NASA ने शुक्र के लिए किया दो अभियानों का ऐलान, जानिए कितना अहम है ये

शुक्र ग्रह (Venus) के पर तीन दशक बाद नासा का कोई अभियान जाएगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

शुक्र ग्रह (Venus) के पर तीन दशक बाद नासा का कोई अभियान जाएगा. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

नासा (NASA) ने शुक्र ग्रह (Venus) के लिए दो नए अभियानों की घोषणा की है. इसे लेकर वे वैज्ञानिक उत्साहित हैं जिनके लिए शुक्र ग्रह का अध्ययन मंगल (Mars) से ज्यादा अहम है.

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नासा (NASA) ने ऐलान किया है कि वह इस दशक के अंत तक शुक्र (Venus) पर दो अभियान भेजेगा. पिछले तीन दशकों बाद शुक्र ग्रह की ओर ध्यान दिया गया है. इससे उन वैज्ञानिकों में उत्साह है जो शुक्र ग्रह के अध्ययन को मंगल ग्रह (Mars) के अध्ययन से ज्यादा अहमियत देते हैं. नासा का कहना है कि वह उसके अभियान यह पड़ताल करने में ध्यान केंद्रित करेंगे कि एक समय में पृथ्वी की तरह रहने वाला शुक्र ग्रह आज नर्क की तरह कैसे हो गया.

यह होगा मकसद

नासा के नए प्रमुख बिल नेल्सन ने बताया कि दोनों अभियानों का मकसद शुक्र ग्रह के आज के हालात बनने के अध्ययन पर जोर देना  होगा. दोनों अभियान पूरे विज्ञान जगत को इस ग्रह के अध्ययन का मौका देंगे जो पिछले 30 सालों से भी ज्यादा समय से नजरअंदाज किया जा रहा था.

मंगल और शुक्र
आमतौर पर लोगों में उन पृथ्वी से बाहर उन जगहों के अध्ययन में ज्यादा दिलचस्पी होती है जहां जीवन के होने या जीवन के संकेत मिलने की संभावना बहुत अधिक होती है. इस लिहाज से पृथ्वी की सबसे पास दो ग्रह- मंगल और शुक्र में से लोगों और वैज्ञानिकों की भी दिलचस्पी मंगल ग्रह में ज्यादा है. लेकिन पिछले साल एक शोध में वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह पर फॉस्फीन नाम के पदार्थ के होने के संकेत पाए थे जो पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से केवल कुछ खास बैक्टीरिया ही बना सकते हैं. इससे मीडिया में यह अटकलें लगने लगी थीं कि शुक्र ग्रह पर जीवन मौजूद है.

पहला अभियान होगा डाविंसी प्लस

नासा के ये अभियान साल 2028 से 2030 के बीच प्रक्षेपित होंगे. नासा के डिस्कवरी कार्यक्रम के तहत इसमें 50 करोड़ डॉलर खर्च होंगे. पहला अभियान डीप एट्मोस्फियर वीनस इनेवेस्टीगेशन ऑफ नोबल गैसेस, कैमिस्ट्री एंड इमेजिंग है जिसे डाविंसी प्लस (DAVINCI+) के नाम से जाएगा. इसका काम शुक्र ग्रह की संचरना का अध्ययन करना होगा जिसमें खास तौर पर कार्बन डाइऑक्साइड का विशेष तौर पर अध्ययन किया जाएगा कि वह वहां कैसे बनी और पनपी.



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नासा (NASA) का पिछले कुछ सालों में मंगल ग्रह पर ज्यादा ध्यान था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay). (तस्वीर: Pixabay)

इन बातों की भी होगी खोजबीन

इस अभियान में इस बात की भी पड़ताल की जाएगी कि क्या शुक्र ग्रह पर कभी महासागर हुआ करते थे या नहीं. इसके घने स्ल्फ्यूरिक एसिड वाले वायुमंडल में मौजूद उन गैसों और अन्य तत्वों के मात्रा की जांच करने का प्रयास किया जाएगा जिनके कारण वहां ग्रीनहाउस प्रभाव काम कर रहा है. डाविंसी प्लस शुक्र की अंदर की उच्च विभेदन तस्वीरों को भी लेगा जिससे पृथ्वी की महाद्वीपों से तुलना कर पता जाएगा कि शुक्र पर टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं या नहीं.

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दूसरे अभियान का लक्ष्य

वैज्ञानिक अपने अध्ययन के नतीजों से इस ग्रह के निर्माण के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश करेंगे. इसके अलावा दूसरा अभियान वेरिटास (VERITAS) है जो वीनस एमिसिविटी, रेडियो साइंस, इंसार (InSAR), टोपोग्राफी एंड स्पैक्ट्रोस्कोपी का छोटा रूप है. इसका मुख्य उद्देश्य शुक्र कक्षा से ही उसकी सतह का नक्शा बनाना होगा और ग्रह के भूगर्भीय इतिहास की पड़ताल करना होगा.

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ये अभियान शुक्र ग्रह (Venus) के वायुमंडल के साथ उसकी सतह का भी अध्ययन करेंगे जिनके बारे में बहुत कम जानकारी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

और यह पड़ताल भी

वेरिटास एक खास तरह के राडार का उपोयग कर सतह का त्रिआयामी चित्र बनाएगा और यह पता लगाएगा कि क्या शुक्र ग्रह पर अब भी भूकंप और ज्वालामुखी आते हैं. यह इसके साथ ही यह इंफ्रारेड स्कैनिंग कर यहां की चट्टानों के प्रकार की जानकारी भी हासिल करेगा जिसके बारे में कोई जानकारी नहीं हैं. इसका काम यह पता लगाना भी होगा कि क्या सक्रिय ज्वालामुखी वायुमंडगल में भाप छोड़ रहे हैं या नहीं.

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इस अभियान की अगुआई तो नासा कर रहा है, लेकिन इसमें जर्मन एरोस्पेस सेंटर इंफ्रारेड मैपर देगा, वहीं इटली की स्पेस एजेंसी और फ्रांस की सेंटर नेशनल डीएटयूड्स स्पैटियालेस राडार और अभियान के अन्य हिस्सों में अपना योगदान देंगे. नासा ने इससे पहले मेगेनल अभियान साल 1990 में शुक्र के लिए भेजा था. उसके बाद कुछ अंतरिक्ष यान केवल उसके पास से गुजरे हैं.

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