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म्यांमार या बर्मा : एक देश, दो अलग नाम, क्या है मतलब और कहानी?

म्यांमार का बर्मा नाम अब भी लिया जाता है.

म्यांमार का बर्मा नाम अब भी लिया जाता है.

आपको याद होगा कि स्कूलों कॉलेजों की किताबों में बर्मा नाम के देश के बारे में पढ़ा था और अगर आप उम्र के तीन दशक पार हैं तो यह भी याद होगा कि म्यांमार नाम बहुत पुराना नहीं है. अब भी दोनों नाम (One Nation Two Names) क्यों प्रचलित हैं?

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    सेना ने एक सोची समझी चाल के तहत धावा बोला (Military Coup) और कुछ समय से चल रहे आभासी लोकतांत्रिक शासन (Democratic Rule) को इस हफ्ते खत्म करके पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया. तख्तापलट के बाद सैन्य शासन लागू करते हुए सेना ने कहा कि ऐसा करना ज़रूरी था क्योंकि नवंबर में हुए चुनावों में वोटर फ्रॉड (Voter Fraud) के अप्रमाणित दावों पर एक्शन लेने में सरकार नाकाम रही. वास्तव में म्यांमार की नेता आंग सान सू की (Aung San Suu Kyi) ने भारी जीत हासिल करने के बाद कहा था कि टेकओवर पूरी तरह से वैधानिक था.

    यह पूरा तख्तापलट आखिर हुआ कहां, म्यांमार में या बर्मा में? इस देश का औपचारिक नाम म्यांमार हो चुका है लेकिन अमेरिका अब भी बर्मा ही नाम इस्तेमाल करता है. दो नामों के पीछे माजरा क्या है? इसका जवाब थोड़ा पेचीदा है क्योंकि म्यांमार में हर बात पर राजनीति होती है. फिर भी इसे आपको आसान शब्दों में बताते हैं.

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    एक देश के लिए दो नाम क्यों?
    पीढ़ियों से इस देश का नाम बर्मा ही था, जिसकी वजह यहां बर्मन नस्ल का होना था. लेकिन 1989 में अचानक एक घटना हुई और लोकतंत्र की जो मांग सर उठा रही थी, उसे कुचलने के लिए सत्ता पर काबिज़ सैन्य सरकार ने क्रूरता के साथ ही रणनीतिक चाल चली और देश का नाम बदलकर म्यांमार रख दिया.

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    इसका मकसद यह था कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में तकरीबन अछूत माने गए बर्मा की छवि को बदला जा सके. सैन्य सरकार ने दावा भी किया कि पुराना नाम औपनिवेशिक समय के कारण था और देश की सांस्कृतिक एकता के लिए नाम बदला गया. यहां तक कि राजधानी व अन्य शहरों के नाम भी बदल दिए गए. लेकिन इस बदलाव से बर्मा में क्या बदलाव आया?

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    म्यांमार की प्रो डेमोक्रैसी लीडर आंग सान सू की का पोस्टर.

    विशेषज्ञों ने एक तरफ यह कहा कि पुराना नाम बर्मा देश की कई और नस्लों या समूहों की अनदेखी करता था, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया कि नाम बदलने से देश के भीतर कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिला. नये नाम का इस्तेमाल न करने पर सैन्य शासन ने ज़ोर ज़बरदस्ती भी की लेकिन हुआ क्या? बर्मा की भाषा में नाम नहीं बदला, सिर्फ अंग्रेज़ी में नया नाम चलन में आया.

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    कैसे और कब बदले हालात?
    करीब एक दशक पहले की बात है जब इस देश में लोकतंत्र की थोड़ी बहुत बहाली हुई. मिलिट्री ने हालांकि ताकत अपने ही हाथ में रखी थी लेकिन विपक्षी नेताओं को जेलों से रिहा करने के साथ ही चुनावों को मंज़ूरी भी दी. लोकतंत्र आंदोलन खड़ा करने के लिए लंबे समय से जुटी रहीं सू की को देश के नागरिकों ने अपना नेता चुना.

    इससे हुआ ये कि अंतर्राष्ट्रीय हंगामा यहां की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कुछ कम हुआ. धीरे धीरे म्यांमार नाम प्रचलित होने लगा. कई देशों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने इसे एक तरह से अपना लिया. देश के भीतर विपक्ष के नेताओं ने भी इस नाम से कोई खास फर्क न पड़ने की बात कही. हालांकि अमेरिका ज़्यादातर बर्मा का नाम ही इस्तेमाल करता लेकिन 2012 में बराक ओबामा ने यहां यात्रा पर म्यांमार और बर्मा दोनों ही नाम इस्तेमाल​ किए.

    ओबामा की यात्रा के बाद म्यांमार के राष्ट्रपति के सलाहकार ने इसे बड़ा मोड़ बताते हुए कहा था कि म्यांमार की सरकार को दुनिया की मान्यता मिलना इससे ज़ाहिर हुआ.

    और अब क्या?
    तख्तापलट की ताज़ा घटना के बाद फिर इस देश को वही आलोचना झेलनी पड़ सकती है, जो कुछ सालों पहले तक हुआ करती थी. अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडन ने औपचारि​क नाम म्यांमार को दरकिनार करते हुए साफ इशारा दे दिया है कि पिछले दशक में बर्मा को जो आर्थिक मदद दी गई, वो इसलिए कि लोकतंत्र बहाली की दिशा में तरक्की हो.

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    लेकिन, अब लोकतंत्र के खिलाफ जो कदम इस देश ने उठाए हैं, उसके बाद अमेरिका विचार कर रहा है कि यह मदद जारी रखे जाए या रोकी जाए. अन्य कई देश, फिलहाल इस देश को म्यांमार के नाम से ही पुकारते और समझते हैं.

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