पुराने समय में मंदिरों में होती थी सम्मोहन क्रिया, बहुत खास था मकसद

पुराने समय में मंदिरों में होती थी सम्मोहन क्रिया, बहुत खास था मकसद
हिप्नोसिस में हम दुनिया को देखते तो हैं लेकिन एक छेद के जरिए (Photo-pxhere)

इजिप्ट और ग्रीस में सम्मोहन के लिए मंदिर (temple for hypnotism in Greece and Egypt) होते थे, जिन्हें स्लीप या ड्रीम टेंपल कहा जाता था. ये इलाज के काम आते थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2020, 4:44 PM IST
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दुनिया में कत्लेआम मचा देने वाले हिटलर के बारे में माना जाता है कि उसने सम्मोहन के प्रभाव में आकर कदम उठाए. पहले विश्वयुद्ध के बाद हिटलर कई बीमारियों का शिकार हो गया था, जिसमें से एक थी हिस्टीरियल ब्लाइंडनेस. डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार इलाज के दौरान हिटलर डॉ एडमंंड फॉस्टर (Dr Edmund Forster) के संपर्क में आया, जो कि दरअसल सम्मोहनकर्ता थे. इलाज के दौरान हिटलर मानने लगा कि उसे जर्मनी को सबसे आगे ले जाना है और फिर जो हुआ, वो दुनिया जानती है. ग्लानि में डूबे डॉक्टर ने बाद में खुदकुशी कर ली.

हिप्नोटिज्म की तुलना नींद से
सम्मोहन के बारे में कई तरह की बातें कही जाती हैं, जैसे इसमें सम्मोहित होने वाला शख्स सम्मोहनकर्ता की सारी बातें मानने लगता है. सम्मोहन को अंग्रेजी में Hypnosis या hypnotism भी कहते हैं. अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (American Psychological Association) के अनुसार सम्मोहन मस्तिष्क की वो अवस्था है जिसमें ध्यान ज्यादा एकाग्र हो जाता है और सुझावों को लेकर खुल जाता है.

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आसान भाषा में कहें तो हिप्नोटिज्म की तुलना नींद से की जा सकती है जिसमें हम अपने आसपास को लेकर बिल्कुल भी अलर्ट नहीं होते हैं. हालांकि नींद में और सम्मोहन में फर्क ये है कि इसमें हमारा दिमाग किसी खास आवाज या निर्देश को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क हो जाता है. इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि हिप्नोसिस में हम दुनिया को देखते तो हैं लेकिन एक छेद के जरिए.



प्राचीन समय में सम्मोहन के लिए मंदिर होते थे, जिन्हें स्लीप या ड्रीम टेंपल कहा जाता था (सांकेतिक फोटो)


दुनियाभर में कई तरह के प्रयोग
Stanford University में साइकेट्री और बिहेवियरल साइंस के प्रोफेसर Dr. David Spiegel ने ये समझने की कोशिश की कि हिप्नोसिस दिमाग के किस हिस्से पर असर डालता है. इसके लिए MRI और आर्ट इमेजिंग तकनीक की मदद ली गई. अलग-अलग लोगों (सबजेक्ट) पर प्रयोग किया गया. देखा गया कि सम्मोहन के दौरान दिमाग का बायां हिस्सा अलर्ट हो जाता है और प्रीफंटल कॉर्टेक्स तेजी से काम करने लगता है. आम अवस्था में दिमाग के ये हिस्से अनछुए रहते हैं. दाएं हिस्से में भी occipital और anterior cingulate cortices सचेत रहते हैं. यही वजह है कि सम्मोहित इंसान ज्यादा बेहतर तरीके से कोई भी काम कर सकता है.

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साइंस काम करता है
Freudian psychologists के अनुसार हमारा मस्तिष्क 3 अवस्थाओं में रहता है- conscious, subconscious और unconscious. पहली यानी conscious दशा में हम अपने आसपास को लेकर पूरी तरह से सतर्क होते हैं. दूसरी अवस्था या subconscious में हम सचेत तो नहीं होते लेकिन अगर पूछा जाए तो हम याद करके कुछ न कुछ बता पाते हैं. जैसे अगर आपसे कैरेबियन की स्पेलिंग पूछी जाए तो हो सकता है कि आप सही स्पेलिंग बता सकें. इसके पीछे वजह यही है कि आपने कभी न कभी कैरेबियन शब्द पढ़ा या लिखा होगा. हिप्नोसिस का साइंस इसी subconscious पर काम करता है.

