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NASA और ESA मिलकर लाएंगे मंगल से मिट्टी के नमूने, जानिए कैसे होगा यह काम

NASA और ESA मिलकर लाएंगे मंगल से मिट्टी के नमूने, जानिए कैसे होगा यह काम

मंगल पर यह नया शोध जीवन की संभावना को लेकर निराशा पैदा करता है.

मंगल पर यह नया शोध जीवन की संभावना को लेकर निराशा पैदा करता है.

नासा (NASA) और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने मंगल (Mars) ने मिट्टी के नमूने लाने की योजना बना ली है. इसके लिए नासा का पर्सिवियरेंस रोवर (Perseverance) मंगल पर नमूने जमा करेगा.

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona virus) के कहर के चलते दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों सहित कई काम धीमे पड़ गए हैं. लेकिन नासा (NASA) ने अपने काम काज पर कोई प्रभाव पड़ने नहीं दिया है. उसकी पिछले कई सालों से चली आ रही परियोजनाओं पर काम जारी है. इसमें उसका मंगल का अभियान अहम है. अब नासा का अगला कदम मंगल (Mars) के मिट्टी के नमूने लाने का है. नासा ने उसकी योजना भी बना ली है.

क्या है नासा की मंगल को लेकर योजनाएं
नासा की मंगल को लेकर महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं. उसका क्यूरियोसिटी रोवर पहले ही मंगल पर पहुंच कर काम  कर रहा है. अब उसकी तैयारी मंगल पर इंसान को भेजने की है.नेचर में प्रकाशित लेख के अनुसार नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने मंगल से मिट्टी के नमूने लाने के योजना बना ली है.  नासा इसी साल अपना नया पर्सीवियरेंस रोवर मंगल पर भेजने की तैयारी कर रहा है. यही मंगल पर से मिट्टी के नमूने जमा करेगा.

कब जाएगा पर्सिवियरेंस?
नासा की फिलहाल योजना है कि वह मंगल के लिए अपना नया रोवर 17 जुलाई से 5 अगस्त के बीच प्रक्षेपित करेगा. इसे 18 फरवरी 2021 तक मंगल की जमीन पर उतारने की तैयारी है. यही मंगल की सतह से मिट्टी के नमूने जमा करेगा और वहां से ये नमूने पृथ्वी पर लाने की योजना भी नासा ने तैयारी कर ली है.

Mars
नासा का क्यूरोसिटी रोवल मंगल ग्रह पर पहले से ही काम कर रहा है. (Reuters)


बहुत मुश्किल है यह अभियान
मंगल से धूल और पत्थरों के नमूने लाना बहुत ही खर्चीला काम है. इसमें अंतरिक्ष यान  मंगल पर भेजने होंगे जो मंगल से नमूनों को पृथ्वी पर लाने में मदद करेंगे. अगर सब कुछ ठीक रहा तो दस साल हमें ही हमारे हाथ में मंगल के पत्थर हो सकते हैं. मंगल अन्वेषण कार्यक्रम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल मेयर का कहना है कि मंगल के बारे हमारी अपनी ही प्रयोगशालाओं में जानना रोमांचकारी होगा.

कैसे जमा किए जाएंगे नमूने
पर्सिवियरेंस रोवर मंगल से पृथ्वी पर नमूने लाने की प्रक्रिया का केवल पहला हिस्सा है. यदि यह समय पर भेजा जा सका तो अगले साल फरवरी में यह मंगल के जेजीरो क्रेटर पर उतरेगा. यह क्रेटर एक पुरानी नदी के डेल्टा पर है जहां जीवन के संकेत मिलने की संभावना है.  पर्सिविरेंस कई किलोमीटर घूम कर अलग अलग जगहों से नमूने एकत्र करेगा और 30 जियोलॉजिलकल सैंपलिंग ट्यूब में इन्हें जमा करेगा.

योजना बन चुकी है पूरी
इसके बाद ये नमूने पृथ्वी पर लाने की प्रक्रिया शुरू होगी. अभी तक यह तय नहीं था कि ऐसा कैसे होगा. लेकिन नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने यह योजना पूरी बना ली है. वे 2026 तक दो अंतरिक्ष यान मंगल भेजेंगे.

Space
नासा और ईएसए मिल कर मंगल से नमूने लाने के लिए अंतरिक्ष यान भेजेंगे.


कैसे लाए जाएंगे पृथ्वी पर नमूने
इनमें से पहला अंतरिक्ष यान जेजीरो क्रेटर पर उतरेगा. उसमें से एक छोटा रोवर पर्सिवियरेंस तक जाकर उससे नमूने लेगा और फिर दूसरे यान तक इन नमूनों को लाएगा. यह यान फिर मंगल की कक्षा में प्रक्षेपित होगा. इसके बाद दूसरा अंतरिक्ष यान नमूने लिए छोटे अंतरिक्ष यान तक जाएगा और उससे नमूने लेकर पृथ्वी तक वापस आएगा और उटाह में उतरेगा.

पहली बार ही किया जाएगा ऐसा
नासा के ही मंगल अन्वेशण कार्यक्रम के ही प्रमुख जिम वाटजिन का कहना है कि यह आसान नहीं है. पहले कभी भी मंगल से कोई यान प्रक्षेपित नहीं किया गया. पहले कभी मंगल की कक्षा में दो अंतरिक्ष यान मिले नहीं हैं. फिर भी हमने कोशिश की है कि इसे जितना हो सके सरल रखा है. मंगल पर जाना और वहां जेजीरो क्रेटर पर काम करना आसान होगा क्योंकि वहां पर्सिवियरेंस के पास इसकी भूमिका बनाने के लिए काफी समय होगा. वह छोटे रोवर के लिए पूरी तैयारी कर सकेगा.

नासा और ईएसए का संयुक्त कार्यक्रम है यह
इस अभियान में नासा जहां मंगल पर यान उतारने और वहां से प्रक्षेपित होने वाले यान पर काम कर रहा है तो वहीं यूरोपीय स्पेस एजेंसी छोटे रोवर और उससे नमूने वापस लाने पर काम करेगी. ईएसए ने अभी तक मंगल पर कोई रोवर नहीं भेजा है. यह रूस के साथ मिलकर इस ऐसा करने ही वाली थी कि कोरोना वायरस ने उस कार्यक्रम को टाल दिया. अगर सब ठीक रहा है तो मंगल से ये नूमने सितंबर 2031 तक पृथ्वी पर आ जाएंगे.

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Tags: Mars, Science, Space

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