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कम हो रही है देश में क्रूरता, हत्या दर 54 साल में सबसे कम

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Updated: October 23, 2019, 12:42 PM IST
कम हो रही है देश में क्रूरता, हत्या दर 54 साल में सबसे कम
हत्या दर पिछले 54 साल में सबसे कम रहा है

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने देशभर में होने वाली हत्याओं को लेकर आंकड़े जारी किए हैं. आकड़ों के मुताबिक साल 2017 में हत्या दर (murder rate) 54 साल में सबसे कम रही...

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  • Last Updated: October 23, 2019, 12:42 PM IST
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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau) के ताजा आंकड़ों में कुछ चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. मसलन साल 2017 में मर्डर रेट (murder rate) या हत्या दर पिछले 54 वर्षों में सबसे कम रहा है. देशभर में जिस तरह से क्राइम हो रहे हैं, उसमें इस बात पर यकीन करना मुश्किल जान पड़ता है. लेकिन ये हकीकत है कि देश में प्रति लाख व्यक्ति पर होने वाले हत्या के मामलों में कमी आई है और ये कमी लगातार देखने में आ रही है. 1963 के साल को छोड़ दें तो हत्या का दर 1957 के बाद से सबसे कम है. एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों से इसकी जानकारी मिली है.

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में प्रति लाख व्यक्ति पर होने वाली हत्या का दर 2.49 दर्ज किया गया है. ये 1963 के बाद सबसे कम है. साल 1957 में प्रति लाख व्यक्ति पर होने वाली हत्या का दर 2.57 था. इसके बाद सिर्फ 1963 में हत्या दर सबसे कम दर्ज किया गया. 1963 में ये आंकड़ा 2.34 था. उसके बाद 2017 में ये आंकड़ा (2.49) सबसे कम है.

1992 में हत्या की दर सबसे अधिक

प्रति लाख व्यक्ति पर हत्या की दर सबसे ज्यादा 1992 में दर्ज की गई. 1992 में ये दर 5.15 थी. 1992 के इस दर के बाद मर्डर रेट में लगातार कमी दर्ज की गई है. 2017 में ये सबसे कम 2.49 रिकॉर्ड की गई. हत्या की दर कम रहने से ये नहीं कहा जा सकता है कि क्राइम घटे हैं. क्राइम रेट बढ़े ही हैं. लेकिन प्रति लाख व्यक्ति पर पहले जितने हत्या के मामले सामने आते थे, उनमें कमी आई है.

1950 के बाद हत्या की दर सबसे कम हुई है. मर्डर रेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कमी आई है. दुनिया के हर देश के मर्डर रेट में कमी आई है. हर गुजरते साल के साथ इसमें कमी दर्ज की जा रही है.

murder rate decreased in india in ncrb latest data know full details of national crime record bureau report
हत्या के मामलों में भी कमी आई है


1957 से लेकर 1970 तक सबसे शांत साल रहे
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हाल के दिनों का आकलन करें तो 1957 से लेकर 1970 के बीच के 14 वर्ष हत्या दर के नजरिए से सबसे शांत साल रहे. इन वर्षों में प्रति लाख व्यक्ति पर हत्या की दर तीन से कम रही. 1970 के बाद से इसमें बढ़ोत्तरी आनी शुरू हुई. 1992 में जाकर ये अपने सर्वोच्च स्तर पर थी. 1992 में मर्डर रेट 1950 की तुलना में 75 फीसदी ज्यादा थी. उस साल सबसे ज्यादा हत्याएं भी हुईं.

1992 के बाद मर्डर रेट में लगातार गिरावट दर्ज की गई. 2013 तक आते-आते ये प्रति लाख व्यक्ति पर 3 हत्या के मामले पर आ गया. इसके बाद ये लगातार तीन से नीचे ही रहा.

1992 में जब मर्डर रेट सबसे अधिक थे तो हत्या के सबसे ज्यादा मामले यूपी से सामने आए. 1992 में हत्या और जानलेवा हमले के 12,287 मामले सामने आए. इसके बाद बिहार का नंबर रहा. बिहार में 5,743 हत्या के मामले सामने आए. इसके बाद मध्य प्रदेश (3,753 हत्याएं), महाराष्ट्र (3,338 हत्याएं) और आंध्र प्रदेश (2,841 हत्याएं) का नंबर रहा. इसके बाद के वर्षों में इन राज्यों की जनसंख्या तेजी से बढ़ी लेकिन हत्या दर में लगातार गिरावट दर्ज की गई.

हत्या के मामलों में भी आई है कमी

हत्या दर में ही नहीं बल्कि हत्या के मामलों में भी कमी आई है. एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि साल 2017 में हत्या के मामले पिछले साल की तुलना में 5.9 फीसदी कम थे. आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में हत्या के 28,653 मामले दर्ज हुए, जबकि साल 2016 में ये 30,450 थे.

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यूपी में सबसे ज्यादा हत्या के मामले सामने आए हैं


एनसीआरबी की रिपोर्ट में हत्या की वजहों का विश्लेषण भी किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा विवाद की वजह से हत्याएं हुई हैं. विवाद की वजह से मर्डर के 7,898 मामले दर्ज किए गए हैं. उसके बाद निजी रंजिश और व्यक्तिगत नफे के लिए हत्या के मामले सामने आए हैं.

यूपी में सबसे ज्यादा हत्याएं हुई हैं. हालांकि पिछले साल की तुलना में हत्या के मामलों में कमी आई है. यूपी में साल 2017 में हत्या के 4,324 मामले सामने आए, जबकि साल 2016 में इनकी संख्या 4,889 थी. इसके बाद बिहार का नंबर आता है. यहां साल 2017 में हत्या के 2,803 मामले दर्ज हुए जबकि साल 2016 में इनकी संख्या 2,581 थी. इसके बाद हत्या के मामले में महाराष्ट्र का नंबर आता है. यहां साल 2017 में हत्या के 2,103 मामले दर्ज हुए जबकि साल 2016 में इनकी संख्या 2,299 थी.

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First published: October 23, 2019, 12:42 PM IST
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