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'मंडल के मसीहा' वीपी सिंह के खिलाफ मुलायम ने लड़ी थी राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई

News18Hindi
Updated: November 22, 2019, 11:06 AM IST
'मंडल के मसीहा' वीपी सिंह के खिलाफ मुलायम ने लड़ी थी राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई
1980 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे विश्वनाथ प्रताप सिंह के खिलाफ मुलायम ने शायद अपने जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ी थी.

1980-82 में मुख्यमंत्री (Chief Minister) रहते हुए वीपी सिंह (Vishwanath Pratap Singh) ने चंबल और यमुना के बीहड़ों से डकैतों के सफाए के लिए बड़ा अभियान छेड़ा था. पुलिस को खुले हाथों से डकैतों को पकड़कर मारने की छूट दे दी गई थी. किसी पर अगर डकैतों का साथ देने का शक भी होता था तो पुलिस उससे सख्ती से निपटती थी. डकैतों के खिलाफ छेड़े गए इस अभियान में मुलायम बेहद आसान टारगेट बन गए.

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  • Last Updated: November 22, 2019, 11:06 AM IST
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नई दिल्ली. दशकों तक उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और दिल्ली (Delhi) की राजनीति में सत्ता की धुरी बने रहने वाले मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का आज 81वां जन्मदिन है. लंबे राजनीतिक जीवन में मुलायम सिंह यादव ने कई राजनीतिक लड़ाइयां लड़ीं और जीतीं लेकिन शायद उनके जिंदगी की सबसे मुश्किल लड़ाई वीपी सिंह के खिलाफ थी. तब वीपी सिंह यूपी के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. इटावा के कद्दावर कांग्रेसी नेता बलराम सिंह यादव और मुलायम के बीच जबरदस्त सियासी रंजिश थी जिसने कई लोगों की जान ली. अस्सी के दशक में दर्शन सिंह बनाम मुलायम की जंग के किस्से लोग आज भी याद करते हैं.

डकैतों के खिलाफ वीपी सिंह के अभियान में आसान निशाना बने थे मुलायम
1980-82 में मुख्यमंत्री रहते हुए वीपी सिंह ने चंबल और यमुना के बीहड़ों से डकैतों के सफाए के लिए बड़ा अभियान छेड़ा था. पुलिस को खुले हाथों से डकैतों को पकड़कर मारने की छूट दे दी गई थी. किसी पर अगर डकैतों का साथ देने का शक भी होता था तो पुलिस उससे सख्ती से निपटती थी. डकैतों के खिलाफ छेड़े गए इस अभियान में मुलायम बेहद आसान टारगेट बन गए.

वीपी सिंह के साथ मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक अदावत लंबी चली.
वीपी सिंह के साथ मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक अदावत लंबी चली.


उस वक्त ही इंदिरा गांधी को पिछड़े वर्ग के एक बड़ी राजनीतिक ताकत के तौर पर उभरने का एहसास हुआ. चौधरी चरण सिंह पिछड़े वर्ग की उस ताकत के प्रतीक थे. मुलायम सिंह यादव...चौधरी चरण सिंह के शागिर्द थे और उनका उस वक्त राजनीतिक भविष्य उज्जवल दिख रहा था.

इटावा, एटा, कानपुर, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनैतिक बीहड़ों में जिसके पास बाहुबल होता था, वही राजनीति का सितारा माना जाता था. 1980 के दशक में पिछड़े वर्ग की राजनीति जोर पकड़ रही थी. मुलायम जैसे पिछड़े वर्ग के नेता राजनीति में राजपूत और ब्राह्मण नेताओ को चुनौती दे रहे थे.

उस दौर में मुलायम सिंह यादव अपनी राजनीति के बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे थे. वो रोज एक सियासी मोर्चे पर जंग लड़ते हुए आगे बढ़ रहे थे. अगले कुछ सालों में मुलायम ने खुद को 'मंडल मसीहा' के तौर पर पेश किया और पिछड़े वर्ग के लोगों हितों के सबसे बड़े संरक्षक बनकर उभरे.
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शिवपाल सिंह यादव ने बड़े भाई को बचाने के लिए उस दौरान कई बार जान की बजाई लगाई थी.
शिवपाल सिंह यादव ने बड़े भाई को बचाने के लिए उस दौरान कई बार जान की बजाई लगाई थी.


संघर्ष के साथी शिवपाल
संघर्ष के उन दिनों में मुलायम के सबसे करीबी सूबेदार थे शिवपाल यादव. शिवपाल ने भाई की जान बचाने के लिए कई बार खुद की जान की बाजी लगाई. वीपी सिंह ने डकैतों के खिलाफ अभियान छेड़ा तो उन्होंने पुलिस को हत्याओं की छूट दे दी. वीपी सिंह ने इस एक कदम ने प्रशासन का अपराधीकरण कर दिया. तब से ही मुलायम सिंह यादव और कांग्रेस आमने-सामने नजर आए. मुलायम की हर राजनैतिक लड़ाई कांग्रेस के खिलाफ होती थी. इसका अपवाद सिर्फ नारायण दत्त तिवारी थे. नारायणदत्त तिवारी का समाजवाद के प्रति झुकाव मुलायम के अपने राजनीतिक सिद्धांतों के अनुकूल था.

यही वजह है कि मुलायम ने कभी भी वी पी सिंह को माफ नहीं किया. हालांकि, दोनों ने नब्बे के दशक में मिलकर काम किया और कांग्रेस के खिलाफ सियासी लड़ाई लड़ी. जब वीपी सिंह ने राजीव गांधी से बगावत की तो मुलायम उनके साथ आए.

तीन बार रहे यूपी के मुख्यमंत्री और एक बार देश के रक्षा मंत्री
उनका प्रधानमंत्री बनने का सपना भले ही अभी भी अधूरा हो पर उन्होंने सियासी दांव में सभी को मात दी है. 1977 में वो उत्तर प्रदेश में पहली बार मंत्री बने, कॉ-ऑपरेटिव और पशुपालन विभाग संभाला. इसके बाद 1980 में उन्होंने लोकदल का अध्यक्ष पद संभाला. यही नहीं उन्होंने 1985-87 में उत्तर प्रदेश में जनता दल का अध्यक्ष पद भी संभाला. 1989 में वो पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी की स्थापना की. 1993-95 में वो दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री बने और 1996 में मैनपुरी से 11वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री का पद संभाला. 2019 के लोकसभा चुनाव में मुलायम ने मैनपुरी से जीत हासिल की और सातवीं बार सांसद बने.

 

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First published: November 22, 2019, 9:26 AM IST
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