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गुजरात में मूंग दाल की खिचड़ी खाने के बाद क्या था जहांगीर का रिएक्शन

खिचड़ी को खाते ही बादशाह जहांगीर ने कहा-वाह, क्या स्वाद है

खिचड़ी को खाते ही बादशाह जहांगीर ने कहा-वाह, क्या स्वाद है

मुगल बादशाह मांसाहारी खाने के शौकीन थे. आमतौर पर शाकाहारी खानों का स्वाद उन्हें समझ में नहीं आता था. जब बादशाह जहांगीर ...अधिक पढ़ें

    मकर संक्रांति पर खिचड़ी ना हो ऐसा तो हो नहीं सकता. यूं भी भारतीय खिचड़ी अब ग्लोबल फूड बन चुकी है. ये सेहदमंद भी है और स्वादिष्ट भी. खिचड़ी ऐसा व्यंजन है, जिसे जब मुगल बादशाह जहांगीर ने चखा तो वो भी इसका दीवाना हो गया. हालांकि पहले उसका मानना था कि ये खाना भारत में गरीब लोग खाया करते हैं.

    जहांगीर गुजरात की यात्रा पर गए हुए थे. वहां उन्होंने एक गांव में लोगों को कुछ खाते देखा. ये कुछ अलग था. बादशाह की भी उसे खाने की इच्छा हुई. जब उन्हें ये व्यंजन परोसा गया तो उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने कहा-वाह, ये तो लाजवाब है. ये खिचड़ी थी. मूंग दाल की खिचड़ी, जिसमें चावल की जगह बाजरे का इस्तेमाल किया गया था.

    बादशाह को लगा कि ये व्यंजन मुगल पाकशाला में भी पकना चाहिए. तुरंत एक गुजराती रसोइया शाही पाकशाला के लिए नियुक्त किया गया. खिचड़ी शाही महल में जा पहुंची. वहां इस पर और प्रयोग हुए. वैसे कुछ लोग कहते हैं कि खिचड़ी को दरअसल शाहजहां ने मुगल किचन में शामिल किया. मुगल बादशाहों को कई तरह की खिचड़ी पेश की जाती थी.

    ड्राइ फ्रूट्स की लाजवाब खिचड़ी
    मुगल पाकशाला में एक खास किस्म की खिचड़ी विकसित की गई. जिसमें ड्राइ फ्रूट्स, केसर, तेज पत्ता, जावित्री, लौंग और अन्य मसालों का इस्तेमाल किया जाता था. जब ये पकने के बाद दस्तरखान पर आती थी, तो इसकी लाजवाब सुगंध गजब ढाती थी. भूख और बढ़ जाती थी. जीभ पर पानी आने लगता था. तब इसके आगे दूसरे व्यंजन फीके पड़ जाते थे.

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    खिचड़ी के जायके
    आमतौर पर खिचड़ी विशुद्ध शाकाहारी व्यंजन है लेकिन मुगलकाल में मांसाहारी खिचड़ी का भी सफल प्रयोग हुआ, जिसे हलीम कहा गया. बंगाल में त्योहारों के दौरान बनने वाली खिचड़ी तो बहुत ही खास जायका लिए होती है- इसमें बादाम, लौंग, जावित्री, जायफल, दालचीनी, काली मिर्च मिलकर इसे इतना स्वादिष्ट स्वाद देते हैं कि पूछना ही क्या.

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    शुद्ध आयुर्वेदिक खाना
    असल में ये हानिरहित शुद्ध आयुर्वेदिक खाना है, जायके और पोषकता से भरपूर. वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो जब चावल और दालों को संतुलित मात्रा में मिलाकर पकाते हैं तो एमिनो एसिड तैयार होता है, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी है. कहा जाता है कि इससे बेहतर प्रोटीन कुछ है ही नहीं. मूल रूप से खिचड़ी का मतलब है दाल और चावल का मिश्रण.

