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गडकरी के खिलाफ ताल ठोंक चुके हैं स्पीकर पद के कांग्रेसी उम्मीदवार नाना पटोले

News18Hindi
Updated: November 30, 2019, 4:05 PM IST
गडकरी के खिलाफ ताल ठोंक चुके हैं स्पीकर पद के कांग्रेसी उम्मीदवार नाना पटोले
नाना पटोले पिछले साल ही कांग्रेस में आए हैं लेकिन उनकी साफ-सुथरी छवि की वजह से कांग्रेस ने उन्हें स्पीकर पद का दावेदार बनाया है.

राजनीति के अलावा महाराष्ट्र (Maharashtra) में नाना पटोले (Nana Patole) सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में विख्यात हैं. विशेष तौर पर भंडारा और गोंदिया जिले में उन्होंने काफी काम किया है.

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  • Last Updated: November 30, 2019, 4:05 PM IST
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महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी (Congress) और शिवसेना (Shiv Sena) के बीच बने राजनीतिक गठबंधन में विधानसभा स्पीकर का पद कांग्रेस के खाते में आया है. कांग्रेस ने नाना पटोले (Nana Patole) को अपना उम्मीदवार बनाया है. दिग्गज कांग्रेसी नेता बालासाहेब थोराट ने कहा कि सोनिया गांधी ने स्पीकर पद के लिए नाना पटोले का नाम फाइनल किया है. दिलचस्प ये है कि नाना पटोले पिछले साल ही बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आए हैं. लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी साफ-सुथरी छवि पर भरोसा जताया.

ये नाना की छवि का की असर था कि उनके नाम पर शिवसेना ने भी हामी भरने में देर नहीं लगाई. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे उनके नाम पर बिना देर लगाए सहमत हो गए. बिजेपी की तरफ से किसान कटोरे (Kisan Kathore) के नाम की घोषणा हुई है.


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कौन हैं नाना पटोले
नाना फागुन राव पटोले ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी. लेकिन साल 2008 में वो पार्टी से अलग हो गए थे. करीब एक साल तक निर्दल रहने के बाद उन्होंने साल 2009 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था. साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर वो लोकसभा चुनाव में उतरे. उनके सामने थे केंद्रीय मंत्री और एनसीपी के हैवीवेट नेता प्रफुल्ल कुमार पटेल.

एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल
एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल


उन्होंने इस चुनाव में प्रफुल्ल पटेल को करीब डेढ़ लाख वोटों से मात दी थी. हालांकि तीन साल बाद 2017 में नाना पटोले पहले सांसद बने जिन्होंने बीजेपी के खिलाफ आवाज बुलंद की. विवादों के कारण उन्होंने बीजेपी भी छोड़ दी थी. तब उन्होंने पार्टी शीर्ष नेतृत्व पर काफी आरोप भी लगाए थे जिनसे बाद में इनकार कर दिया था. एक साल बाद उन्होंने फिर से कांग्रेस में घरवापसी कर ली. उनके कांग्रेस में ज्वाइन करने पर खुद राहुल गांधी ने उनका स्वागत किया था. नाना पटोले सकोली विधानसभा सीट से तीन बार विधायक भी रह चुके हैं.



गडकरी के खिलाफ चुनाव
2019 के लोकसभा चुनाव में नागपुर सीट पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ कांग्रेस को किसी तगड़े उम्मीदवार की तलाश थी. कांग्रेस चाहती थी गडकरी के सामने कोई मजबूत प्रत्याशी उतारा जाए. इस सीट पर कांग्रेस ने नाना पटोले पर भरोसा जताया. उस समय पटोले को मीडिया में काफी सुर्खियां भी मिली थीं. हालांकि नितिन गडकरी को चुनाव में पटोले टक्कर नहीं दे पाए. नितिन गडकरी ने बड़े अंतर से चुनाव में जीत दर्ज की.

सामाजिक कार्यकर्ता की छवि
राजनीति के अलावा महाराष्ट्र में नाना पटोले सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में विख्यात हैं. विशेष तौर पर भंडारा और गोंदिया जिले में उन्होंने काफी काम किया है. वो ओबीसी समुदाय के अधिकारों की लड़ाई के लिए भी जाने जाते हैं.



सांसद के रूप में बेहतरीन छवि
भारतीय जनता पार्टी के सांसद के रूप में नाना पटोले की सदन में उपस्थिति और बहसों में हिस्सा लेने का रिकॉर्ड शानदार रहा है. अपने क्षेत्र में जनता की आवाज उठाने वाले नेता के रूप में मशहूर रहे हैं. सांसद पद से इस्तीफा देने से उनका सदन में उपस्थिति का रिकॉर्ड करीब 93 प्रतिशत था जो सामान्य औसत से काफी ज्यादा है.

क्यों किया कांग्रेस ने चयन
नाना पटोले की पहचान किसानों के नेता के रूप में भी है. माना जा रहा है कि उनको स्पीकर बनाकर कांग्रेस किसानों में अपना वोटबैंक मजबूत करने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस और एनसीपी के कई बड़े नेता पश्चिमी महाराष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं. ऐसे में विदर्भ के नाना पटोले को चुनकर पार्टी ने क्षेत्रवार बैलेंस बनाने की कोशिश भी की है.

एक ही इलाके से ताल्लुक रखते हैं फडणवीस और पटोले
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस और नाना पटोले दोनों ही विदर्भ से ताल्लुक रखते हैं. इस इलाके में अलग राज्य की मांग को लेकर भी आंदोलन होते रहे हैं. ऐसे में इस इलाके से एक बड़ा नेता देकर कोशिश की जा रही है क्षेत्रवार बैलेंस बना रहे. बीजेपी की पिछली सरकार में इस इलाके से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस थे.
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First published: November 30, 2019, 3:46 PM IST
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