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महाबलीपुरम के राजकुमार ने ही चीन में शुरू की थी शाओलिन मार्शल आर्ट्स, फैलाया था ध्‍यान संप्रदाय

News18Hindi
Updated: October 11, 2019, 5:12 PM IST
महाबलीपुरम के राजकुमार ने ही चीन में शुरू की थी शाओलिन मार्शल आर्ट्स, फैलाया था ध्‍यान संप्रदाय
महाबलीपुरम के राजकुमार बोधिधर्म बिना हथियार के युद्ध लड़ने में माहिर थे. उन्‍होंने आत्‍मरक्षा के लिए दक्षिण भारत में प्रचलित मार्शल आर्ट को बौद्ध धर्म में शामिल किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग (Prez Xi Jinping) की अनौपचारिक मुलाकात के लिए तमिलनाडु में चेन्‍नई के नजदीक महाबलीपुरम (Mahabalipuram) को चुनने के कई कारण सामने आ रहे हैं. बताया जाजा है कि जिनपिंग इतिहास, संस्‍कृति और अलग-अलग जगहों के चीन से संबंधों में काफी रुचि रखते हैं. वहीं महाबलीपुरम का भी चीन से काफी पुराना नाता है. यहां के राजा सुगंध के तीसरे बेटे बोधिधर्म (Bodhidharma) ने ही चीन में झेन बौद्ध धर्म (Zen Buddhism) का प्रचार किया था और शाओलिन टेंपल के बौद्ध भिक्षुओं को मार्शल आर्ट्स (Martial Arts) का प्रशिक्षण दिया.

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  • Last Updated: October 11, 2019, 5:12 PM IST
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नई दिल्‍ली. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) भारत पहुंच चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और शी जिनपिंग के बीच होने वाली ये अनौपचारिक मुलाकात (Informal Summit) तमिलनाडु के महाबलीपुरम (Mahabalipuram) में हो रही है. समुद्र किनारे बसे इस शहर में काफी प्राचीन मंदिर हैं. इन मंदिरों का चीन से पुराना रिश्ता है. वहीं, जिनपिंग इतिहास, संस्‍कृति और अलग-अलग जगहों के चीन से संबंधों में काफी रुचि रखते हैं. यही कारण है कि महाबलीपुरम को बैठक के लिए चुना गया है. बता दें कि समुद्र किनारे बसे इस शहर को पल्लव वंश (Pallava Dynasty) के राजा नरसिंह देव बर्मन ने बसाया था. इसी वंश के राजा सुगंध के तीसरे बेटे बोधिधर्म ने चीन में ध्‍यान संप्रदाय (झेन बौद्ध धर्म) का प्रचार किया.

ध्‍यान संप्रदाय के प्रचार के लिए चीन गए थे राजकुमार बोधिधर्म
बोधिधर्म (Bodhidharma) ने कम उम्र में ही बोद्ध धर्म को अपना लिया था. वह 'ध्‍यान' में चरम पर पहुंचे. इसके अलावा वह बिना हथियार के युद्ध लड़ने में भी माहिर थे. उन्‍होंने बौद्ध धर्म में आत्‍मरक्षा के लिए दक्षिण भारत में प्रचलित मार्शल आर्ट को शामिल किया. वहीं, वह मौन रहकर ध्‍यान में लीन रहते थे. भगवान बुद्ध ने ध्‍यान योग में लीन रहने वालों का ध्‍यान संप्रदाय शुरू किया था. भारत में बोधिधर्म इस परंपरा के 28वें और अंतिम गुरु हुए. बोधिधर्म ध्‍यान संप्रदाय के प्रचार के लिए चीन गए थे. एक बार उन्‍होंने नौ साल तक किसी से कोई बात नहीं की.

चीन के शासक ने मनमाफिक बात नहीं करने पर राज्‍य से निकाला

चीन के लोग उनकी ध्‍यान क्षमता और मार्शल से काफी प्रभावित हुए थे. इसलिए चीन में उन्‍हें गौतम बुद्ध से शुरू हुई श्रंखला में ही रखा जाता है. कहा जाता है कि उत्‍तरी चीन के तत्‍कालीन शासक वू ने उन्‍हें दर्शन की इच्‍छा से आमंत्रित किया. वह बौद्ध उपासक और उन्होंने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए कई काम किए थे. उन्‍होंने कई स्तूप, विहार और मठों का निर्माण कराया था. साथ ही संस्कृत बौद्ध ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद कराया था. राजा के बुलावे पर बोधिधर्म ने उनसे नान-किंग में मुलाकात की. बातचीत के दौरान जब बोधिधर्म ने राजा से सही से बात नहीं की तो उन्‍होंने बौद्ध भिक्षु को अपने राज्‍य से निकाल दिया.

बोधिधर्म का ध्‍यान संप्रदाय या झेन बौद्ध धर्म बाद के वर्षों में जापान, थाईलैंड, इंडोनेशिया और पूर्व के दूरदराज देशों तक पहुंचा.


शाओलिन टेंपल के भिक्षुओं को शारीरिक प्रशिक्षण देना शुरू किया
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बोधिधर्म तब भी लोगों को बौद्ध धर्म का पाठ पढ़ाते रहे. बाद में उन्‍होंने शाओलिन टेम्‍पल के भिक्षुओं को शारीरिक प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया. माना जाता है कि उनके द्वारा शुरू किए शारीरिक प्रशिक्षण के आधार पर ही शाओलिन मार्शल आर्ट की शुरुआत हुई. बोधिधर्म का ध्‍यान संप्रदाय या झेन बौद्ध धर्म बाद के वर्षों में जापान, थाईलैंड, इंडोनेशिया और पूर्व के दूरदराज देशों तक पहुंचा. चीन से इस रिश्‍ते के कारण भी मोदी-जिनपिंग की अनौपचारिक मुलाकात के लिए महाबलीपुरम को चुना गया.

महाबलीपुरम से चीन ने किया था तिब्‍बत सीमा की सुरक्षा का समझौता
चीन ने महाबलीपुरम के शासकों के साथ तिब्बत सीमा की सुरक्षा के लिए समझौता भी किया था. इस शहर से चीनी सिक्के भी मिले थे, जिससे पता चला कि महाबलीपुरम और चीन के बीच बंदरगाह के जरिये व्यापारिक संबंध थे. इसके चलते चीन और पल्लव वंश लगातार करीब आते गए. इसी के बाद 7वीं सदी में चीन ने महाबलीपुरम के राजाओं से सुरक्षा को लेकर समझौता किया. चीन ने ये समझौता पल्लव वंश के तीसरे राजकुमार बोधिधर्म के साथ ही किया था. इन कुछ वजहों के चलते चीन में बोधिधर्म को काफी सम्मान हासिल है.

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First published: October 11, 2019, 5:12 PM IST
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