    खिचड़ी तेरे कितने रूप
    क्या आपको मालूम है कि इसका असली उदगम कहां था. कहा जाता है कि इसकी शुरुआत दक्षिण भारत में हुई थी. कुछ कहते हैं कि इसे मिस्र की मिलती जुलती डिश खुशारी से प्रेरणा लेकर बनाया गया था.अब भी आप गुजरात से लेकर बंगाल तक चले जाइए या पूरे देश या दक्षिण एशिया में घूम आइए, हर जगह खिचड़ी जरूर मिलेगी लेकिन अलग स्वाद वाली. महाराष्ट्र में झींगा मछली डालकर एक खास तरह की खिचड़ी बनाई जाती है. गुजरात के भरूच में खिचड़ी के साथ कढ़ी जरूर सर्व करते हैं. इस खिचड़ी में गेहूं से बने पतले सॉस, कढी पत्ता, जीरा, सरसों दाने का इस्तेमाल किया जाता है.अंग्रेजों ने भी खिचड़ी को अपने तरीके से ब्रितानी अंंदाज में रंगा. उन्होंने इसमें दालों की जगह उबले अंडे और मछलियां मिलाईं. साथ ही क्रीम भी। फिर इस बदली डिश को नाम दिया गया केडगेरे-खास ब्रिटिश नाश्ता.

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    इब्ने बबूता की नजर में ये व्यंजन
    एलन डेविडसन अपनी किताब आक्सफोर्ड कम्पेनियन फार फूड में लिखते हैं सैकड़ों सालों से जो भी विदेशी भारत आता रहा, वो खिचड़ी के बारे में बताता रहा. अरब यात्री इब्ने बबूता वर्ष 1340 में भारत आए. उन्होंने लिखा, मूंग को चावल के साथ उबाला जाता है, फिर इसमें मक्खन मिलाकर खाया जाता है. हालांकि दुनियाभर में खिचड़ी लोकप्रिय करने का श्रेय हरे कृष्ण आंदोलन की किताब हरे कृष्ण बुक ऑफ वेजेटेरियन कुुकिंग को देना चाहिए.

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    आइन-ए-अकबरी की खिचड़ी
    आइन-ए-अकबरी में अबुल फजल ने यूं तो खिचड़ी बनाने की सात विधियों का जिक्र किया है, लेकिन मूल खिचड़ी यानि सादी खिचड़ी की विधि कुछ यूं बताई गई
    पांच कटोरी चावल
    पांच कटोरी दाल
    पांच कटोरी घी
    नमक स्वादानुसार
    अगर आप खिचड़ी बनाने जा रहे हों तो जरा एक बार इस तरीके का इस्तेमाल करके भी देखें-
    आधी कप मूंग दाल
    एक कप चावल
    3 से 4 कप पानी, या आवश्यकतानुसार
    चौथाई चम्मच जीरा
    3 से 4 तेज पत्ता
    3 से 4 लौंग
    नमक स्वादानुसार

    बनाने की विधि
    चावल और दाल को अलग अलग कुछ घंटे के लिए भिगोएं. फिर पानी में छान लें. तीन से चार चम्मच तेल या घी लें और इसे तेज पत्ता, लौंग लेकर कुछ सेकेंड तक फ्राइ करें. फिर इसमें धीरे धीरे दाल और चावल मिलाएं. इसे आठ से दस मिनट फ्राइ करें. अब इसमें और पानी मिलाएं. मध्यम आंच पर बंदकर पकाएं. फिर कुछ देर बाद आंच धीमी करें. पकने दें. जब तक चावल और दाल पक नहीं जाते. अगर जरूरत हो तो और पानी मिला सकते हैं. अगर आप चाहें पतली पतली सब्जियां मसलन-पालक, टमाटर, गोभी, मटर भी मिला सकते हैं लेकिन ये काम तभी करें जब खिचड़ी तीन चौथाई पक गई हो.

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    Khichdi with ghee


    असली आनंद तो तभी है
    अब इस पर भुना हुआ जीरा, हरी धनिया के पत्ते और पतली कटी प्याज ऊपर से छिड़क सकते हैं. हां, खिचड़ी का असली आनंद तभी है, जब इसे शुद्ध गरम घी, रायता, दही, पापड़, चटनी, अचार, आलू का भरता और सलाद के साथ सर्व करें. वाह तब तो इसके स्वाद के कहने ही क्या. अगर चाहें तो कई तरह की चटनी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इस खाने का जो स्वाद आपकी जीभ पर आएगा, उसे आप शायद सालों याद रखेंगे.

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    Tags: Food business, Food diet, Food Recipe, Gujarat, Healthy Foods, Makar Sankranti, Vegetables

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