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कौन हैं MP के गवर्नर लालजी टंडन, जिन पर टिकी हैं अब सबकी निगाहें

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार पर संकट के बादलों के समय सबकी नज़रें राज्यपाल लालजी टंडन पर सबसे ज़्यादा टिकी हैं, लेकिन टंडन के बारे में आप क्या जानते हैं? क्या आपको याद है साड़ी कांड, मायावती की राखी, 'अनकहा लखनऊ' और..?

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार पर संकट के बादलों के समय सबकी नज़रें राज्यपाल लालजी टंडन पर सबसे ज़्यादा टिकी हैं, लेकिन टंडन के बारे में आप क्या जानते हैं? क्या आपको याद है साड़ी कांड, मायावती की राखी, 'अनकहा लखनऊ' और..?

मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार पर संकट के बादलों के समय सबकी नज़रें राज्यपाल लालजी टंडन पर सबसे ज़्यादा टिकी हैं, लेकिन टंडन के बारे में आप क्या जानते हैं? क्या आपको याद है साड़ी कांड, मायावती की राखी, 'अनकहा लखनऊ' और..?

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के इस्तीफे के बाद मौजूदा कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) पर संकट के बादल घिर आए हैं. ऐसे में एक तरफ कांग्रेस सरकार बचाने तो दूसरी तरफ भाजपा सरकार बनाने की कोशिशों में जुटी है. लेकिन, इन परिस्थितियों में मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन (Lalji Tandon) अवकाश पर हैं, हालांकि उन्होंने कहा है कि वह हर गतिविधि पर नज़र रखे हुए हैं लेकिन अवकाश से लौटकर ही वह कोई कदम उठाएंगे.

मध्य प्रदेश की जनता हो या राजनीतिक गलियारे, सबकी नज़रें टंडन पर होंगी क्योंकि सरकार को लेकर राज्यपाल होने के नाते उनकी भूमिका सबसे बड़ी होगी. ऐसे में आपको जानना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में गुणाभाग कर गठजोड़ की सरकार बनाने की बात रही हो या साड़ी कांड में हुई किरकिरी की, लालजी टंडन को लेकर कौन से किस्से अब भी यादों के झरोखों से झांकते हैं.

वाजपेयी के रहे बेहद नजदीकी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ टंडन अपने रिश्ते को कई बार कई मंचों से साझा कर चुके हैं. टंडन कह चुके हैं कि राजनीति और जीवन में वाजपेयी ने उनके साथी, भाई ओर पिता की भूमिका अदा की. वह कई बार ये भी कह चुके कि वह जो भी कुछ हैं, उसका बड़ा श्रेय वाजपेयी का है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीति से दूर होने के बाद साल 2009 में लखनऊ लोकसभा सीट भाजपा ने टंडन को ही सौंपी थी.

संघ से संबंध और जेपी आंदोलन
महज़ 12 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर 1960 में टंडन का राजनीति का सफर शुरू किया. पार्षद से लेकर राज्यपाल तक उन्होंने कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां संभालीं. 1970 के दशक में इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ जयप्रकाश नारायण के राष्ट्रव्यापी आंदोलन में भी टंडन ने हिस्सा लिया था.

गठजोड़ की सरकार का प्रयोग
लालजी टंडन को उत्तर प्रदेश की राजनीति में अलग अलग किस्म के प्रयोगों के लिए जाना जाता रहा. 90 के दशक में उत्तर प्रदेश में भाजपा और बहुजन समाज पार्टी की गठबंधन सरकार के पीछे टंडन की ही भूमिका मानी जाती रही.

मायावती के राखी भाई
जी हां, उत्तर प्रदेश में गठजोड़ की सरकार बनने के समय 90 के दशक में लालजी टंडन को राखी बांधतीं मायावती की तस्वीर काफी चर्चित हुई थी. दोनों भाई बहन के रिश्ते में बंधे थे लेकिन समय के साथ साबित यही हुआ कि यह रिश्ता सियासी मौके की एक नज़ाकत भर था, और कुछ नहीं.

साड़ी कांड में टंडन की किरकिरी
साल 2004 में आम चुनाव से पहले जब वाजपेयी का नामांकन लखनऊ लोकसभा सीट से दाखिल हो चुका था, तब अपने जन्मदिन के मौके पर टंडन ने गरीब जनता में मुफ्त साड़ियां बांटने का आयोजन किया. बड़े पैमाने पर हुए कार्यक्रम में मची भगदड़ में 21 महिलाओं व एक बच्चे की जान गई थी. टंडन पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप लगे और वाजपेयी को भी विपक्ष ने निशाना बनाया. इस कांड को लेकर टंडन की राजनीतिक साख की काफी किरकिरी हुई थी.

ऐसे लगा था भाजपा की मान्यता पर प्रश्नचिह्न!
साड़ी कांड को लेकर विपक्ष और मीडिया के हंगामे के बाद टंडन के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था. यहां तक कि चुनाव आयोग ने भाजपा से स्पष्टीकरण मांगते हुए यहां तक कह दिया था कि क्यों न पार्टी की मान्यता रद्द कर दी जाए? तब भाजपा ने इस कांड से पल्ला झाड़ते हुए इसे टंडन का निजी कार्यक्रम बताया था. हालांकि यह मामला कुछ दिनों में ठंडा हो गया और बाद में इस कांड में टंडन को क्लीनचिट भी दे दी गई थी.

किताब से भी विवाद
टंडन ने 'अनकहा लखनऊ' किताब लिखकर भी कुछ विवाद खड़े कर दिए थे. इस किताब में टंडन ने लखनऊ की संस्कृति को लेकर लिखा था कि इसे जबरन 'नवाबी तहज़ीब का शहर' बनाने की कोशिशें की गईं. लक्ष्मण टीले के ज़िक्र में टंडन ने लिखा था कि यहां पहले एक गुफा थी, जिस पर मुस्लिम शासकों ने मस्जिद बनवा दी. इस तरह के तमाम तथ्यों से विवाद खड़े हुए.
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