खुद कितने बेदाग रहे परमबीर सिंह? जिनके करप्शन वाले आरोपों से हिली महाराष्ट्र सरकार

मुंबई के एक्स पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह

मुंबई के एक्स पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह

अंडरवर्ल्ड (Underworld) और मुंबई पुलिस (Mumbai Police) का रिश्ता हमेशा चर्चित रहा है और बेहद फिल्मी भी. महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) के साथ उलझे मुंबई पुलिस के कप्तान की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 21, 2021, 8:06 AM IST
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आपने अंडरवर्ल्ड पर आधारित चर्चित फिल्म 'अब तक छप्पन' (Ab Tak Chhappan) देखी है तो ज़रा क्लाइमेक्स याद कीजिए जब एनकाउंटर स्पेशलिस्ट (Encounter Specialist) पुलिस अफसर के पद से हटने के बाद उसके साथी सिस्टम में भ्रष्टाचार (Corruption Charges) के आरोप लगाते हैं. इन दिनों मुंबई में कुछ इसी तरह की कहानी सामने आ रही है. उद्योगपति अंबानी (Ambani House) के घर के बाहर विस्फोटक मिलने के केस में गिरफ्तार वाझे के मामले में एक्स कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के सीएम (Uddhav Thackeray) को लिखे पत्र में गृह मंत्री अनिल देशमुख पर भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, तो देशमुख ने पलटवार किया.

अब तक छप्पन में जब सिस्टम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं, तो पलटवार किया जाता है कि फिल्म के हीरो यानी पद से हटे अफसर के ही संबंध अंडरवर्ल्ड से हैं. इसी तरह, देशमुख ने भी सिंह पर पलटवार करते हुए कहा कि सचिन वाझे का कनेक्शन संवेदनशील मामलों से जुड़ रहा है और सिंह को डर है कि आंच उन तक पहुंचेगी इसलिए वो ऊलजलूल आरोप लगा रहे हैं.

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आखिर कौन हैं परमबीर सिंह?
अब इस आरोप प्रत्यारोप की बात कहां तक पहुंचेगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल दिलचस्पी यह है कि पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह कौन हैं? जिन्होंने सीधे पॉलिटिक्स से टकराने की जुर्रत की है. एलगार परिषद जांच हो या अजीत पवार के स्कैम की जांच, सिंह के साथ विवाद भी जुड़े रहे हैं. उनके बारे में जानने की कई बाते हैं, शुरू से जानिए.

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महाराष्ट्र के होम मिनिस्टर देशमुख ने सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए मानहानि का दावा करने की बात कही.


1988 बैच के आईपीएस अफसर सिंह 1990 के दशक के 'एनकाउंटर स्पेशलिस्टों' में शुमार रहे हैं, जो अब तक सेवा में रहे. कहा जाता है कि सिंह अपने फर्ज़ निभाने के लिए डरे बगैर काम करने वाले अफसर रहे हैं, जबकि अपने सहयोगियों के लिए बेहद मददगार. उनके सहयोगी भी कह चुके हैं कि वो ऐसे अफसर रहे जिन्होंने राजनीतिक दबाव खुद झेले, अपनी टीम पर आंच नहीं आने दी.



अंडरवर्ल्ड से लड़ाई ने दिलाई शोहरत

1 मार्च 2020 को जब सिंह ने मुंबई पुलिस कमिश्नर पद संभाला था, तब उन्होंने याद किया था कि कैसे उन्होंने मुंबई के बचे अंडरवर्ल्ड को खत्म करने का बीड़ा उठाया था और खून में सनी गैंग वॉर उनके समय में उनकी उपलब्धियों की यादें बनीं. गैंग्स को खत्म करने के लिए हुए लड़ाइयों के पीछे सिंह की बड़ी भूमिका बताई जाती है.

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जब सिंह मुंबई के डिप्टी पुलिस कमिश्नर रहे, तब 1990 के दशक के आखिर तक मुंबई में दाऊद इब्राहीम, अरुण गवली और छोटा राजन जैसे डॉन्स के गैंग्स काफी सक्रिय रहे थे. मारे गए पत्रकार और अंडरवर्ल्ड पर प्रामाणिक लेखक जे डे ने भी अपनी किताब खल्लास में सिंह की भूमिका का उल्लेख किया.

मुंबई पुलिस के शार्पशूटर कहे जाने वाले विजय सालस्कर और प्रफुल्ल भोसले भी डायरेक्ट सिंह की टीम में ही रहे थे. गवली और राजन के गैंग्स के पीछे सिंह तब तक पड़े रहे, जब तक ये डॉन्स सलाखों के पीछे नहीं पहुंच गए. दाऊद के भाई इकबाल कासकर की गिरफ्तारी भी सिंह की बड़ी उपलब्धि रही थी.

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मुंबई अंडरवर्ल्ड की गैंग वॉर में सिंह की भूमिका रही.


क्या है सिंह का बैकग्राउंड?

चंडीगढ़ में 1962 को जन्मे सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में एमए टॉप किया था. इसके बाद वो पुलिस सेवा में आए थे और महाराष्ट्र आईपीएस क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे थे. 32 साल के पुलिस करियर में सिंह ने कई अहम भूमिकाएं निभाईं. इनमें एंटी करप्शन ब्यूरो और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई भी शामिल रही.

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कहा जाता है कि 2022 में रिटायर होने जा रहे सिंह के जूनियर उन्हें एक बेहतरीन और सहयोगी अफसर के तौर पर हमेशा बहुत सम्मान देते रहे हैं. उनके अधीनस्थ उन्हें अपना प्रेरणास्रोत भी बताते रहे हैं.

कैसा रहा विवादों से रिश्ता?

तमाम उपलब्धियों के बीच सिंह का दामन पूरी तरह बेदाग नहीं रहा. 2018 में एलगार परिषद की जांच के मामले में जब नामी वकीलों और एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी हो चुकी थी और केस कोर्ट में था, तब सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कई सबूत मीडिया के सामने रख दिए थे. बाद में इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त ऐतराज़ जताते हुए उन्हें खासी फटकार लगाई थी.

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परमबीर सिंह की जगह हाल ही हेमंत नगरले मुंबई कमिश्नर बने.


सैकड़ों करोड़ के सिंचाई घोटाले के मामले में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री अजीत पवार को क्लीन​ चिट देने के मामले ने तूल पकड़ा था. अस्ल में एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रमुख जब सिंह थे, तब यह क्लीन चिट दी गई थी, जबकि इसके एकदम उलट एक साल पहले ब्यूरो ने पवार को भ्रष्टाचार का आरोपी माना था.

यही नहीं, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, जो अब सांसद हैं, को भी 2008 में सिंह की टीम ने ही मालेगांव बम धमाके के केस में पकड़ा गया था. प्रज्ञा ने सिंह समेत कई अफसरों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे. 26/11 के आतंकी हमलों के समय पुलिस की गतिविधि को लेकर मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर हसन गफूर के आरोपों के चलते भी सिंह विवादों में रहे थे.
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