मुंबई की इस किन्नर को चीन में क्यों मिल रही है तवज्जो

मुंबई की एक 28 साल की किन्नर स्नेहा काले देश की पहली ट्रांसजेंडर है, जो लोकसभा चुनाव लड़ रही है. वो कामर्स ग्रेजुएट है. वो कई वायदे कर रही हैं

News18Hindi
Updated: April 27, 2019, 10:43 PM IST
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चीन के बड़े अखबार साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने मुंबई के एक ट्रांसजेंडर पर एक खास रिपोर्ट छापी है. विदेशी मीडिया भी उन पर खबरें कर रहा है. वजह ये है कि वो मुंबई में लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं और बड़े पैमाने पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं. उनका नाम स्नेहा काले है. वो खास वायदे भी कर रही हैं.

स्नेहा पूर्वी मुंबई की घनी स्लम बस्ती रामाबाई कॉलोनी में दो कमरे के मकान में रहती हैं. ये आमतौर पर दलितों की बस्ती है. यहां का बच्चा-बच्चा स्नेहा को जानता है. चूंकि वो अचानक खबरों में आ गई हैं, इसलिए लोग उन्हें और भी जान रहे हैं. क्योंकि वो मुंबई नार्थ सेंट्रल से चुनाव लड़ रही हैं. इस सीट पर उनका मुकाबला दो हैवीवेट नेताओं कांग्रेस की प्रिया दत्त और बीजेपी की पूनम महाजन से होना है.



स्नेहा 28 साल की है. वो मुंबई के लोकसभा चुनावों में खड़ी होने वाली पहली ट्रांसजेंडर है. हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि इस संसदीय चुनाव में खड़ी वो देशभर की अकेली किन्नर भी हैं. मुंबई महानगर की छह लोकसभा सीटों पर 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे.

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उसका एजेंडा बहुत साफ है- जो सोशल वेलफेयर से जुड़ा है. वो सबकी बात करती हैं, खासकर किन्नर समुदाय की ज्यादा-बूढे ट्रांसजेंडर्स के लिए पेंशन और समाज में समानता के साथ नौकरी. उन्होंने चीन के मीडिया से बातचीत में कहा, मैं चुनाव लड़ रही हूं, क्योंकि हमारे उपेक्षित समुदाय को लाभ मिल सके.
गौरतलब है कि 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर्स को तीसरे जेंडर के तौर मान्यता दी थी. लेकिन अब भी उनके साथ भेदभाव जारी है.

स्नेहा चुनावों में ट्रांसजेंडर को समानता दिलाने का वादा कर रही हैं. साथ ही उम्रदराज किन्नरों को पेंशन दिलाने की बात भी कह रही हैं

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कॉमर्स में ग्रेजुएट 
काले कामर्स में ग्रेजुएट हैं, वो सड़कों पर भीख भी मांग चुकी हैं और सेक्स वर्क भी करने को बाध्य रही हैं. पहले उन्हें सागर नाम के लड़के के रूप में बड़ा किया गया लेकिन उन्हें महसूस होने लगा कि वो कुछ अलग हैं.

घर से छिपकर लड़कियों के कपड़े पहन डांस करने लगीं
वो कहती हैं, उन्हें डांस करना पसंद आता था. वो गुपचुप तरीके से लड़कियों के कपड़े पहन कर स्टेज पर डांस करने लगी. बाल बढ़ा लिये. आईब्रो करने लगीं. जब उन्होंने ऐसा करना शुरू किया तो परिवार को पसंद नहीं आया. हालांकि डांस करने पर उन्हें अवार्ड भी मिलने लगे. एक दिन जब उनकी तस्वीर अवार्ड लेते हुए अखबार में छपी तब पेरेंट्स को इसका पता चला. उन्हें तभी पता चला, मैं उनसे छिपकर कई सालों से डांस कर रही थी.

स्नेहा काले शायद अकेली ट्रांसजेंडर हैं, जो देश में लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं (फोटो साभारः साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट)


19 की उम्र में घर छोड़ दिया
इसके बाद परिवार ने किनारा करना शुरू किया. 19 साल की होने पर उन्होंने घर छोड़ दिया. इसके बाद उनके काफी संघर्ष वाला था. भीख भी मांगनी पड़ी. शुरू में तो परिवार ने सारे रिश्ते ही खत्म कर दिये थे लेकिन अब उन्होंने मिलना जुलना शुरू किया है लेकिन भाई दूर ही रहता है.

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जब किसी ने दस रुपया हाथ पर रखा..
अब वो अपने चुनावी अभियान में घर घर जा रही हैं. छोटी बैठकें कर रही हैं. जब वो अपने चुनावी अभियान पर थीं तो एक शख्स ने उनके हाथ पर 10 रुपए का नोट रख दिया, उसको लगा वो मदद मांगने आई हैं. तब स्नेहा ने मुस्कुराहट के साथ इसे वापस कर दिया, मैं मदद के लिए नहीं बल्कि वोट मांगने आई हुई हूं.

स्नेहा को इन दिनों मीडिया में खासी कवरेज मिल रही है


अखबारों में छप रही है फोटो
काले के पास कुछ संपत्ति 15 हजार रुपए की है-और ऐसी चुनावी मशीनरी भी नहीं कि वो 16 लाख वोटर्स तक पहुंच सकें. काले का कहना है कि जीत उनके लिए पैरामीटर नहीं है बल्कि उन्हें मिला हर वोट का मतलब उनकी स्वीकार्यता का बढना. अब जब उनका नाम अखबारों में छप रहा है और विदेशी मीडिया उनके पास आ रहा है तो उन्हें लग रहा है कि चुनाव मैदान में उतरकर उन्होंने सही काम किया है. लोग अब उन्हें बखूबी जान रहे हैं.

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