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Apollo 13 को NASA दे रही है श्रद्धांजलि, जानिए क्यों कहते हैं उसे ‘सफल नाकामी’

Apollo 13 को NASA दे रही है श्रद्धांजलि, जानिए क्यों कहते हैं उसे ‘सफल नाकामी’

बहुत से सैटेलाइट ईंधन खत्म होने के कारण बेकार हो गए हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

बहुत से सैटेलाइट ईंधन खत्म होने के कारण बेकार हो गए हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)

अपोलो 13 (Apollo 13) की 50वीं सालगिरह पर नासा (NASA) उस मिशन को श्रद्धांजलि दे रहा है. इसे उस समय सफल नाकामी करार दिया गया था. नासा इस मिशन से संबंधित जानकारियां साझा करने की योजना बना रहा है.

नई दिल्ली: नासा (NASA) अपने अंतरिक्ष अभियानों के लिए नए प्रयोग और बड़े जोखिम लेने लेने केलिए भी जाना जाता है. नासा ने अपने अपोलो-13 मिशन (Apollo 13 Mission) को श्रद्धांजली दे रही है. इसके में रॉकेट में विस्फोट होने के बाद भी इस मिशन के सभी सदस्य सुरक्षित वापस आ गए थे. इस मिशन को एक सफल नाकामी कहा जाता है.

इस मिशन से संबंधित जानकारी होगी साझा
एजेंसी इस मिशन से संबंधित संसाधन साझा कर रही है. जिसकी वजह से मिशन कंट्रोल टीम औरअंतरिक्ष यात्रियों यह नामुमकिन सा काम कर सके. नासा इन्हें अपने लूनार आर्टिमिस कार्यक्रम में भी प्रयोग करने की तैयारी कर रही है.

क्या कहा नासा प्रशासक ने
नासा की प्रेस विज्ञप्ति में प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन ने कहा, “50 साल पहले हमारा लक्ष्य हमारे चालकदल को बचाकर वापस धरती पर लाना था जिसे हमने चांद पर भेजा था. अब हमारा मिशन चांद पर वापस जाकर वहां लंबे समय तक रहने का है. हम इसके लिए कड़ा प्रयास कर रहे हैं कि हमें आर्टमिस में इस तरह की आपात स्थिति का सामना नहीं करना पड़े. फिर भी हमें किसी भी तरह की समस्या से निपटने लिए खुद को तैयार कर रहे हैं.”

Nasa, Moon, Mars
नासा की आने वाले सालों में कई बड़ी योजनाएं हैं..


कौन थे इस मिशन में
इस अपोलो 13 मिशन के चालकदल में कमांडर जेम्स (जिम) लोवेल जूनियर, कमांड मॉड्यूल पायलट जॉन स्विगर्ड जूनियर, और लूनार मॉड्यूल पायलट फ्रेड हेस जूनियर शामिल था. उनका सैटर्न 5 रॉकेट 11 अप्रैल 1970 को फ्लोरिडा स्थित नासा केनेडी स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित हुआ था. इसके कमांड मॉड्यूल को ओडिसी जबकि लूनार माड्यूल को एक्वेरियस नाम दिया गया था.

क्या हुआ था उस हादसे में
13 अप्रैल को चांद की ओर जाते समय ओपोलो सर्विस मॉड्यूल के ऑक्सीजन टैंक टूट गया. इस कार्यक्रम को वहीं रोकना पड़ा. नासा ने आनन फानन एक रेस्क्यू मिशन बनाया. ओपोलो मिशन कंट्रोल सेंटर के फ्लाइट कंट्रोल्स और इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की टीम ने इस रेस्क्यू मिशन को अंजाम दिया था.

बनाया गया था सफल रेस्क्यू मिशन
उन्होंने चालक दल को लूनार मॉड्यूल में ले जाकर उसका लाइफ बोट की तरह इस्तेमाल करने और पर्याप्त साधन जुटाकर स्पेस क्राफ्ट और चालकदल को वापस लाने की  योजना बनाई. यह चालकदल प्रशांत महासागर में 22 घंटे और 54 मिनट तक के सफर करने के बाद 17 अप्रैल को लौटा.

Space
अपोलो 13 चांद पर नहीं पहुंच सका था. (सांकेतिक तस्वीर)


नहीं मनाई जाएगी सालगिरह
-इस समय दुनिया भर में कोविड-19 के प्रसार की वजह से इस बार नासा अपोलो 13 की सालगिरह को मनाने की योजना नहीं बनाई है. जबकि सभी दस्तावेज, फोटो, वीडियो वगैरह इंटरनेट पर उपलब्ध है. इसमें  चालकदल की हाल ही में पाई गई बातचीत भी है.

एक खास वीडियो  भी
जो संसाधन नासा साझा करने जा रहा है उसमें अपोलो 13 के बहुत से वीडियो और इंटरव्यू “ अपोलो13: होम सेफ” नाम के खास कार्यक्रम में शुक्रवार को नासा टेलीविजन में प्रसारित किए जाएंगे. इसके अलावा ये वीडियो नासा की ओर से सोशल मीडिया पर भी उपलब्ध कराए जाएंगे. इसमें हेज और फ्लाइट डायरेक्टर जीन क्रान्ज और ग्लिन लूनी और इंजीनियर हैंक रोटर के बीच उस दौरान हुई बातचीत भी होगी. इस में उस पूरी मिशन के दौरान क्या क्या हुआ यह सब बताया जाएगा.

NASA
नासा इस बार कोविड -19 की वजह से यह सालगिरह नहीं मना पाएगा.


और क्या क्या साझा करेगा नासा
9 अप्रैल को नासा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस मिशन की खास तस्वीरें साझा करेगा तो सोशल मीडिया पर ही फॉलोअर्स अपोलो 13 संबंधी सवाल भी विशेषज्ञों से पूछ सकते हैं. इन सबके अलावा कुछ ऑडियो टेप और अपोलो 13 से ली गई चांद की खास तस्वीरें भी शेयर करने की योजना है.

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Tags: Nasa, Science, Space, Space travel

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