल कोरोना का खतरा (mouthwash can prevent from coronavirus) कम कर देता है. इससे पहले देखा गया है कि माउथवॉश कई तरह के वायरस की खोल (ऊपरी संरचना) पर हमला कर उसे नष्ट कर देता है, जिससे संक्रमण नहीं हो पाता.

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    कोरोना वायरस की असरदार दवा या फिर वैक्सीन (vaccine of coronavirus) की खोज में लगे वैज्ञानिक अब इसकी जांच भी कर रहे हैं कि क्या माउथवॉश से कोरोना के वायरस (can we kill coronavirus from mouthwash) मारे जा सकते हैं! अगर ऐसा होता हो तो मुंह के रास्ते से प्रवेश करने वाले वायरस का खतरा कम हो जाएगा.

    ये रिसर्च कार्डिफ यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स के इस बयान के बाद शुरू हुई, जिसमें उन्होंने गले और लार ग्रंथियों के कोरोना वायरस से संबंध के बारे में बताया. 14 मई को Function नामक साइंस जर्नल में यूनिवर्सिटी की एक स्टडी आई. इसमें बताया गया है कि वायरस के फैलने में गले और लार ग्रंथियों की क्या भूमिका होती है. वायरस के ऊपर लिपिड की एक मोटी परत होती है और वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इस परत को माउथ वॉश जैसे किसी उत्पाद से खत्म किया जा सकता है. इससे कोरोना वायरस के मुंह के जरिए संक्रमण का खतरा कम हो सकता है.



    माउथवॉश में क्लोराइड, हाइड्रोजन परॉक्साइ़ड, साइटेलपीरिडिनम क्लोराइड जैसे तत्व होते हैं. ये सारे ही तत्व SARS-CoV-2 के वायरस परत को तोड़ देते हैं. ये वही परत है जिसके स्पाइक प्रोटीन के जरिए वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं से जुड़ता है और फिर अपनी संख्या बढ़ाता है. कार्डिफ की स्टडी में शामिल प्रोफेसर Valerie O’Donnell कहते हैं कि टेस्ट ट्यूब और जितनी भी क्लिनिकल स्टडी अब तक हुई है, उनमें देखा गया है कि माउथवॉश में पाए जाने वाले तत्व वायरस के बाहरी स्ट्रक्चर पर प्रहार कर उसे खत्म कर देते हैं. यानी माउथवॉश एक तरह के विषाणुनाशक का काम करता है. इसके तुरंत बाद ही वैज्ञानिकों ने माउथवॉश पर भी रिसर्च शुरू की.

    फिलहाल वैज्ञानिक कोरोना वायरस की असरदार दवा या फिर वैक्सीन की खोज में लगे हुए हैं


    हालांकि रिजल्ट आने से पहले कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन तब भी माउथवॉश के बारे में ये कुछ बातें जानना जरूरी है. जैसे फरवरी में जब कोरोना बहुत से देशों में फैल गया, तब कुछ दावे आए कि माउथवॉश से इस वायरस को कमजोर किया जा सकता है. लेकिन World Health Organisation (WHO) ने ऐसे दावों को सरासर गलत बताया. WHO के मुताबिक कुछ खास माउथवॉश से कुछ जर्म्स थोड़ूी देर से लिए मुंह से हट जाते हैं लेकिन ये कोविड-19 से नहीं बचाते.

    इसके बाद भी कार्डिफ यूनिवर्सिटी के अलावा कई दूसरे वैज्ञानिकों का भी मानना है कि शायद माउथवॉश कोरोना से लड़ने में हमारी मदद कर सकें. यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम, कोलोरेडो, ओटावा, बार्सेलोना और कैंब्रिज के बेब्राहम इंस्टीट्यूट ने भी कार्डिफ यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ रिसर्च में हिस्सा लिया. इस दौरान ये दावा किया गया कि माउथवॉश वायरस की लिपिड लेयर को खत्म कर देता है, जिससे वायरस का प्रोटीन हमारे शरीर की कोशिकाओं से जुड़ नहीं पाता. यानी मुंह से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.

    माउथवॉश में क्लोराइड, हाइड्रोजन परॉक्साइ़ड, साइटेलपीरिडिनम क्लोराइड जैसे तत्व होते हैं


    बता दें कि अब तक हुई स्टडी में ये साफ है कि वायरस मुंह के अलावा आंखों और नाक की मेंब्रेन से हमारे शरीर तक पहुंचता है. यानी चेहरे के इन तीन हिस्सों को हाथ लगाने से बचने पर संक्रमण काफी हद तक कम किया जा सकता है. हालांकि ये उतना आसान नहीं, जितना सुनने में लगता है. कई शोध बताते हैं कि आमतौर पर सभी घंटेभर में लगभग 23 बार चेहरे के अलग-अलग हिस्सों को छूते हैं. जैसे आंखें, मुंह, बाल, गाल या ठुड्डी को. University of Southern California में मनोविज्ञान की प्रोफेसर Wendy Wood के अनुसार ये सीधे-सीधे मनोविज्ञान से जुड़ा है. कई लोग किसी खास हालात में चेहरे को हाथ लगाते हैं, कई बार तनाव या खुशी के मौके पर ऐसा होता है.

    ये आदत छोड़ना इतना मुश्किल है कि एक्सपर्ट इसके लिए कोई नई आदत लगाने की सलाह भी देते हैं जिसे मनोविज्ञान की भाषा में हैबिट रिवर्सल कहते हैं. जैसे जब भी चेहरे की ओर हाथ जाएं तो ऊंगलियों को कुहनियों या कंधे की तरफ मोड़ दें.

    वैसे माउथवॉश के अलावा शराब पीने या ब्लीच के इस्तेमाल से कोरोना भगाने जैसी भ्रांतियां भी फैलाई जा रही हैं. WHO अपनी वेबसाइट पर इन सारे तरीकों को खतरनाक बताते हुए कहता है कि मेथेनॉल, इथेनॉल या ब्लीच घर की सतह पर वायरस मार सकते हैं लेकिन हमारे शरीर के भीतर नहीं, बल्कि बिना सोचे-समझे ऐसा करना जानलेवा भी हो सकता है.

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    Tags: Corona, Coronavirus, Coronavirus in India, Coronavirus pandemic, Coronavirus Update, Coronavirus vaccine, WHO

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