नासा के प्रमुख चीन के स्पेस स्टेशन को लेकर कॉन्ग्रेस को क्यों कर रहे हैं आगाह

नासा (NASA) की यह बेचैनी चीन (China) का खुद का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) करने की योजना की वजह से है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नासा (NASA) की यह बेचैनी चीन (China) का खुद का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) करने की योजना की वजह से है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

चीन (China) अपना इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) बनाने की तैयारी में हैं ऐसे में पृथ्वी की निचली कक्षा (Lower Orbit) में अमेरिका का वर्चस्व बनाए रखने के लिए नासा (NASA) प्रमुख ने विधिनिर्माताओं को आगाह किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 25, 2020, 1:07 PM IST
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इस समय अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) में अमेरिका और उसकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) दुनिया में सबसे आगे है. अमेरिका और चीन की प्रतिद्वंदता अंतरिक्ष मामलों में भी दिखाई देती है. चीन अंतरिक्ष अनुसंधान को लेकर अपनी महत्वाकांक्षाएं कई तरह से जाहिर कर चुका है. ऐसे में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के बंद होने का समय नजदीक होने और चीन का खुद का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तैयार करने की योजना पर काम करने से नासा में एक बेचैनी है. इसका संकेत खुद नासा प्रमुख जिम ब्रिडेंस्टाइन (Jim Bridenstine) ने दिया है.

यह जताई चिंता
ब्रिडेंनस्टाइन ने अमेरिका के विधिनिर्माताओं से कहा है कि ISS  का काम बंद होने के बाद पृथ्वी की निचली कक्षा में अमेरिका का अपनी उपस्थिति बनाए रखना जरूरी है जिससे चीन इस बात का रणनीतिक फायदा न उठा ले.

कब तक काम कर सकता है ISS
ISS साल 1998 में प्रक्षेपित किया गया था और साल 2000 से अब तक सही सलामत काम कर रहा है. इस स्टेशन में अमेरिका, जापान, यूरोप, और कनाडा की भागीदारी है और फिलहाल इसके साल 2030 तक काम करने की उम्मीद है. ISS बहुत ही उपयोगी अंतरिक्ष विज्ञान प्रयोगशाला साबित हुई है.



करनी होगी तैयारी
ब्रिडेंस्टाइन ने कहा, “मैं आपको एक बात कहूंगा जिसने मुझे बहुत चिंचित किया है और वह यह है कि एक दिन आने वाला है जब इंटरनेशनल स्पेस स्टेश का सामान्य जीवन खत्म होने वाला है. अगर अमेरिका के पृथ्वी की निचली कक्षा में उपस्थिति बनाए रखनी है, तो हमें आने वाले समय की तैयारी करनी होगी.”

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इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) बंद होने से पृथ्वी की निचली कक्षा (Lower orbit) में नासा की भूमिका खत्म हो जाएगी. (तस्वीर: Pixabay)


मांगी है इतनी राशि
इसके लिए नासा ने 2021 वित्त वर्ष के लिए 15 करोड़ डॉलर का निवेदन किया है जिससे पृथ्वी की निचली कक्षा का व्यवसायिकरण किया जा सके. यह कक्षा पृथ्वी की सतह से दो हजार किलोमीटर और उससे नीचे के क्षेत्र को माना जाता है.

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यह है इरादा
ब्रिडेंस्टाइन ने कहा, “हम पब्लिक प्राइवेट साझेदारी देखना चाहते हैं जहां नासा व्यवसायिक स्पेस स्टेशन प्रदाताओं के साथ व्यापार कर सके जिससे पृथ्वी की निचली कक्षा में हम निर्बाध और स्थायी मानवीय उपस्थिति बना सकें. उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं लगता है कि एक और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बनाना देश के हित में होगा, लेकिन उन्होंने ह कहा कि उन्हें यह जरूर लगता है कि यह देश के हित में होगा कि ऐसे व्यवसायिक उद्योग को बढ़ावा दिया जे जहां नासा एक ग्राहक हो.

चीन से खतरा
ब्रिडेंस्टाइन ने विधिनिर्माताओं को चेताया कि अमेरिका का अंतरिक्ष में वर्चस्व कायम रखना अहम है जब चीन अपना स्पेस स्टेशन साल 2022 तक शुरू करने की उम्मीद कर रहा है. चीन के इस स्टेशन का नाम तियानगोंग है जिसका मतलब स्वर्ग का महल होता है.

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चीन (China) अपना इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) साल 2022 तक शुरू करने की उम्मीद कर रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


यह योजना है चीन की
इसी साल जून में ही चीनी स्टेट मीडिया ने घोषणा की थी कि वह 17 देशों से 23 संस्थाओं से भागीदारी करने जा रहा है जो इस स्टेशन में वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. इन देशों में विकासशील और विकसित दोनों देश शामिल हैं  जिसमें फ्रांस, जर्मनी, जापान कीनिया और पेरू जैसे देशों के नाम हैं.

यह है डर
इसको लेकर ब्रिडेंस्टाइन ने कहा कि चीन तेजी से अपने स्पेस स्टेशन बना रहा है और इसके लिए वह तेजी से अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों में मार्केटिंग भी कर रहा है. यह दुर्भाग्य ही होगा कि अगर इतने सालों और प्रयासों के बाद पृथ्वी की निचली कक्षा को छोड़ कर इलाका किसी और लेने दिया जाता है.

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स्पेस स्टेशन में कई तरह के अहम प्रयोग हुए हैं. वहां की माइक्रोग्रैविटी के हालात बहुत ही उपयोगी हैं. ब्रिडेंस्टाइन का कहना है ऐसे में यह जरूरी है नासा कंपनियों को स्पेस स्टेशन बनाने के लिए पैसा दे और उसकी लागत निकालने के लिए वह बहुत से ग्राहकों में से एक रहे.
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