समझिए कि हिप्नोसिस दिमाग के किस हिस्से पर असर डालता है (Photo- pikist)


कैसे काम करता है हिप्नोसिस
इसमें 3 बेसिक और 2 एडवांस स्टेट होते हैं. पहले चरण में सबजेक्ट यानी जिसपर सम्मोहन किया जा रहा है, वो सम्मोहनकर्ता के असर में आने लगता है और उसे हल्की-हल्की नींद आने लगती है. हालांकि उसे पता होता है कि आसपास क्या घट रहा है. दूसरे चरण में नींद गहरी होती है और सबजेक्ट सम्मोहनकर्ता की बात सुनने लगता है. तीसरे स्टेप में उसका subconscious mind जाग जाता है और वो सम्मोहन करने वाले की बात मानना शुरू कर देता है.

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इसमें भी हालांकि सम्मोहन से जुड़े लोगों के 2 खेमे हैं. एक खेमे का मानना है कि इस अवस्था में भी सबजेक्ट वही बातें मानता है, जो उसे गलत नहीं लगतीं या जो वो अबतक करता आया है. चौथी और पांचवी अवस्था में सबजेक्ट के subconscious मस्तिष्क के साथ-साथ उसका conscious मस्तिष्क भी सजग हो जाता है और वो जो चाहे, वो कर सकता है. इसमें वो सम्मोहनकर्ता के असर से बाहर निकल चुका होता है. वैसे ये अवस्था बहुत मुश्किल है और अबतक किसी ने भी यहां तक पहुंचने का दावा नहीं किया है.

प्राचीन वक्त में भी था सम्मोहन
इसे देश की कुछ सबसे पुरानी विद्याओं में से एक माना जाता है. तब इसे 'प्राण विद्या' या 'त्रिकालविद्या' के नाम से जाना जाता था. वैसे हिप्नोटिज्म या हिप्नोसिस का जन्म ग्रीक भाषा से हुआ है, जिसमें इसका अर्थ है सोना. साल 1840 में वैज्ञानिक James Braid ने इसके साथ सबसे पहली बार प्रयोग किया, जिसका उद्देश्य ये जानना था कि कैसे हम अपने subconscious mind को एकाग्र कर सकते हैं.

पंद्रहवी सदी में मरीजों को दर्द से राहत देने के लिए सम्मोहित करना शुरू किया था (Photo- pixabay)


सम्मोहन से मिलती-जुलती कई अवस्थाएं हैं, जैसे मोहिनी- ये आकर्षण की एक अवस्था है, जिसमें कोई शख्स किसी खास चीज की ओर आकर्षित होता है. तांत्रिक इस क्रिया को जानने और कर सकने के दावे करते हैं. इसी तरह से वशीकरण भी एक स्टेट है, जिसमें अभ्यास के जरिए किसी को अपने कंट्रोल में किया जाता है. ये दोनों ही सम्मोहन जैसे हैं, लेकिन किए जाने के तरीके और प्रभाव के चलते अलग श्रेणी में रखे जाते हैं.

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क्यों पड़ी सम्मोहन की जरूरत
सम्मोहन विद्या का इस्तेमाल प्राचीन वक्त से हो रहा है. माना जाता है कि सबसे पहले स्विटरजरलैंड के चिकित्सक Paracelsus ने पंद्रहवी सदी में मरीजों को दर्द से राहत देने के लिए सम्मोहित करना शुरू किया था. उस वक्त में एनस्थीशिया नहीं था, लिहाजा वे संक्रमित पैर या हाथ या किसी हिस्से को काटने के लिए मरीज को सम्मोहित किया करते थे. ये एक तरह से पेन मैनेजमेंट का काम करता था. इजिप्ट और ग्रीस में सम्मोहन के लिए बाकायदा मंदिर होते थे, जिन्हें sleep temples और dream temples के नाम से जाना जाता था. भारत में भी मनुसंहिता में सम्मोहन का जिक्र मिलता है. अब भी हिप्नोसिस का इस्तेमाल इलाज के लिए होता है, लेकिन तब इसे हिप्नोथैरेपी कहा जाता है.
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