नासा की चंद्रा वेधशाला ने खोजा सबसे पुराना जेट फेंकने वाला सुपरमासिव ब्लैकहोल

यह सुपरमासिव ब्लैक होल (SMBH) अब तक की देखी गई सबसे लंबी जेट फेंक रहा है. (तस्वीर: Instagram/nasachandraxray)

यह सुपरमासिव ब्लैक होल (SMBH) अब तक की देखी गई सबसे लंबी जेट फेंक रहा है. (तस्वीर: Instagram/nasachandraxray)

नासा (NASA) के चंद्रा वेधशाला ने जो ब्लैकहोल खोजा वह हमारी गैलेक्सी मिल्की वे (Milky Way) से भी लंबी जेट फेंकने वाला क्वेजार (Quasar) बन चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 8:01 PM IST
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अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) ने अब तक का सबसे पुराना और सबसे दूर स्थित जेट वाला सुपरमासिव ब्लैकहोल (SMBH) खोजा है. हाल ही में नासा की चंद्रा एक्सेऑब्जरवेटरी (Chandra X-Ray Observatory) ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली है जिसमें शुरुआती ब्रह्माण्ड (Early Universe) के  सुपरमासिव ब्लैकहोल से कणों की लंबी और असाधारण जेट धारा निकलती हुई तस्वीर शेयर की है.

कितनी विशाल जेट है इसकी

इस तस्वीर के साथ नासा ने कैप्शन में यह भी बताया है कि वैज्ञानिकों ने सबसे दूर की एक्स रे उत्सर्जित करने वाली जेट को खोजा है. नासा ने बताया कि इस 1.6 लाख प्रकाशवर्ष लंबे जेट एक तेजी से बढ़ता सुपरमासिव ब्लैकहोल है जो अब क्वेजार (Quasar) में बदल चुका है. इसका नाम PSO J352.4034-15.3373 (संक्षेप में PJ352-15) है. यह पृथ्वी से 12.7 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है.

सूर्य से एक अरब गुना विशाल
अपने बयान में नासा ने कहा है कि यह जेट बिगबैंग के बाद अबतक के खोजे गए दो सबसे शक्तिशाली रेडियो तरंगों से पकड़े जाने वाले क्वेजार में से एक है. यह हमारे सूर्य के आकार से एक अरब गुना ज्यादा विशाल है और  इसकी जेट की लंबाई हमारे गैलेक्सी मिल्की वे से भी बहुत ज्यादा है जो एक लाख प्रकाश वर्ष चौड़ा है.

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आमतौर पर क्वेजार (Quasars) बहुत ही कम मात्रा में पाए जाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


ब्रह्माण्ड के इतिहास को समझ सकते हैं



इस क्वेजार से निकलने वाली एक्स रे को चंद्रा ऑबजरेवटरी ने पकड़ा है. ये एक्स रे तब निकली थीं जब हमारा ब्रह्माण्ड केवल 0.98 अरब साल पुराना था जो उसके आज की उम्र का दसवां भाग है. वैज्ञानिकों को विश्वासहै कि ये नतीजे उन्हें यह समझने में मदद करेंगे कि ब्रह्माण्ड के इतिहास के शुरुआती समय में विशालतम ब्लैकहोल कैसे बने होंगे

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सब कुछ नहीं खींच पाता है ब्लैक होल

नासा की वेबसाइट पर प्रकाशित लेख के मुताबिक ब्लैक होल वैसे तो बहुत ही शक्तिशाली गुरुत्व वाले ब्लैकहोल होते हैं. लेकिन इसके बावजूद वे अपने अंदर सबकुछ नहीं खींच सकते. किसी वस्तु को उसके अंदर जाने के लिए  डिस्क पर अपनी गति और ऊर्जा गंवानी होगी जिससे वह इवेंट होराइजन की सीमा को पार सके, जिसके बाद कुछ भी वापस नहीं आ पाता है.

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नासा ने यह भी बताया है कि जेट स्ट्रीम कैसे ब्लैक होल (Black Hole) की वृद्धि में मददगार होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


कैसे होती है ब्लैक होल की वृद्धि

जेट को शक्ति प्रदान करने वाली मैग्नेटिक फील्ड ब्लैक होल के  बाहर की डिस्क में तोड़ने का कार्य करती है. इससे डिस्क का पदार्थ ऊर्जा गंवाता है और उससे ब्लैकहोल की वृद्धि दर बढ़ती है यानि और ज्यादा पदार्थ ब्लैक होल में समाने लगता है. इस अध्ययन के अगुआई करने वाले और नासा के जेपीएल के थॉम कॉनर बताते हैं कि सुपरमासिव ब्लैकहोल के पास हम जेट के बारे में ऐसे सोच सकते हैं कि वे इतने ऊर्जावान होते हैं कि पदार्थ अंदर जाने लगता है और ब्लैकहोल बढ़ने लगता है.

डार्क ऊर्जा- अस्तित्व तक सिद्ध नहीं हुआ है, फिर भी वैज्ञानिक मानते हैं इसे

जब इलेक्ट्रॉन ब्लैकहोल से निकल कर इस जेट से प्रकाश की गति से  उड़ते हैं तो उड़ने के दौरान वे फोटोन से टकराते हैं. जिससे क़ॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड विकिरण बनता है. फोटोन की ऊर्जा बढ़ने से एक्स रे विकिरण निकलता है जिसे चंद्र वेधशाला पकड़ सकती है. इस माहौल में एक्सरे की चमक रेडियो तरंगों की तुलना की हो जाती है. यह वजह है कि विशाल एक्स रे जे का रेडियो उत्सर्जन ने कोई लेना देना नहीं हैं.
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