सबसे बड़ा Neutron star या सबसे छोटा Black hole, जानिए क्या है यह नई खोज

सबसे बड़ा Neutron star या सबसे छोटा Black hole, जानिए क्या है यह नई खोज
इस पिंड के बारे में वैज्ञानिक भ्रमित हैं कि क्या यह न्यूट्रॉन तारा है या ब्लैकहोल. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हाल ही में गुरुत्व तरंगों (Graviational waves) की मदद से खोजा गया एक रहस्यमय पिंड या तो न्यूट्रॉन तारा (Neutron Star) हो सकता है या फिर ब्लैकहोल (Black Hole).

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 25, 2020, 11:57 AM IST
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नई दिल्ली:  ब्रह्माण्ड (Universe) के बारे में हमें काफी कुछ जानना है और कई प्रकार की धारणाओं को हमें प्रमाणन की आवश्यकता है.यूं तो हमने कई आधुनिक उपकरणों से ब्रह्माण्ड की कई प्रक्रियाओं का अवलोकन किया है, लेकिन कई बार ये अवलकोन जवाब कम सवाल ज्यादा पैदा कर जाते है, तो कभी हमें एकदम ही नई किस्म की जानकारी दे जाते हैं. वैज्ञानिकों को हाल ही में एक घटना का पता चला है, उनको लगता है कि इस तरह का पिंड या तो ब्लैकहोल (Black Hole) हो सकता है या फिर न्यूट्रॉन तारा (Neutron Star).

नई जानकारी पर स्पष्ट नहीं
इस रहस्यम पिंड के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि  या तो यह अब तक का देखा गया सबसे छोटा ब्लैकहोल हो सकता है या फिर यह सबसे बड़ा न्यूट्रॉन तारा हो सकता है. इस पिंड को एक गुरुत्व तरंग सेंसर्स के जरिए पकड़ा गया है और यह हमारी पृथ्वी से 800 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है. इटली के यूरोपियन ग्रैविटेशनल ऑबजर्वेटरी (EGO) के आधुनिक वर्गो डिटेक्टर और अमेरिका की दो वेव ऑबजर्वेटरी ने पिछले साल इसे खोजा. यह हमारे सूर्य से 2.6 गुना ज्यादा भारी है.

इस तरह के पिंड अवलोकितन नहीं हो पाते हैं
यह ब्रह्माण्ड की उन ‘मैस गैप’ पिंडों की श्रेणी में आता है जिनका भार 2.6 से 5 सौर भार (Solar mass)  के बराबर होता है. ये आमतौर पर अवलोकित पिंडो की तरह नजर में नहीं आते हैं.  वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पिंड तब बना होगा जब कोई अज्ञात पिंड का एक बड़े ब्लैकहोल से 8 करोड़ साल पहले विलय हुआ होगा. ऐसा होते समय वहां से बड़ी मात्रा में गुरुत्व तरंगें निकली होंगी जो पृथ्वी पर पकड़ी गई हैं.





दोनों के बनने की प्रक्रिया में है यह अंतर
न्यूट्रॉन तारे और ब्लैकहोल दोनों ही तब बनते हैं जब बहुत बड़े और भारी तारों का ईंधन जल जाता है और उनमें विस्फोट होता है. इस प्रक्रिया को सुपरनोवा कहते हैं. जिन तारों का केंद्र हलका होता है वे न्यूट्रॉन तारे बन जाते हैं,  लेकिन भारी केंद्र वाले तारे ब्लैकहोल में बदल जाते हैं.  जिनमें पदार्थ इतना ज्यादा सघन हो जाता है क इसका गुरुत्व आपसास की गैलेक्सी की धूल और गैस तक को अपने अंदर खींच लेता है.

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क्या ब्लैकहोल ने निगल लिया न्यूट्रॉन तारा
यह शोध एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल लैटर्स में प्रकाशित हुआ है. इस शोध की टीम का कहना है कि इस पिंड के खास गुण की कई तरह से संभावित व्याख्या की जा सकती है. इनमें से सबसे प्रमुख यह है कि यह मूल पिंड काफी छोटा न्यूट्रॉन तारा रहा होगा जिसे अंततः ब्लैकहोल ने पूरा ही निगल लिया होगा. नॉर्थवेस्टर्सन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और लीगो ऑबजर्वेटरी नेटवर्क में शोधकर्ता विकी कालोगेरा ने कहा कि यहएक पैकमैन का एक छोटा बिंदु खा जाने जैसा होगा. जब दोनों पिंडों में वजन में इतनी बड़ी असमानता हो तो छोटे न्यूट्रॉन तारे की एक ही बार में निगल लिए जाने की संभावना होती है.

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गुरुत्व तरंगों ने इस पिंड के बारे में पता लगाया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


गुरुत्व तरंगो ने पता लगाया इनका
गुरुत्व तरंगों के अस्तित्व की भविष्यावाणी अलबर्ट आइंस्टीन ने की थी. ये तरंगें ऊर्जा को गुत्वाकर्षण विकिरण के तौर पर ले जाती है. इससे उनका पहचानने वाला उपकरण उन्हें पैदा करने वाला पिंड के भार का अनुमान लगा पाते हैं. गुरुत्व तरंगे इनके निर्माण का प्रमाण होती हैं इस लिए शोधकर्ताओं के मुताब कि इस पिंड की खोज से इतना बड़े भार अंतर पर सवाल पैदा हो जाता है.

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पडोवा यूनिविर्सिटी के शोधकर्ता मारियो स्पेरा का कहना है कि ब्रह्माण्ड हमसे जोर देकर कह रहा है कि हमें जटिल और सघन पिंडों के बनने और पनपने के बारे में काफी कुछ जान नहीं पा रहे हैं और हमें इन पिडों के निर्माण के बारे अपनी धारणआ पर पुनर्विचार करने की जरूरत है.
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