3 साल पहले जल चुके अंतरिक्ष यान से पता चला, शनि के चांद पर हैं ज्वालामुखी

3 साल पहले जल चुके अंतरिक्ष यान से पता चला, शनि के चांद पर हैं ज्वालामुखी
टाइटन के ध्रुवों पर ज्वालामुखी की घटनाओं की जानकारी मिली है जिनके बारे में माना जा रहा है कि वे आज भी जारी हैं. (फोटो: नासा)

नासा के कैसिनी (Cassini) यान के आंकड़ों से पता चला है की शनि (Saturn) के चांद टाइटन (Titan)के ध्रुवों पर ज्वालामुखी सक्रिय हैं.

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नई दिल्ली: नासा के कैसिनी स्पेस प्रोब (Cassini space probe)ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं. उसने न केवल शनिग्रह (Saturn) और बृहस्पति ग्रह के बारे में जानकारियां दीं, बल्कि उनके उपग्रहों के बारे में भी कई अहम जानकारियां दीं. हाल ही में कैसिनी के आंकड़ों पता चला है कि शनि के चंद्रमा टाइटन (Titan) पर ज्वालामुखी (Volcano) फटने के प्रमाणों का पता लगाया है.

कैसिनी के आंकड़ों ने क्या बताया
जियोफिजिक्स रिसर्च जर्नल में प्लैनेटरी साइंस इस्टीट्यूट के शोधपत्र के मुताबिक कैसिनी ने ऐसे आंकड़े भेजे थे जिनसे टाइटन उपग्रह की आकृतियों से खास तरह की जानकारी मिली है. इस उपग्रह के ध्रुवों पर जो द्वीप, हालो (वलय) और ऊंचे नीचे भूभागों दिखाई देते हैं, वह दरअसल ज्वालामुखी गतिविधियों की ओर इशारा कर रहे हैं. इससे भी खास बात यह है कि यह ज्वालामुखी हाल ही के समय की है और यह अब भी जारी है.

ध्रुवों पर ज्वालामुखी बताते हैं खास
टाइटन हमारे सौरमंडल के उन उपग्रहों में शामिल है जिनकी खगोलविदों, अंतरिक्ष विज्ञानियों और अन्य वैज्ञानिकों की बहुत ज्यादा दिलचस्पी है. इस शोध के सहलेखक चार्ल्स वुड ने बताया, ”टाइटन के ध्रुवों पर कई ज्वालामुखी क्रेटरों का वहां की झीलों से संबंध है. इससे पता चल रहा है कि या तो यहां ज्वालामुखी कुंड हैं या फिर ज्वालामुखी बनने को हैं. कुछ क्रेटर तो इतने ताजा दिख रहे हैं जिससे लगता है कि यहां हाल ही में ज्वालामुखी सक्रिय था या अब भी सक्रिय है.



Planet with ring
टाइटन उन उपग्रहों में से है जिसेें वैज्ञानिकों की सबसे ज्यादा दिलचस्पी रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


और क्या जानकारी मिली
वुड ने आगे कहा, “ हमने दर्शाया कि इस बाद के भी सबूत मिले कि टाइटन पर आंतरिक ऊष्मा है. इससे वहां की सतह पर कायोवॉल्केनों बन रहे हैं जो बर्फ की क्रस्ट के पिघलने से सतह पर आ रहे हैं. इससे वहां वलय के आकार की आकृतियां बन रही हैं. इस तरह की आकृतियां धरती और मंगल के उन इलाकों में बनी हैं जहां ज्वालामुखी घटनाएं हुई हों. यह आकृतियां ध्रुवीय इलकों में बनी हैं जहां मीथेन की झीलें हैं. इससे जाहिर होता है कि मीथेन, नाइट्रोजन और कुछ पदार्थ भी मौजूद होंगे. ये आकृतियां ताजी हैं जिसका मतलब है कि वे अब भी आकार ले रही होंगी.

तो क्या फायदा मिलेगा इस जानकारी से
इस अध्ययन से इस बात पर प्रकाश डलेगा कि टाइटन ग्रह का निर्माण कैसे हुआ और उसके बाद वह आज की अवस्था में कैसे आया. इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि गुरुत्व, सौर तूफानों, और अन्य कारकों का ग्रहों और उनके उपग्रहों पर क्या असर होता है, खास तौर पर जो सूर्य से काफी ज्यादा दूरी पर स्थित हैं. इस अध्ययन में ध्रवीय इलाकों में बड़ी मात्रा में ज्वालामुखी की गतिविधि पाई गई है. इससे पता चलता है कि इनके पीछे कई कारक रहे होंगे. उन कारकों को तलाशने में भी इनसे वैज्ञानिकों को मदद मिलेगी.

Saturn
शनि का चक्कर लगाते हुए कैसिनी उसके वायुमंडल में गिर कर जल गया था. (फाइल फोटो)


क्या था कैसिनी का अभियान
.कैसिनी ह्यूजन्स नासा, यूरोपीय स्पेस ऐजेंसी और इटैलियन स्पेस एजेंसी ने मिलकर साल 1997 में शनी ग्रह, उसके उपग्रहों और उसके मशहूर वलय के अध्ययन के लिए भेजा गया था. इसने साल 2004 में शनि की कक्षा में प्रवेश किया था. यह अभियान साल 2017 में समाप्त घोषित कर दिया गया था जब यह यान शनि के वायुमंडल में प्रवेश कर जल गया था. लेकिन तब तक कैसिनी ने शनि और खास तौर पर टाइटन के बारे में अभूतपूर्व जानकारी दे दी थी. ताजा जानकारी भी उन्हीं में से एक है.

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